बीआरएस ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन, तेलंगाना में 16,243 औसत डुप्लिकेट मतदाताओं की जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 10 जुलाई को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर मतदाता सूची में डुप्लिकेट और बहु-पंजीकृत मतदाताओं की पहचान एवं निष्कासन की माँग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने 'एक नागरिक–एक वोट' के संवैधानिक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान पारदर्शी, वैज्ञानिक और कानूनसम्मत तरीके से संचालित होना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
बीआरएस ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा प्रस्तावित स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)-2026 का समर्थन करते हुए कहा कि वह इस अभियान में आयोग को पूरा सहयोग देगी। पार्टी ने तेलंगाना के सभी जिलों में लगभग 35,000 बूथ लेवल एजेंट (BLA) तैनात किए जाने की जानकारी दी, जो संदिग्ध डुप्लिकेट और बहु-पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान में सहयोग करेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब SIR-2026 को लेकर देशभर में राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर बहस तेज हो गई है। गौरतलब है कि 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद से दोनों राज्यों में एक ही व्यक्ति के नाम दर्ज होने की आशंका लंबे समय से चर्चा में रही है।
डुप्लिकेट मतदाताओं का वर्गीकरण
बीआरएस ने अपने ज्ञापन में संदिग्ध डुप्लिकेट मतदाता पंजीकरण को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया है — एक ही विधानसभा क्षेत्र के भीतर, एक ही संसदीय क्षेत्र के भीतर, तेलंगाना के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के बीच, तथा तेलंगाना और पड़ोसी राज्यों के बीच। पार्टी ने दावा किया कि उसकी प्रारंभिक जांच में तेलंगाना के सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
पार्टी के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 16,243 संदिग्ध डुप्लिकेट मतदाता प्रविष्टियाँ पाई गई हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 53,695 तक पहुँची है। हालाँकि बीआरएस ने स्पष्ट किया कि ये केवल प्रारंभिक स्तर पर चिह्नित संदिग्ध मामले हैं और अंतिम पुष्टि चुनाव आयोग की कानूनी जांच के बाद ही होनी चाहिए।
अंतरराज्यीय जांच की माँग
बीआरएस ने विशेष रूप से अंतरराज्यीय डुप्लिकेट पंजीकरण पर ध्यान आकर्षित कराया। पार्टी ने कहा कि तेलंगाना की सीमाएं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से लगती हैं, इसलिए SIR-2026 के दौरान अंतरराज्यीय स्तर पर भी विशेष जांच की जानी चाहिए। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन के बाद दोनों राज्यों में एक ही व्यक्ति के नाम दर्ज होने की संभावना को देखते हुए ऐसे मामलों के सत्यापन की माँग की गई है।
तकनीकी समाधान का सुझाव
बीआरएस ने डुप्लिकेट पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग का सुझाव दिया, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधार-आधारित सत्यापन (जहाँ कानूनी रूप से अनुमति हो), फेशियल रिकग्निशन, GIS मैपिंग, डी-डुप्लिकेशन सॉफ्टवेयर और जमीनी स्तर पर सत्यापन शामिल हैं।
पार्टी ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17, 18 और 62 का हवाला देते हुए कहा कि एक व्यक्ति का एक से अधिक स्थानों पर मतदाता पंजीकरण कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
वास्तविक मतदाताओं की सुरक्षा पर जोर
बीआरएस ने यह भी स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। पार्टी ने निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करने के लिए चुनाव आयोग के साथ हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। आगामी दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और SIR-2026 की प्रगति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।