28 जून 2026
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विक्रमशिला सेतु पुनर्निर्माण: बीआरओ ने बिहार पुल निगम के 6 अधिकारियों को गुवाहाटी में किया सम्मानित

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विक्रमशिला सेतु पुनर्निर्माण: बीआरओ ने बिहार पुल निगम के 6 अधिकारियों को गुवाहाटी में किया सम्मानित

सारांश

4 मई को टूटे विक्रमशिला सेतु को महज़ 34 दिनों में बहाल कर बीआरओ और बिहार पुल निगम ने मिलकर सीमांचल की जीवनरेखा बचाई। गुवाहाटी में हुए सम्मान समारोह में 6 अधिकारियों को इस अंतर-एजेंसी इंजीनियरिंग उपलब्धि के लिए पुरस्कृत किया गया।

मुख्य बातें

बीआरओ ने 28 जून को गुवाहाटी में बीआरपीएनएनएल के 6 अधिकारियों को विक्रमशिला सेतु जीर्णोद्धार में सहयोग के लिए सम्मानित किया।
4 मई को भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा गिरने से सीमांचल क्षेत्र में संपर्क बाधित हुआ था।
रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर बीआरओ ने मरम्मत का कार्य संभाला; चार बेली ब्रिज स्थापित कर संरचना बहाल की गई।
पुल 7 जून को यातायात के लिए पुनः खोला गया — क्षति के महज़ 34 दिन बाद।
अतिरिक्त महानिदेशक जितेंद्र प्रसाद, वीएसएम और अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद ने विशेष इंजीनियरिंग दल का नेतृत्व किया।

बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने 28 जून को गुवाहाटी स्थित अपने मुख्यालय में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (बीआरपीएनएनएल) के अधिकारियों को भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के सफल जीर्णोद्धार में निभाई गई अहम भूमिका के लिए सम्मानित किया। यह पुल 4 मई को आंशिक रूप से ध्वस्त हो गया था, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क बुरी तरह बाधित हुआ था।

सम्मान समारोह का विवरण

बीआरपीएनएनएल के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुवाहाटी में अतिरिक्त महानिदेशक सीमा सड़क (पूर्व) के मुख्यालय का दौरा किया। इस अवसर पर अतिरिक्त महानिदेशक जितेंद्र प्रसाद, वीएसएम ने इस रणनीतिक पुल को रिकॉर्ड समय में बहाल करने में योगदान देने वाले बीआरपीएनएनएल के 6 अधिकारियों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार और अधीक्षण अभियंता शशि भूषण सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे।

पुल क्षति और बचाव अभियान की पृष्ठभूमि

4 मई को विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा गिरने से सीमांचल क्षेत्र में यातायात और संपर्क व्यवस्था ठप हो गई थी। बिहार सरकार के अनुरोध पर रक्षा मंत्रालय ने पुल की मरम्मत का दायित्व बीआरओ को सौंपा। महानिदेशक सीमा सड़क ने यह जिम्मेदारी अतिरिक्त महानिदेशक जितेंद्र प्रसाद को दी, जिन्होंने अधीक्षण अभियंता (सिविल) बिपिन कुमार चंद की देखरेख में एक विशेष इंजीनियरिंग दल गठित किया।

इंजीनियरिंग उपलब्धि: चार बेली ब्रिज से बहाली

मुख्य अभियंता (परियोजना) स्वास्तिक ब्रिगेडियर अमित साखरे की निगरानी में कार्यरत इस विशेष दल ने चार बेली ब्रिज स्थापित कर क्षतिग्रस्त संरचना को दुरुस्त किया। इस प्रयास के परिणामस्वरूप 7 जून को पुल यातायात के लिए पुनः खोल दिया गया। समारोह में बिपिन कुमार चंद ने अभियान के दौरान सामने आई इंजीनियरिंग चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों में अपनाई गई नवीन तकनीकों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

बीआरपीएनएनएल की भूमिका

अधिकारियों के अनुसार, बीआरपीएनएनएल ने पूरे अभियान में लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने, तकनीकी समन्वय सुगम बनाने और स्थानीय प्रशासनिक आवश्यकताओं में सहयोग देने की महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी सहयोग के चलते परियोजना रिकॉर्ड समय में पूरी हो सकी।

अंतर-एजेंसी सहयोग का संदेश

समारोह को संबोधित करते हुए जितेंद्र प्रसाद ने विक्रमशिला सेतु के जीर्णोद्धार को अंतर-एजेंसी समन्वय, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का एक अनुकरणीय उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह सफल अभियान बीआरओ और बिहार सरकार के बीच आवश्यक बुनियादी ढाँचे की बहाली और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने की मज़बूत साझेदारी को रेखांकित करता है। आने वाले समय में इस तरह के अंतर-एजेंसी सहयोग के मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और आमतौर पर बहाली की प्रक्रिया महीनों खिंचती है। 34 दिनों में पुल खोलना इसलिए उल्लेखनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस अंतर-एजेंसी मॉडल को संस्थागत रूप दिया जाएगा, या यह एक बार की उपलब्धि बनकर रह जाएगी। सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे की दीर्घकालिक मज़बूती के लिए प्रतिक्रियात्मक मरम्मत से आगे बढ़कर निवारक रखरखाव की नीति ज़रूरी है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रमशिला सेतु को किसने और कब बहाल किया?
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर यह कार्य संभाला और 7 जून को पुल को यातायात के लिए पुनः खोल दिया। पुल 4 मई को आंशिक रूप से ध्वस्त हुआ था, यानी मरम्मत महज़ 34 दिनों में पूरी हुई।
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत में किस तकनीक का उपयोग किया गया?
बीआरओ की विशेष इंजीनियरिंग टीम ने चार बेली ब्रिज स्थापित कर क्षतिग्रस्त संरचना को बहाल किया। अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद ने अभियान के दौरान अपनाई गई नवीन तकनीकों की जानकारी समारोह में साझा की।
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (बीआरपीएनएनएल) की इस अभियान में क्या भूमिका रही?
बीआरपीएनएनएल ने पूरे अभियान में लॉजिस्टिक सहायता, तकनीकी समन्वय और स्थानीय प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया। अधिकारियों के अनुसार, इसी सहयोग के चलते परियोजना रिकॉर्ड समय में पूरी हो सकी।
विक्रमशिला सेतु के टूटने से किस क्षेत्र पर असर पड़ा था?
4 मई को पुल का एक हिस्सा गिरने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क बाधित हो गया था, जिससे सीमांचल क्षेत्र में यातायात और कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हुई। यह पुल भागलपुर जिले में स्थित एक रणनीतिक कड़ी है।
गुवाहाटी में सम्मान समारोह में किन्हें पुरस्कृत किया गया?
बीआरपीएनएनएल के कुल 6 अधिकारियों को सम्मानित किया गया, जिनमें प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार और अधीक्षण अभियंता शशि भूषण सिंह प्रमुख थे। सम्मान अतिरिक्त महानिदेशक जितेंद्र प्रसाद, वीएसएम द्वारा प्रदान किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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