विक्रमशीला सेतु मरम्मत पूरी: 21 दिनों में काम, 30 नवंबर तक भारी वाहनों के लिए खुलेगा पुल
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री कुमार शैलेंद्र ने 8 जून 2026 को पत्रकारों को जानकारी दी कि विक्रमशीला सेतु की मरम्मत का कार्य पूरा हो गया है और अब हल्के वाहनों का आवागमन पुनः सुचारु हो गया है। 3 मई 2026 की रात पुल का एक हिस्सा टूट जाने के बाद से स्थानीय लोगों को आवागमन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
3 मई की रात विक्रमशीला सेतु का एक हिस्सा टूटने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तत्काल अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरम्मत कार्य में कोई भी अड़चन न आने दी जाए और काम यथाशीघ्र पूरा किया जाए। 16 मई को मरम्मत कार्य औपचारिक रूप से शुरू हुआ और 21 दिनों के भीतर इसे पूरा कर लिया गया।
श्रमिकों को सम्मान
मंत्री शैलेंद्र ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले श्रमिकों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी कॉरिडोर और अयोध्या राम मंदिर निर्माण में जुटे श्रमिकों को सम्मानित किया था, उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए उन्होंने भी इस पुल की मरम्मत में लगे कामगारों और अधिकारियों को सम्मान दिया, ताकि उनका उत्साहवर्धन हो।
पुल की मौजूदा स्थिति
फिलहाल विक्रमशीला सेतु पर केवल हल्के वाहन ही चल रहे हैं और अधिकतम 10 टन भार वाले वाहनों को अनुमति दी गई है। मंत्री ने बताया कि अभियंता अब पुल का विस्तृत निरीक्षण करेंगे और वीडियोग्राफी के माध्यम से संरचना की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि कहीं कोई खामी मिली तो उसे तत्काल दूर किया जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री शैलेंद्र ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जैसा वादा किया था — 7 जून तक पुल जनता को समर्पित करने का — वह बिना किसी रुकावट के पूरा किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई पुल को लेकर अफवाह फैलाने की कोशिश करेगा तो उसे चिन्हित किया जाएगा।
क्या होगा आगे
मंत्री ने स्पष्ट किया कि 30 नवंबर 2026 तक विक्रमशीला सेतु को भारी वाहनों के लिए भी खोल दिया जाएगा, बशर्ते सभी तकनीकी मानक पूरे हों। इंजीनियरों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण और वीडियोग्राफी रिपोर्ट के आधार पर यह अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह पुल भागलपुर क्षेत्र की जीवन-रेखा माना जाता है और भारी वाहनों की आवाजाही बहाल होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी राहत मिलेगी।