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बीआरओ ने अरुणाचल के हुरी गांव में 200 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाकर बाढ़ के बाद बहाल किया संपर्क

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बीआरओ ने अरुणाचल के हुरी गांव में 200 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाकर बाढ़ के बाद बहाल किया संपर्क

सारांश

11 जुलाई की फ्लैश फ्लड में पुल बह जाने के बाद कटे हुरी गांव को BRO ने 200 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाकर फिर से जोड़ा। LAC के नज़दीक यह सुदूर सीमावर्ती गांव नागरिक और रणनीतिक — दोनों दृष्टि से अहम है। भारी बारिश, भूस्खलन और दुर्गम इलाके के बावजूद BRO ने मिशन मोड में यह 'जीवनरेखा' बहाल की।

मुख्य बातें

सीमा सड़क संगठन (BRO) ने अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले के हुरी गांव में 200 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाकर सड़क संपर्क बहाल किया।
पुराना पुल 11 जुलाई की रात आई फ्लैश फ्लड में बह गया था, जिससे पूरे इलाके का संपर्क कट गया था।
निर्माण कार्य BRO के प्रोजेक्ट अरुणांक के तहत 756 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स की 85 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पूरा किया।
हुरी गांव भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट दामिन सर्किल में स्थित है, जिससे इसका रणनीतिक महत्व अधिक है।
भारी बारिश, भूस्खलन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बावजूद BRO ने दिन-रात काम कर पुल का निर्माण पूरा किया।
पुल बहाल होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति फिर से सुचारु हो सकेगी।

सीमा सड़क संगठन (BRO) ने अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले के सुदूर सीमावर्ती गांव हुरी का सड़क संपर्क फिर से बहाल कर दिया है। इसके लिए BRO ने 200 फीट लंबे बेली ब्रिज का निर्माण किया, जो उस पुराने पुल की जगह बना है जो 11 जुलाई की रात अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में बह गया था। यह पुल भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित एक रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र में बनाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

हुरी गांव, कुरुंग कुमे जिले के दामिन सर्किल में स्थित एक दूरदराज का सीमावर्ती गांव है। 11 जुलाई की रात फ्लैश फ्लड में पुल के बह जाने के बाद पूरे इलाके का संपर्क पूरी तरह कट गया था। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही, आवश्यक सामग्री की आपूर्ति, आपातकालीन सेवाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।

BRO के प्रोजेक्ट अरुणांक ने इस कार्य को मिशन मोड में अंजाम दिया। 756 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स के अंतर्गत 85 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी की टीमों ने इस अभियान को पूरा किया।

चुनौतियाँ और बाधाएं

BRO के प्रवक्ता के अनुसार, इस निर्माण कार्य में असाधारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लगातार भारी बारिश, तेज़ बहाव वाली नदी, कमज़ोर भूमि और दुर्गम पहाड़ी इलाकों ने पुल की नींव तैयार करने और संपर्क मार्ग बनाने को अत्यंत जटिल बना दिया।

इसके अलावा, दूरदराज क्षेत्र होने के कारण निर्माण सामग्री और संसाधनों की सीमित उपलब्धता तथा बार-बार होने वाले भूस्खलन ने काम को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया। इन सभी बाधाओं के बावजूद BRO के जवानों ने दिन-रात अनवरत काम जारी रखा।

निर्माण कार्य का विस्तार

इस परियोजना में केवल 200 फीट लंबे बेली ब्रिज का निर्माण और स्थापना ही शामिल नहीं था। BRO की टीमों ने भूस्खलन से जमा हुई मिट्टी को हटाया, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत की और संपर्क मार्गों को मज़बूत बनाया — ताकि लोगों, भारी मशीनरी और आवश्यक सामग्री की आवाजाही निर्बाध हो सके। BRO के अनुसार, बेहतर योजना, तकनीकी दक्षता और टीम के समन्वित प्रयासों से यह 'जीवनरेखा' न्यूनतम समय में बहाल की जा सकी।

रणनीतिक महत्व

हुरी गांव भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित है, जिसके कारण यहां सड़क संपर्क बनाए रखना न केवल नागरिक जीवन के लिए बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दे रही है।

आम जनता पर असर

पुल के तैयार होने से हुरी गांव के स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है। ग्रामीणों ने BRO का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क संपर्क बहाल होने से उनके दैनिक जीवन, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति में सुधार होगा। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं अक्सर संपर्क मार्गों को बाधित करती हैं, और BRO का यह त्वरित हस्तक्षेप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती यह है कि मानसून हर साल ऐसे इलाकों में तबाही मचाता है और हर बार 'मिशन मोड' की ज़रूरत पड़ती है। स्थायी और मौसम-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे में दीर्घकालिक निवेश के बिना, ये 'जीवनरेखाएं' हर मानसून में फिर से जोखिम में पड़ सकती हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BRO ने अरुणाचल प्रदेश के हुरी गांव में कौन-सा पुल बनाया?
BRO ने कुरुंग कुमे जिले के हुरी गांव में 200 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाया, जो 11 जुलाई की रात फ्लैश फ्लड में बह गए पुराने पुल की जगह तैयार किया गया है। इससे गांव का सड़क संपर्क फिर से बहाल हो गया है।
हुरी गांव का पुल कब और क्यों बह गया था?
हुरी गांव का पुल 11 जुलाई की रात अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में बह गया था। इससे पूरे इलाके का संपर्क टूट गया और लोगों की आवाजाही, आवश्यक सामग्री की आपूर्ति तथा स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
हुरी गांव रणनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
हुरी गांव अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले के दामिन सर्किल में स्थित है और भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट है। इसीलिए यहां सड़क संपर्क बनाए रखना नागरिक जीवन के साथ-साथ सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
BRO के किस प्रोजेक्ट ने यह पुल बनाया और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
BRO के प्रोजेक्ट अरुणांक के तहत 756 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स की 85 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी ने यह पुल बनाया। टीम को लगातार भारी बारिश, तेज़ बहाव वाली नदी, कमज़ोर भूमि, बार-बार भूस्खलन और सामग्री की सीमित उपलब्धता जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
नया पुल बनने से हुरी गांव के लोगों को क्या फायदा होगा?
पुल बहाल होने से हुरी गांव के निवासियों की दैनिक आवाजाही, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, शिक्षा और आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति फिर से सुचारु हो सकेगी। स्थानीय ग्रामीणों ने BRO का आभार व्यक्त किया है।
राष्ट्र प्रेस
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