विक्रमशिला सेतु का 25 मीटर स्लैब गंगा में गिरा, भागलपुर में आवाजाही ठप; बड़ा हादसा टला

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विक्रमशिला सेतु का 25 मीटर स्लैब गंगा में गिरा, भागलपुर में आवाजाही ठप; बड़ा हादसा टला

सारांश

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का 25 मीटर लंबा स्लैब गंगा में गिर गया — लेकिन पुलिस की समय पर गश्त ने बड़ी त्रासदी टाल दी। रोज़ाना 1 लाख लोगों की आवाजाही का यह पुल अब बंद है और मुंगेर मार्ग से वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की गई है।

मुख्य बातें

विक्रमशिला सेतु का करीब 25 मीटर लंबा स्लैब 4 मई 2026 को गंगा नदी में गिरा।
पिलर संख्या 33 के क्षतिग्रस्त होने को हादसे का कारण बताया गया है।
पुलिस गश्त के चलते समय रहते पुल खाली कराया गया, कोई जनहानि नहीं।
भागलपुर और नौगछिया दोनों छोरों पर बैरिकेडिंग, आवाजाही पूरी तरह बंद।
सभी वाहन अब मुंगेर मार्ग से; बाबूपुर गंगा घाट से जलमार्ग व्यवस्था जल्द होगी।
यह 4.7 किलोमीटर लंबा पुल रोज़ाना करीब 1 लाख लोगों की आवाजाही का मुख्य ज़रिया है।

भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु का करीब 25 मीटर लंबा स्लैब 4 मई 2026 को टूटकर नदी में समा गया। पिलर संख्या 33 के क्षतिग्रस्त होने से हुई इस घटना के बाद प्रशासन ने भागलपुर और नौगछिया दोनों छोरों पर तत्काल बैरिकेडिंग कर पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी। समय रहते पुलिस गश्त के चलते कोई जनहानि नहीं हुई, जिसे सदर एसडीएम ने 'ईश्वरीय कृपा' बताया।

घटनाक्रम: कैसे टला बड़ा हादसा

सदर एसडीएम विकास कुमार ने मीडिया को बताया कि उस समय ट्रैफिक डीएसपी और पुलिस के जवान पुल पर गश्त कर रहे थे। स्लैब धीरे-धीरे गिरना शुरू हुआ, जिससे समय रहते अलर्ट जारी कर पुल खाली करा लिया गया। मौके पर सिटी डीएसपी अजय कुमार चौधरी भी कैंप कर स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।

तकनीकी कारण

पथ निर्माण प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रौशन ने बताया कि पिलर संख्या 33 के क्षतिग्रस्त होने के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि फिलहाल वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जा रहा है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुल निर्माण से जुड़ी विशेषज्ञ टीम जल्द मौके पर पहुँचने वाली है।

आम जनता पर असर और वैकल्पिक व्यवस्था

विक्रमशिला सेतु प्रतिदिन करीब 1 लाख लोगों की आवाजाही का मुख्य ज़रिया है और राष्ट्रीय राजमार्ग 131ए का हिस्सा है। यह 4.7 किलोमीटर लंबा दो-लेन पुल दक्षिण बिहार के भागलपुर को उत्तर बिहार के नवगछिया, पूर्णिया और कटिहार से जोड़ता है। पुल बंद होने से लाखों लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है।

एसडीएम विकास कुमार ने बताया कि अब सभी वाहन मुंगेर के रास्ते आवागमन करेंगे। नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और इलाज के लिए आने-जाने वालों के लिए बाबूपुर गंगा घाट से जेट्टी, नाव और अन्य जलमार्ग व्यवस्था जल्द शुरू की जाएगी। उच्च स्तर पर संबंधित टीम को सूचित कर दिया गया है।

प्रशासन की अपील

सदर एसडीएम ने मीडिया के ज़रिए आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह का जोखिम न उठाएँ और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब बिहार में बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट से पुल की मरम्मत और पुनः संचालन की समय-सीमा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार के बुनियादी ढाँचे की दीर्घकालिक उपेक्षा का प्रतीक है। पिलर संख्या 33 का क्षतिग्रस्त होना यह सवाल उठाता है कि नियमित संरचनात्मक ऑडिट क्यों नहीं हुए। रोज़ाना 1 लाख लोगों की आवाजाही वाले इस राष्ट्रीय राजमार्ग के पुल की इस स्थिति तक पहुँचना प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करता है। 'ईश्वरीय कृपा' से बड़ा हादसा टला — लेकिन अगली बार भाग्य साथ नहीं दे सकता; ज़रूरत है कि राज्य के सभी पुरानेपुलों का तत्काल स्वतंत्र संरचनात्मक मूल्यांकन हो।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रमशिला सेतु का स्लैब क्यों टूटा?
पथ निर्माण प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रौशन के अनुसार पिलर संख्या 33 के क्षतिग्रस्त होने के कारण यह हादसा हुआ। पुल निर्माण से जुड़ी विशेषज्ञ टीम जल्द मौके पर पहुँचकर विस्तृत जाँच करेगी।
क्या विक्रमशिला सेतु हादसे में कोई हताहत हुआ?
नहीं, इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। पुल पर तैनात ट्रैफिक डीएसपी और पुलिसकर्मियों ने समय रहते अलर्ट जारी कर पुल खाली करा लिया था।
विक्रमशिला सेतु बंद होने पर वाहन किस रास्ते से जाएँगे?
सदर एसडीएम विकास कुमार के अनुसार अब सभी वाहन मुंगेर मार्ग से आवागमन करेंगे। नौकरीपेशा, छात्रों और मरीज़ों के लिए बाबूपुर गंगा घाट से जेट्टी और नाव की व्यवस्था जल्द की जाएगी।
विक्रमशिला सेतु कितना महत्वपूर्ण है?
विक्रमशिला सेतु 4.7 किलोमीटर लंबा दो-लेन पुल है जो राष्ट्रीय राजमार्ग 131ए का हिस्सा है। यह दक्षिण बिहार के भागलपुर को उत्तर बिहार के नवगछिया, पूर्णिया और कटिहार से जोड़ता है और रोज़ाना करीब 1 लाख लोगों की आवाजाही का मुख्य ज़रिया है।
पुल की मरम्मत कब तक होगी?
अभी तक मरम्मत की समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। विशेषज्ञ टीम के मौके पर पहुँचने और संरचनात्मक जाँच के बाद ही आगे की कार्ययोजना स्पष्ट होगी। प्रशासन ने कहा है कि उच्च स्तर पर संबंधित टीम को सूचित कर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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