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PM मोदी: भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधा, विकसित देशों में 6 गुना अधिक

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PM मोदी: भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधा, विकसित देशों में 6 गुना अधिक

सारांश

पीएम मोदी ने साफ कहा — कार्बन उत्सर्जन का दोष विकासशील देशों पर थोपना ऐतिहासिक रूप से गलत है। भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधा है जबकि विकसित देशों में यह 6 गुना अधिक। साथ ही सोलर क्षमता 2 से 160 गिगावाट तक पहुँचाने और 50 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का जिक्र किया।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ' द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स ' सम्मेलन का उद्घाटन किया।
भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम ; विकसित देशों में यह भारत से 6 गुना अधिक।
भारत G-20 का इकलौता देश जिसने पेरिस COP-21 प्रतिबद्धताएँ समय से पहले पूरी कीं।
सोलर क्षमता 2 गिगावाट (12 साल पहले) से बढ़कर 160 गिगावाट से अधिक हो गई।
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 50 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए गए; प्रत्येक परिवार को ₹80,000 की सहायता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और वैश्विक जलवायु विमर्श में विकासशील देशों के साथ हो रहे अन्याय पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन आज भी वैश्विक औसत के आधे से भी कम है, और कार्बन एमिशन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर थोपी जाती रही है।

मुख्य वक्तव्य और आरोपों पर पलटवार

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में कहा, 'हम सब जानते हैं कि अक्सर कार्बन एमिशन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाली जाती रही है। जबकि ऐतिहासिक सच्चाई ये है कि आज भी प्रति व्यक्ति कार्बन एमिशन में भारत का योगदान वैश्विक औसत के आधे से भी कम है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकसित देशों में भारत की तुलना में 6 गुना अधिक प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन हो रहा है।

मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे इस तथ्य को वैश्विक मंचों पर मजबूती के साथ उठाएँ। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में विकासशील देशों पर उत्सर्जन कटौती का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

भारत की वैश्विक जलवायु पहलें

प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत द्वारा शुरू की गई कई अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, CDRI, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, मिशन लाइफ जैसे सभी प्लेटफॉर्म पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति भारत के समर्पण का आईना बन रहे हैं।'

गौरतलब है कि भारत G-20 में इकलौता ऐसा देश है जिसने पेरिस COP-21 समिट में किए गए जलवायु प्रतिबद्धताओं को निर्धारित समय से पहले पूरा किया है — एक तथ्य जिसे मोदी ने गर्व के साथ दोहराया।

सौर ऊर्जा में भारत की छलांग

बीते 12 वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति के आँकड़े साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 12 साल पहले देश की सोलर एनर्जी क्षमता मात्र 2 गिगावाट थी, जो आज बढ़कर 160 गिगावाट से अधिक हो चुकी है। यह वृद्धि 80 गुना से भी अधिक है और वैश्विक सौर विस्तार में भारत को एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करती है।

पीएम सूर्यघर योजना: 50 लाख घर सोलर हब बने

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का जिक्र करते हुए मोदी ने बताया कि इस मिशन के तहत अब तक 50 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं — जो कई देशों के कुल घरों की संख्या से भी अधिक है। सरकार ने इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी परिवार को लगभग ₹80,000 की अतिरिक्त सहायता प्रदान की है।

यह पहल घरों को केवल बिजली उपभोक्ता से सोलर पावर जेनरेशन सेंटर में रूपांतरित करने की व्यापक नीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह गति बनी रही तो भारत 2030 से पहले अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

आगे की दिशा

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री के संबोधन को आगामी वैश्विक जलवायु वार्ताओं से पहले भारत के आधिकारिक रुख की पुनः पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। भारत स्पष्ट कर रहा है कि वह पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदार है, लेकिन 'ऐतिहासिक जिम्मेदारी' के सिद्धांत पर आधारित जवाबदेही की माँग को लेकर वह समझौता नहीं करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे पश्चिमी देश अक्सर वार्ता में कमज़ोर करने की कोशिश करते हैं। सोलर क्षमता में 80 गुना वृद्धि प्रभावशाली है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि कोयले पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है और प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम होने का एक बड़ा कारण देश की विशाल जनसंख्या भी है — न केवल नीतिगत श्रेय। 50 लाख रूफटॉप सोलर घर एक ठोस उपलब्धि है, परंतु भारत के कुल 30 करोड़ से अधिक परिवारों के मुकाबले यह अभी शुरुआत ही है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक स्तर पर कहाँ खड़ा है?
PM मोदी के अनुसार, भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। तुलना में, विकसित देशों में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन भारत से 6 गुना अधिक है।
भारत ने पेरिस COP-21 प्रतिबद्धताएँ कब और कैसे पूरी कीं?
भारत ने पेरिस COP-21 समिट में किए गए जलवायु संबंधी वादों को निर्धारित समयसीमा से पहले पूरा किया। PM मोदी ने बताया कि G-20 देशों में भारत इकलौता ऐसा देश है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है।
भारत की सोलर एनर्जी क्षमता अब कितनी है?
भारत की सोलर एनर्जी क्षमता 12 साल पहले मात्र 2 गिगावाट थी, जो अब 160 गिगावाट से अधिक हो गई है — यानी 80 गुना से अधिक की वृद्धि। यह देश को वैश्विक सोलर महाशक्तियों में शामिल करती है।
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना क्या है और इसका लाभ किसे मिला?
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों को रूफटॉप सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन केंद्र में बदलने का लक्ष्य है। अब तक 50 लाख से अधिक घरों में पैनल लग चुके हैं और प्रत्येक परिवार को लगभग ₹80,000 की अतिरिक्त सरकारी सहायता दी गई है।
भारत ने जलवायु क्षेत्र में कौन-कौन सी अंतरराष्ट्रीय पहलें शुरू की हैं?
भारत ने वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड; इंटरनेशनल सोलर अलायंस; CDRI; ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस; इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस और मिशन लाइफ जैसी प्रमुख वैश्विक पहलें शुरू की हैं। ये सभी पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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