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बीआरएस ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन, तेलंगाना में 16,243 औसत डुप्लिकेट मतदाताओं की जांच की मांग

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बीआरएस ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन, तेलंगाना में 16,243 औसत डुप्लिकेट मतदाताओं की जांच की मांग

सारांश

बीआरएस ने चुनाव आयोग को सौंपे ज्ञापन में तेलंगाना के 119 विधानसभा क्षेत्रों में औसतन 16,243 और अधिकतम 53,695 संदिग्ध डुप्लिकेट मतदाताओं का दावा किया। पार्टी ने AI, आधार और फेशियल रिकग्निशन से सत्यापन और SIR-2026 में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

मुख्य बातें

बीआरएस प्रतिनिधिमंडल ने 10 जुलाई को मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर डुप्लिकेट मतदाता हटाने का ज्ञापन सौंपा।
पार्टी के दावे के अनुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 16,243 और कुछ में अधिकतम 53,695 संदिग्ध डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ मिली हैं।
तेलंगाना के सभी जिलों में 35,000 बूथ लेवल एजेंट (BLA) तैनात किए गए हैं।
डुप्लिकेट पहचान के लिए AI , आधार सत्यापन , फेशियल रिकग्निशन और GIS मैपिंग के उपयोग का सुझाव दिया गया।
बीआरएस ने SIR-2026 का समर्थन करते हुए आंध्र प्रदेश , कर्नाटक , महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के साथ अंतरराज्यीय सत्यापन की भी माँग की।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17, 18 और 62 के तहत बहु-पंजीकरण को कानूनन अवैध बताया गया।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 10 जुलाई को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर मतदाता सूची में डुप्लिकेट और बहु-पंजीकृत मतदाताओं की पहचान एवं निष्कासन की माँग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने 'एक नागरिक–एक वोट' के संवैधानिक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान पारदर्शी, वैज्ञानिक और कानूनसम्मत तरीके से संचालित होना चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

बीआरएस ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा प्रस्तावित स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)-2026 का समर्थन करते हुए कहा कि वह इस अभियान में आयोग को पूरा सहयोग देगी। पार्टी ने तेलंगाना के सभी जिलों में लगभग 35,000 बूथ लेवल एजेंट (BLA) तैनात किए जाने की जानकारी दी, जो संदिग्ध डुप्लिकेट और बहु-पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान में सहयोग करेंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब SIR-2026 को लेकर देशभर में राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर बहस तेज हो गई है। गौरतलब है कि 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद से दोनों राज्यों में एक ही व्यक्ति के नाम दर्ज होने की आशंका लंबे समय से चर्चा में रही है।

डुप्लिकेट मतदाताओं का वर्गीकरण

बीआरएस ने अपने ज्ञापन में संदिग्ध डुप्लिकेट मतदाता पंजीकरण को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया है — एक ही विधानसभा क्षेत्र के भीतर, एक ही संसदीय क्षेत्र के भीतर, तेलंगाना के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के बीच, तथा तेलंगाना और पड़ोसी राज्यों के बीच। पार्टी ने दावा किया कि उसकी प्रारंभिक जांच में तेलंगाना के सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

पार्टी के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 16,243 संदिग्ध डुप्लिकेट मतदाता प्रविष्टियाँ पाई गई हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 53,695 तक पहुँची है। हालाँकि बीआरएस ने स्पष्ट किया कि ये केवल प्रारंभिक स्तर पर चिह्नित संदिग्ध मामले हैं और अंतिम पुष्टि चुनाव आयोग की कानूनी जांच के बाद ही होनी चाहिए।

अंतरराज्यीय जांच की माँग

बीआरएस ने विशेष रूप से अंतरराज्यीय डुप्लिकेट पंजीकरण पर ध्यान आकर्षित कराया। पार्टी ने कहा कि तेलंगाना की सीमाएं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से लगती हैं, इसलिए SIR-2026 के दौरान अंतरराज्यीय स्तर पर भी विशेष जांच की जानी चाहिए। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन के बाद दोनों राज्यों में एक ही व्यक्ति के नाम दर्ज होने की संभावना को देखते हुए ऐसे मामलों के सत्यापन की माँग की गई है।

तकनीकी समाधान का सुझाव

बीआरएस ने डुप्लिकेट पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग का सुझाव दिया, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधार-आधारित सत्यापन (जहाँ कानूनी रूप से अनुमति हो), फेशियल रिकग्निशन, GIS मैपिंग, डी-डुप्लिकेशन सॉफ्टवेयर और जमीनी स्तर पर सत्यापन शामिल हैं।

पार्टी ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17, 18 और 62 का हवाला देते हुए कहा कि एक व्यक्ति का एक से अधिक स्थानों पर मतदाता पंजीकरण कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

वास्तविक मतदाताओं की सुरक्षा पर जोर

बीआरएस ने यह भी स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। पार्टी ने निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करने के लिए चुनाव आयोग के साथ हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। आगामी दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और SIR-2026 की प्रगति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु इसे राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करने और वास्तविक सुधार के बीच की रेखा पतली है। चुनाव आयोग के लिए चुनौती यह होगी कि वह सफाई अभियान को इतना सटीक रखे कि असली मतदाता न छूटें — 2023 के तेलंगाना चुनावों में मतदाता सूची विवाद की पृष्ठभूमि में यह और भी संवेदनशील हो जाता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीआरएस ने चुनाव आयोग से क्या माँग की है?
बीआरएस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को सौंपे ज्ञापन में तेलंगाना के सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में डुप्लिकेट और बहु-पंजीकृत मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सूची से हटाने की माँग की है। पार्टी ने SIR-2026 के तहत पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से यह अभियान चलाने का आग्रह किया है।
तेलंगाना में कितने डुप्लिकेट मतदाता होने का दावा किया गया है?
बीआरएस के अनुसार उसकी प्रारंभिक जांच में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 16,243 संदिग्ध डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ मिली हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 53,695 तक पहुँची है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि ये प्रारंभिक आँकड़े हैं और अंतिम पुष्टि चुनाव आयोग की कानूनी जांच के बाद ही होगी।
SIR-2026 क्या है और बीआरएस का इस पर क्या रुख है?
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)-2026 चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तावित मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान है। बीआरएस ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि वह 35,000 बूथ लेवल एजेंटों के माध्यम से आयोग को पूरा सहयोग देगी।
डुप्लिकेट मतदाताओं की पहचान के लिए कौन-सी तकनीकें सुझाई गई हैं?
बीआरएस ने AI, आधार-आधारित सत्यापन (जहाँ कानूनी रूप से अनुमति हो), फेशियल रिकग्निशन, GIS मैपिंग, डी-डुप्लिकेशन सॉफ्टवेयर और जमीनी स्तर पर सत्यापन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग का सुझाव दिया है। इन तकनीकों से अंतरराज्यीय डुप्लिकेट पंजीकरण की भी पहचान की जा सकेगी।
क्या इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है?
बीआरएस ने स्वयं इस चिंता को स्वीकार करते हुए जोर दिया है कि सत्यापन प्रक्रिया में किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से नहीं हटाया जाना चाहिए। पार्टी ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17, 18 और 62 का हवाला देते हुए बहु-पंजीकरण को अवैध बताया, लेकिन वैध मतदाताओं के अधिकार की रक्षा पर भी बल दिया।
राष्ट्र प्रेस
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