कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त: स्टांप पेपर किल्लत पर पश्चिम बंगाल सरकार को 20 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन वेकेशन बेंच ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य में ₹10 और ₹20 के स्टांप पेपर की अचानक अनुपलब्धता से जुड़े मामले में 20 नवंबर 2026 तक हलफनामा दाखिल करे। याचिकाकर्ता सुरजीत मंडल ने आरोप लगाया है कि बाज़ार में इन मूल्यवर्ग के स्टांप पेपर की आपूर्ति अचानक बाधित हो गई है, जिससे आम नागरिकों को भारी असुविधा हो रही है।
सुनवाई का ब्यौरा
इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे और न्यायमूर्ति मो. शब्बर रशीदी की खंडपीठ के समक्ष दोपहर सुनवाई हुई। बेंच ने राज्य सरकार को 20 नवंबर तक हलफनामा जमा करने का आदेश दिया। साथ ही, याचिकाकर्ता को भी 27 नवंबर से पहले अपना हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
याचिका में क्या आरोप हैं
याचिकाकर्ता सुरजीत मंडल ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि पुलिस का उपयोग करके अधिकृत विक्रेताओं से 25,000 से अधिक स्टांप पेपर जबरन लिए गए हैं। याचिका के अनुसार, इन स्टांप पेपरों को विभिन्न पुलिस थानों में भेजा जा रहा था, जिसके कारण बाज़ार में इनकी किल्लत पैदा हो गई।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट — जिसे 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' कहा जाता है — के लिए राज्य प्रशासन और पुलिस को प्रभावित किया गया। कथित तौर पर सर्वोच्च न्यायालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए इन स्टांप पेपरों का उपयोग होना था।
पुलिस की कथित भूमिका पर सवाल
याचिका के अनुसार, रितब्रत बनर्जी के गुट में सदस्यों की संख्या कम होने के कारण, पुलिस घर-घर जाकर तृणमूल कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं से स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवा रही है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि स्टांप पेपर के संग्रह और उपयोग के लिए विशेष कानूनी प्रावधान और पंजीकरण नियम मौजूद हैं, और कथित तौर पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा था।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
मंगलवार की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया और अदालत के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की इच्छा जताई। इसी के मद्देनज़र अदालत ने 20 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि पुलिस को इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने का आदेश दिया जाए और पहले से एकत्र किए गए स्टांप पेपर को जब्त करने का निर्देश जारी किया जाए।
आगे क्या होगा
यह मामला अब 11 दिसंबर 2026 को अगली सुनवाई के साथ एक निर्णायक मोड़ पर पहुँचेगा, जब राज्य सरकार और याचिकाकर्ता दोनों के हलफनामे अदालत के समक्ष होंगे। गौरतलब है कि यह मामला उस वक्त सामने आया है जब TMC का आंतरिक विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है, जिससे इस मामले का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।