बीआरओ ने राजौरी, पुंछ और रियासी में बहाल किया सड़क संपर्क, NH-144A समेत कई मार्ग खुले
सारांश
मुख्य बातें
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुंछ और रियासी जिलों में 19 से 24 जुलाई 2025 के बीच हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से बाधित सड़क संपर्क को युद्धस्तर पर चलाए गए अभियान के ज़रिए बहाल कर दिया है। 'प्रोजेक्ट संपर्क' के तहत बीआरओ ने प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से मलबा हटाकर सुरक्षा बलों और आम नागरिकों की आवाजाही फिर से सुचारु की।
मुख्य घटनाक्रम
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 19 से 24 जुलाई के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में कई स्थानों पर बड़े भूस्खलन हुए, जिससे राजौरी-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-144ए) सहित अनेक महत्वपूर्ण सड़कें बंद हो गई थीं। रियासी से महोर, राजौरी से बुढाल और आगे महोर तथा गुल तक जाने वाले मार्गों पर भी भूस्खलन दर्ज किए गए।
इस अवधि में बडोरा नाले पर बनाया गया अस्थायी डायवर्जन तेज बहाव में बह गया। हालाँकि, मानसून-पूर्व तैयारियों के चलते बीआरओ ने पहले से स्थापित 200 फीट लंबे बेली ब्रिज का उपयोग कर यातायात को जारी रखा, जिससे महोर क्षेत्र का राजौरी और बुढाल से संपर्क बना रहा और इलाका पूरी तरह कटने से बच गया।
बीआरओ की त्वरित कार्रवाई
बीआरओ ने खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अपने जवानों, इंजीनियरों, भारी मशीनरी और आधुनिक उपकरणों को तत्काल प्रभावित इलाकों में तैनात किया। जोखिमपूर्ण हालात में मलबा हटाने, संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित करने और न्यूनतम समय में यातायात बहाल करने का काम किया गया।
लगातार बारिश के कारण राजौरी-थानामंडी सड़क और पुंछ क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों के उपकरणों और आधारभूत ढाँचे को भी नुकसान पहुँचा। इसके बावजूद बीआरओ की टीमों ने राहत अभियान में कोई शिथिलता नहीं आने दी।
आम जनता और सुरक्षा बलों पर असर
सड़क संपर्क बहाल होने से सुरक्षा बलों, आपदा राहत एजेंसियों और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सीमावर्ती जिलों में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सीधे सड़क संपर्क पर निर्भर करती है।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में मानसून के दौरान भूस्खलन एक नियमित चुनौती है, और इन इलाकों में वैकल्पिक मार्गों का अभाव स्थिति को और जटिल बना देता है।
रक्षा मंत्रालय का बयान
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह अभियान दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़क नेटवर्क को हर मौसम में चालू रखने के प्रति बीआरओ की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मंत्रालय के अनुसार, संगठन प्राकृतिक आपदाओं और आपात परिस्थितियों में भी संपर्क व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
क्या होगा आगे
मानसून अभी जारी है और सीमावर्ती क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। बीआरओ की टीमें प्रभावित मार्गों पर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया अभियान जारी रखे हुए हैं ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी रुकावट को शीघ्र दूर किया जा सके।