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विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में गिरा: भागलपुर में यातायात बंद, एसएसपी ने मुंगेर रूट अपनाने की अपील की

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विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में गिरा: भागलपुर में यातायात बंद, एसएसपी ने मुंगेर रूट अपनाने की अपील की

सारांश

पूर्वी बिहार की जीवनरेखा कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा 4 मई की रात गंगा नदी में गिर गया। रोज़ाना 1 लाख लोगों की आवाजाही वाला यह पुल अब अगले आदेश तक बंद है — और बिहार में पुल ढहने की यह कोई पहली घटना नहीं है।

मुख्य बातें

विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा 4 मई 2025 की रात गंगा नदी में गिर गया।
पिलर नंबर 137 के पास हाइवा ट्रक टकराने के बाद पिलर नंबर 133 रात 11:33 बजे धंसने लगा।
भागलपुर डीएम नवल किशोर चौधरी और एसएसपी प्रमोद कुमार यादव मौके पर कैम्प कर रहे हैं।
अगले आदेश तक पुल पर सभी वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध; पुल को दोनों तरफ से बैरिकेड कर सील किया गया।
एसएसपी ने नौगछिया/सीमांचल से आने-जाने वालों को मुंगेर गंगा सेतु से जाने की अपील की।
यह पुल 4.7 किलोमीटर लंबा है और रोज़ाना करीब 1 लाख लोगों के आवागमन का मुख्य साधन है।

भागलपुर के विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा 4 मई 2025 की रात गंगा नदी में गिर गया, जिसके बाद पूर्वी बिहार के इस एकमात्र गंगा पुल पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पिलर नंबर 137 के पास एक हाइवा ट्रक के टकराने के बाद स्थिति बिगड़ी और पिलर नंबर 133 रात करीब 11:33 बजे धंसने लगा। राहत की बात यह रही कि उस समय उस हिस्से पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा जानी नुकसान टल गया।

मुख्य घटनाक्रम

पुल पर तैनात पुलिसकर्मियों ने रात 11:33 बजे पिलर नंबर 133 में असामान्य हलचल देखी और तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। रात 11:55 बजे तक पिलर काफी हद तक झुक चुका था और इसके बाद पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में गिर गया। एहतियात के तौर पर पुल पर मौजूद लोगों को समय रहते हटा लिया गया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

भागलपुर के डीएम नवल किशोर चौधरी और एसएसपी प्रमोद कुमार यादव मौके पर कैम्प कर रहे हैं। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पुल को भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ से बैरिकेड लगाकर सील कर दिया है। अगले आदेश तक किसी भी प्रकार के वाहन की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है।

वैकल्पिक रूट की अपील

एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने वीडियो बयान जारी करते हुए आम लोगों से अपील की है कि नौगछिया या सीमांचल से आने-जाने वाले मुंगेर में बने गंगा सेतु का इस्तेमाल करें। झारखंड से सीमांचल की ओर जाने वाले वाहनों को भी मुंगेर होते हुए जाना होगा। पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि यातायात सुचारु रूप से वैकल्पिक मार्ग पर मोड़ा जा सके।

विक्रमशिला सेतु का महत्व

विक्रमशिला सेतु बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर बना करीब 4.7 किलोमीटर लंबा दो-लेन का पुल है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग 131ए का हिस्सा है। यह दक्षिण बिहार के भागलपुर को उत्तर बिहार के नवगछिया, पूर्णिया और कटिहार से जोड़ता है और रोज़ाना करीब 1 लाख लोगों के आवागमन का मुख्य साधन है। इसका उद्घाटन 30 जून 2001 को हुआ था, जबकि निर्माण 1991 में शुरू होकर करीब 10 साल में पूरा हुआ। यह पुल न केवल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच जीवनरेखा है, बल्कि झारखंड से पश्चिम बंगाल, असम और सिक्किम तक व्यापारिक आवाजाही के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।

बिहार में पुल गिरने की पुरानी घटनाएँ

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में पुल ढहने की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। 22 सितंबर 2024 को पटना के बख्तियारपुर-ताजपुर में गंगा पर निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा था। 8 अगस्त 2024 को कटिहार के बकिया सुखाय में निर्माणाधीन पुल फेल हुआ था। 18 जून 2024 को अररिया में ₹12 करोड़ की लागत से बना नया पुल उद्घाटन से पहले ही ढह गया था। 22 मार्च 2024 को सुपौल के बकौर में कोसी नदी पर बने 10.5 किलोमीटर लंबे पुल का एक हिस्सा गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इससे पहले 4 जून 2023 को अगुवानी-सुल्तानगंज के बीच ₹1,710 करोड़ की लागत से बना पुल दो साल में दूसरी बार गिर गया था। गौरतलब है कि यह बिहार में बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और अगले आदेश तक पुल पर यातायात बंद रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार के बुनियादी ढाँचे की दशा का आईना है। 2023 से अब तक आधा दर्जन से अधिक पुल गिर चुके हैं — कुछ उद्घाटन से पहले, कुछ करोड़ों की लागत के बावजूद। असली सवाल यह है कि निर्माण गुणवत्ता की जाँच कौन करता है और जवाबदेही कहाँ है। रोज़ाना 1 लाख लोगों की जीवनरेखा को बंद करना पड़े, यह स्थिति बताती है कि ढाँचागत रखरखाव और निगरानी तंत्र दोनों में गंभीर खामियाँ हैं।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रमशिला सेतु का हिस्सा क्यों और कब गिरा?
बताया जा रहा है कि पिलर नंबर 137 के पास एक हाइवा ट्रक के टकराने के बाद नुकसान हुआ और 4 मई 2025 की रात 11:33 बजे पिलर नंबर 133 धंसने लगा। रात 11:55 बजे तक पिलर काफी झुक गया और इसके बाद पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में गिर गया।
विक्रमशिला सेतु बंद होने से किन इलाकों पर असर पड़ेगा?
यह पुल भागलपुर को नवगछिया, पूर्णिया और कटिहार से जोड़ता है और रोज़ाना करीब 1 लाख लोग इसका उपयोग करते हैं। झारखंड से सीमांचल और पूर्वोत्तर राज्यों तक व्यापारिक आवाजाही भी प्रभावित होगी।
विक्रमशिला सेतु बंद होने पर वैकल्पिक रास्ता क्या है?
एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने अपील की है कि नौगछिया या सीमांचल से आने-जाने वाले मुंगेर में बने गंगा सेतु का उपयोग करें। झारखंड से सीमांचल जाने वाले वाहनों को भी मुंगेर होते हुए जाना होगा।
विक्रमशिला सेतु कब बना था और इसकी लंबाई कितनी है?
विक्रमशिला सेतु का निर्माण 1991 में शुरू हुआ था और इसका उद्घाटन 30 जून 2001 को हुआ था। यह करीब 4.7 किलोमीटर लंबा दो-लेन का पुल है और राष्ट्रीय राजमार्ग 131ए का हिस्सा है।
बिहार में इससे पहले कौन-कौन से पुल गिरे हैं?
2023-2024 के बीच बिहार में कई पुल ढहे हैं — जून 2023 में अगुवानी-सुल्तानगंज पुल दूसरी बार गिरा, मार्च 2024 में सुपौल में एक व्यक्ति की मौत हुई, जून 2024 में अररिया में ₹12 करोड़ का पुल उद्घाटन से पहले ढहा, और अगस्त व सितंबर 2024 में कटिहार और पटना में भी हादसे हुए।
राष्ट्र प्रेस
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