4 अगस्त 2026
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संभल में बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा पर प्रशासन का नोटिस, अमन त्यागी बोले — 'संविधान देता है वस्त्र चुनने का अधिकार'

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संभल में बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा पर प्रशासन का नोटिस, अमन त्यागी बोले — 'संविधान देता है वस्त्र चुनने का अधिकार'

सारांश

संभल प्रशासन ने बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने पर अमन त्यागी और तमन्ना मलिक को नोटिस जारी किया। त्यागी ने संविधान का हवाला देते हुए महिला के वस्त्र चुनने के अधिकार की दलील दी, जबकि प्रशासन ने इसे एहतियाती कदम बताया। मामला संवैधानिक अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच की बहस का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

संभल प्रशासन ने 4 अगस्त 2026 को अमन त्यागी और तमन्ना मलिक को बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने पर बीएनएसएस धारा 126, 130, 131 के तहत नोटिस जारी किया।
अमन त्यागी ने एसडीएम कार्यालय पहुँचकर नोटिस का जवाब दाखिल किया और संविधान में वस्त्र चुनने के अधिकार की दलील दी।
एसडीएम विकास चंद्र ने स्पष्ट किया कि नोटिस अधिकार हनन के लिए नहीं, बल्कि पिछले वर्ष की शांति व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए एहतियाती कदम था।
अमन त्यागी ने घोषणा की कि वे तय कार्यक्रम के अनुसार हरिद्वार जाएंगे और कांवड़ लेकर लौटेंगे।
गाजियाबाद की अनीता भानु भी बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा कर रही हैं; अमन त्यागी उनके समर्थन में भी जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के संभल में 4 अगस्त 2026 को कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के बाद विवाद गहरा गया है। तमन्ना मलिक के पति अमन त्यागी ने एसडीएम कार्यालय पहुँचकर नोटिस का जवाब दाखिल किया और स्पष्ट किया कि संविधान किसी भी महिला को अपनी पसंद के वस्त्र पहनने का अधिकार देता है। वहीं, एसडीएम विकास चंद्र ने कहा कि यह कार्रवाई केवल एहतियाती कदम के रूप में की गई है, न कि किसी के अधिकारों के हनन के उद्देश्य से।

नोटिस में क्या कहा गया

अमन त्यागी के अनुसार, प्रशासन की ओर से उन्हें एक नोटिस जारी किया गया जिसमें कहा गया कि यदि वे हरिद्वार कांवड़ यात्रा पर जाते हैं तो उनकी पत्नी तमन्ना मलिक बुर्का पहनकर यात्रा नहीं कर सकतीं। इसी नोटिस के जवाब में अमन त्यागी एसडीएम कार्यालय पहुँचे और अपना पक्ष दर्ज कराया।

एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि थाना असमोली से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 135 के तहत रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। रिपोर्ट में उल्लेख था कि पिछले वर्ष अमन त्यागी और तमन्ना मलिक द्वारा प्रस्तावित कांवड़ यात्रा के दौरान शांति व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई थी। चूँकि दोनों अलग-अलग समुदायों से संबंधित हैं, इसलिए न्यायालय की रिपोर्ट के आधार पर बीएनएसएस की धारा 126, 130 और 131 के तहत नोटिस जारी किया गया।

अमन त्यागी का संवैधानिक तर्क

अमन त्यागी ने कहा कि देश संविधान के अनुसार चलता है और संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा कि किसी महिला को उसकी पसंद के वस्त्र पहनने से रोका जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह नहीं कह रहे कि तमन्ना मलिक अनिवार्य रूप से बुर्का पहनकर ही यात्रा करेंगी, बल्कि उनकी माँग केवल इतनी है कि महिला को अपनी पसंद का वस्त्र पहनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

