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बीआरओ ने 12 दिनों में बनाया 140 फुट बेली पुल, किश्तवाड़ के मचैल से संपर्क बहाल

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बीआरओ ने 12 दिनों में बनाया 140 फुट बेली पुल, किश्तवाड़ के मचैल से संपर्क बहाल

सारांश

14 अगस्त 2025 की बादल फटने की घटना में बह गए पुल की जगह BRO ने मात्र 12 दिनों में 140 फुट का बेली पुल खड़ा कर दिया। किश्तवाड़ का यह मार्ग 3 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों की जीवन रेखा है और भविष्य में लद्दाख तक कनेक्टिविटी की कड़ी भी।

मुख्य बातें

सीमा सड़क संगठन (BRO) ने किश्तवाड़ के चिशोटी में 140 फुट लंबा बेली पुल मात्र 12 दिनों में तैयार किया।
यह पुल 14 अगस्त 2025 की विनाशकारी बादल फटने की घटना में नष्ट हुए पुल की जगह लेता है।
व्हाइट नाइट कोर के लेफ्टिनेंट जनरल पीके मिश्रा ने विधायक सुनील कुमार शर्मा की उपस्थिति में आभासी उद्घाटन किया।
यह मार्ग मचैल माता मंदिर का मुख्य पहुँच मार्ग है, जहाँ प्रतिवर्ष 3 लाख से अधिक तीर्थयात्री आते हैं।
रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2026 में गुलाबगढ़-मचैल सड़क BRO को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दी; औपचारिक हस्तांतरण आदेश शीघ्र अपेक्षित।

सीमा सड़क संगठन (BRO) ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में मात्र 12 दिनों के भीतर 140 फुट लंबा बेली पुल तैयार कर गुलाबगढ़ और मचैल क्षेत्र के बीच संपर्क पुनः स्थापित कर दिया है। चिशोटी स्थित यह पुल 14 अगस्त 2025 को हुई विनाशकारी बादल फटने की घटना में बह गए पुराने पुल की जगह लेता है।

निर्माण का विवरण

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बर्तवाल ने बताया कि इस पुल का निर्माण प्रोजेक्ट संपर्क के तहत 35 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स की 118 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पूरा किया। निर्माण कार्य में व्यापक स्थल तैयारी, तटबंध निर्माण, सामग्री परिवहन, बेली ब्रिज का शुभारंभ, और कठिन भूभाग तथा प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में पहुँच मार्गों का विकास शामिल था। सेना के इंजीनियर विशेषज्ञों ने पूरे कार्य में तकनीकी सहायता प्रदान की।

उद्घाटन और सराहना

व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल पीके मिश्रा ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता और पद्दर-नागसेनी से विधायक सुनील कुमार शर्मा की उपस्थिति में इस पुल का आभासी उद्घाटन किया। लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा ने BRO और सेना के इंजीनियरों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना संगठन के आदर्श वाक्य 'श्रमण सर्वम साध्यम: सब कुछ मेहनत से हासिल किया जा सकता है' को चरितार्थ करती है। उन्होंने इसे इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

रणनीतिक और धार्मिक महत्व

यह पुल किश्तवाड़-गुलाबगढ़-कुंडल-मचैल मार्ग का अभिन्न हिस्सा है, जो भविष्य में प्रस्तावित उमासी ला दर्रे के माध्यम से लद्दाख की जांस्कर घाटी में निम्मू तक कनेक्टिविटी प्रदान कर सकता है। गौरतलब है कि यह मार्ग पूजनीय मचैल माता मंदिर का मुख्य पहुँच मार्ग भी है, जहाँ प्रतिवर्ष 3 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं। इस प्रकार यह पुल न केवल सामरिक दृष्टि से बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सरकार की दीर्घकालिक योजना

बादल फटने की घटना के बाद रक्षा मंत्री ने घोषणा की थी कि गुलाबगढ़-मचैल सड़क के दीर्घकालिक विकास और रखरखाव की जिम्मेदारी BRO को सौंपी जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2026 में इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है और औपचारिक हस्तांतरण आदेश शीघ्र जारी होने की उम्मीद है। यह निर्णय इस क्षेत्र में दीर्घकालिक आधारभूत संरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आगे की राह

BRO द्वारा सड़क का प्रबंधन संभालने के बाद इस दुर्गम क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता और रखरखाव में सुधार की संभावना है। यह पुल न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि तीर्थयात्रियों और सुरक्षाबलों के लिए भी महत्वपूर्ण जीवन रेखा साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बादल फटने जैसी आपदाएँ बार-बार इसी क्षेत्र को क्यों प्रभावित करती हैं और स्थायी समाधान कब आएगा। गुलाबगढ़-मचैल सड़क का BRO को हस्तांतरण मार्च 2026 में स्वीकृत हुआ, लेकिन औपचारिक आदेश अभी भी लंबित है — यह देरी दर्शाती है कि प्रशासनिक प्रक्रिया अक्सर इंजीनियरिंग गति से पीछे रह जाती है। 3 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों और सीमावर्ती आबादी की निर्भरता को देखते हुए, इस मार्ग पर स्थायी और आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना की माँग अब और टाली नहीं जानी चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BRO ने किश्तवाड़ में कौन-सा पुल बनाया और यह कहाँ स्थित है?
BRO ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चिशोटी में 140 फुट लंबा बेली पुल बनाया है। यह पुल गुलाबगढ़ और मचैल क्षेत्र के बीच संपर्क बहाल करता है।
यह पुल क्यों बनाना पड़ा?
14 अगस्त 2025 को इस क्षेत्र में विनाशकारी बादल फटने की घटना हुई थी, जिसमें पुराना पुल बह गया था। उसी के स्थान पर यह नया बेली पुल बनाया गया है।
मचैल मार्ग का क्या महत्व है?
यह मार्ग पूजनीय मचैल माता मंदिर का मुख्य पहुँच मार्ग है, जहाँ प्रतिवर्ष 3 लाख से अधिक तीर्थयात्री आते हैं। इसके अलावा यह किश्तवाड़-गुलाबगढ़-कुंडल-मचैल रणनीतिक मार्ग का हिस्सा है और भविष्य में उमासी ला दर्रे के जरिए लद्दाख की जांस्कर घाटी तक कनेक्टिविटी प्रदान कर सकता है।
गुलाबगढ़-मचैल सड़क BRO को कब सौंपी जाएगी?
रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2026 में इस सड़क को BRO को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। औपचारिक हस्तांतरण आदेश शीघ्र जारी होने की उम्मीद है।
इस पुल का निर्माण किसने और कितने समय में किया?
प्रोजेक्ट संपर्क के तहत 35 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स की 118 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी ने सेना के इंजीनियर विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता से मात्र 12 दिनों में इस पुल का निर्माण पूरा किया।
राष्ट्र प्रेस
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