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विक्रमशीला सेतु मरम्मत पूरी: 21 दिनों में काम, 30 नवंबर तक भारी वाहनों के लिए खुलेगा पुल

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विक्रमशीला सेतु मरम्मत पूरी: 21 दिनों में काम, 30 नवंबर तक भारी वाहनों के लिए खुलेगा पुल

सारांश

3 मई को टूटा, 16 मई से मरम्मत शुरू — और सिर्फ 21 दिनों में विक्रमशीला सेतु फिर चालू। अभी 10 टन तक के हल्के वाहन ही चल रहे हैं, लेकिन मंत्री कुमार शैलेंद्र का वादा है कि 30 नवंबर तक भारी वाहन भी इस पुल पर रफ्तार भरेंगे।

मुख्य बातें

विक्रमशीला सेतु का एक हिस्सा 3 मई 2026 की रात टूट गया था, जिससे आवागमन बाधित हुआ।
मरम्मत कार्य 16 मई को शुरू होकर 21 दिनों में पूरा किया गया।
फिलहाल पुल पर 10 टन तक के हल्के वाहनों को ही अनुमति है।
30 नवंबर 2026 तक भारी वाहनों के लिए पुल खोलने का लक्ष्य: मंत्री कुमार शैलेंद्र ।
अभियंता वीडियोग्राफी सहित पुल का विस्तृत निरीक्षण करेंगे; खामी मिली तो तत्काल सुधार होगा।

बिहार सरकार के मंत्री कुमार शैलेंद्र ने 8 जून 2026 को पत्रकारों को जानकारी दी कि विक्रमशीला सेतु की मरम्मत का कार्य पूरा हो गया है और अब हल्के वाहनों का आवागमन पुनः सुचारु हो गया है। 3 मई 2026 की रात पुल का एक हिस्सा टूट जाने के बाद से स्थानीय लोगों को आवागमन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

मुख्य घटनाक्रम

3 मई की रात विक्रमशीला सेतु का एक हिस्सा टूटने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तत्काल अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरम्मत कार्य में कोई भी अड़चन न आने दी जाए और काम यथाशीघ्र पूरा किया जाए। 16 मई को मरम्मत कार्य औपचारिक रूप से शुरू हुआ और 21 दिनों के भीतर इसे पूरा कर लिया गया।

श्रमिकों को सम्मान

मंत्री शैलेंद्र ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले श्रमिकों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी कॉरिडोर और अयोध्या राम मंदिर निर्माण में जुटे श्रमिकों को सम्मानित किया था, उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए उन्होंने भी इस पुल की मरम्मत में लगे कामगारों और अधिकारियों को सम्मान दिया, ताकि उनका उत्साहवर्धन हो।

पुल की मौजूदा स्थिति

फिलहाल विक्रमशीला सेतु पर केवल हल्के वाहन ही चल रहे हैं और अधिकतम 10 टन भार वाले वाहनों को अनुमति दी गई है। मंत्री ने बताया कि अभियंता अब पुल का विस्तृत निरीक्षण करेंगे और वीडियोग्राफी के माध्यम से संरचना की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि कहीं कोई खामी मिली तो उसे तत्काल दूर किया जाएगा।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री शैलेंद्र ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जैसा वादा किया था — 7 जून तक पुल जनता को समर्पित करने का — वह बिना किसी रुकावट के पूरा किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई पुल को लेकर अफवाह फैलाने की कोशिश करेगा तो उसे चिन्हित किया जाएगा।

क्या होगा आगे

मंत्री ने स्पष्ट किया कि 30 नवंबर 2026 तक विक्रमशीला सेतु को भारी वाहनों के लिए भी खोल दिया जाएगा, बशर्ते सभी तकनीकी मानक पूरे हों। इंजीनियरों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण और वीडियोग्राफी रिपोर्ट के आधार पर यह अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह पुल भागलपुर क्षेत्र की जीवन-रेखा माना जाता है और भारी वाहनों की आवाजाही बहाल होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी राहत मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 3 मई को पुल का हिस्सा टूटा क्यों — संरचनात्मक कमज़ोरी, रखरखाव की अनदेखी, या भार-सीमा उल्लंघन? मरम्मत की गति की तारीफ उचित है, पर जब तक स्वतंत्र संरचनात्मक ऑडिट सार्वजनिक नहीं होता, 30 नवंबर की भारी वाहन समयसीमा महज राजनीतिक घोषणा बनी रह सकती है। भागलपुर जैसे व्यापारिक केंद्र के लिए यह पुल जीवनरेखा है — इसलिए पारदर्शी निरीक्षण रिपोर्ट जनता का हक है, सिर्फ सरकारी आश्वासन नहीं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रमशीला सेतु की मरम्मत कब पूरी हुई?
विक्रमशीला सेतु की मरम्मत जून 2026 के पहले सप्ताह में पूरी हुई। मरम्मत कार्य 16 मई को शुरू हुआ था और 21 दिनों के भीतर पूरा कर लिया गया।
विक्रमशीला सेतु पर भारी वाहन कब से चल सकेंगे?
मंत्री कुमार शैलेंद्र के अनुसार 30 नवंबर 2026 तक भारी वाहनों के लिए पुल खोलने का लक्ष्य है। इससे पहले अभियंता पुल का निरीक्षण और वीडियोग्राफी करेंगे और सभी तकनीकी मानक पूरे होने के बाद ही यह निर्णय लागू होगा।
विक्रमशीला सेतु का हिस्सा क्यों टूटा था?
3 मई 2026 की रात विक्रमशीला सेतु का एक हिस्सा टूट गया था। टूटने के कारणों की विस्तृत जानकारी आधिकारिक तौर पर अभी सार्वजनिक नहीं की गई है; अभियंता अब पुल का निरीक्षण कर संरचनात्मक स्थिति का आकलन करेंगे।
अभी विक्रमशीला सेतु पर कितने वज़न के वाहन चल सकते हैं?
फिलहाल विक्रमशीला सेतु पर अधिकतम 10 टन भार वाले हल्के वाहनों को ही अनुमति दी गई है। भारी वाहनों के लिए पुल 30 नवंबर 2026 तक खोले जाने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विक्रमशीला सेतु मरम्मत में क्या भूमिका निभाई?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुल टूटने की सूचना मिलते ही शीर्ष अधिकारियों को तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए और यह सुनिश्चित किया कि कार्य में कोई अड़चन न आए। मंत्री कुमार शैलेंद्र के अनुसार मुख्यमंत्री ने 7 जून तक पुल जनता को समर्पित करने का जो वादा किया था, वह समय पर पूरा किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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