त्यागी ने यह भी कहा कि पिछली बार भी तमन्ना मलिक कांवड़ यात्रा पर गई थीं और उस दौरान लाखों हिंदुओं ने उनका स्वागत किया था। उनके अनुसार, आज भी बड़ी संख्या में लोग चाहते हैं कि तमन्ना कांवड़ लेकर आएं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन ने इस बार नोटिस क्यों जारी किया।

समानता का सवाल और राजनीतिक संदर्भ

अमन त्यागी ने आरोप लगाया कि देशभर में कई ऐसे मामले होते हैं जहाँ हिंदुओं की भावनाएँ आहत होती हैं, फिर भी संबंधित लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हिंदुओं के वोटों से सांसद बने हैं और संसद भवन के बाहर भगवा वस्त्र पहनकर उसका अपमान करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।

यह ऐसे समय में आया है जब गाजियाबाद की अनीता भानु भी बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा कर रही हैं। अमन त्यागी ने कहा कि वे अनीता भानु के समर्थन में भी जा रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष

एसडीएम विकास चंद्र ने स्पष्ट किया कि नोटिस का उद्देश्य केवल एहतियाती कार्रवाई करना था। इसके तहत दोनों को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने और आवश्यक मुचलका दाखिल करने के लिए कहा गया था। अमन त्यागी न्यायालय में उपस्थित हुए और जवाब दाखिल कर दिया है।

प्रशासन का कहना है कि इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। अमन त्यागी ने घोषणा की है कि वे तय कार्यक्रम के अनुसार हरिद्वार जाएंगे और कांवड़ लेकर लौटेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या यह चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा है। अमन त्यागी का पप्पू यादव वाला तर्क राजनीतिक रंग ज़रूर देता है, लेकिन कानून की एकसमान प्रयोज्यता पर उठाया गया मूल प्रश्न वैध है और इसका जवाब प्रशासन को देना होगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संभल में बुर्का-कांवड़ यात्रा विवाद क्या है?
संभल प्रशासन ने अमन त्यागी और उनकी पत्नी तमन्ना मलिक को नोटिस जारी किया जिसमें कहा गया कि हरिद्वार कांवड़ यात्रा के दौरान तमन्ना बुर्का पहनकर यात्रा नहीं कर सकतीं। अमन त्यागी ने इसे संविधान द्वारा प्रदत्त वस्त्र चुनने के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए एसडीएम कार्यालय में जवाब दाखिल किया।
प्रशासन ने यह नोटिस क्यों जारी किया?
एसडीएम विकास चंद्र के अनुसार, थाना असमोली से बीएनएसएस की धारा 126 और 135 के तहत रिपोर्ट मिली थी कि पिछले वर्ष इस जोड़े की प्रस्तावित यात्रा के दौरान शांति व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इसी आधार पर न्यायालय की रिपोर्ट के आधार पर एहतियाती नोटिस जारी किया गया।
अमन त्यागी का संवैधानिक तर्क क्या है?
अमन त्यागी का कहना है कि संविधान किसी भी महिला को उसकी पसंद का वस्त्र पहनने का अधिकार देता है और पहनावे के आधार पर रोकना संविधान की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह नहीं कह रहे कि तमन्ना अनिवार्य रूप से बुर्का पहनेंगी, बल्कि उनकी माँग यह है कि यह विकल्प महिला का व्यक्तिगत अधिकार होना चाहिए।
क्या अमन त्यागी अब भी हरिद्वार कांवड़ यात्रा पर जाएंगे?
हाँ, अमन त्यागी ने घोषणा की है कि वे तय कार्यक्रम के अनुसार हरिद्वार जाएंगे और कांवड़ लेकर लौटेंगे। वे गाजियाबाद की अनीता भानु के समर्थन में भी जा रहे हैं, जो बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा कर रही हैं।
इस मामले में बीएनएसएस की कौन-सी धाराएँ लागू की गई हैं?
प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126, 130 और 131 के तहत नोटिस जारी किया है। ये धाराएँ संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति में एहतियाती कार्रवाई और मुचलका दाखिल कराने से संबंधित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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