सीबीआई ने बैरकपुर सोना व्यापारी हत्याकांड 2007 के भगोड़े आरोपी को 19 साल बाद गोरखपुर से गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को बैरकपुर के सोना व्यापारी सुकांत घोष हत्याकांड के घोषित भगोड़े आरोपी शिबू कुमार सिंह को 19 साल की लंबी फरारी के बाद गोरखपुर से गिरफ्तार किया। आरोपी फर्जी पहचान अपनाकर वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था।
गिरफ्तारी का विवरण
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, शिबू कुमार सिंह को गोरखपुर के साउथ गांधी आश्रम स्थित रायगंज रोड पर उसके ठिकाने से पकड़ा गया। वह वहाँ अखिलेश कुमार शाही के फर्जी नाम से रह रहा था। सीबीआई ने बताया कि इस गिरफ्तारी में ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल इनपुट दोनों का उपयोग किया गया। ट्रांजिट वारंट प्राप्त होने के बाद आरोपी को बुधवार को सक्षम न्यायालय में पेश करने के लिए कोलकाता ले जाया जाएगा।
मूल हत्याकांड और जांच की पृष्ठभूमि
6 जुलाई 2007 को पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में सोना व्यापारी सुकांत घोष की निर्मम हत्या कर दी गई थी। उन पर चाकू से 18 वार किए गए थे। प्रारंभिक जांच में संदेह जताया गया कि इस वारदात में कुछ गुंडों का हाथ था, जो कथित तौर पर एक वामपंथी विधायक और उनके भाइयों के संरक्षण में काम करते थे।
जांच में सामने आया कि व्यापारी की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने विधायक से जुड़े स्थानीय माफिया को सुरक्षा के नाम पर जबरन वसूली की रकम देने से इनकार कर दिया था। यह मामला संगठित अपराध और राजनीतिक संरक्षण के गठजोड़ की एक गंभीर मिसाल के रूप में उभरा।
कलकत्ता हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
27 अगस्त 2009 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। न्यायमूर्ति समाप्ति चटर्जी ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह इस हत्याकांड की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करे, क्योंकि मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी। हाईकोर्ट ने यह भी तय किया कि एसआईटी का नेतृत्व संयुक्त निदेशक रैंक के सीबीआई अधिकारी करेंगे, जो न्यायालय की निगरानी में नियमित अपडेट देने के लिए जवाबदेह होंगे।
चार्जशीट और भगोड़ा घोषित होने की प्रक्रिया
सीबीआई ने 31 दिसंबर 2010 को शिबू कुमार सिंह और तीन अन्य आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की, और 14 नवंबर 2011 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी पेश की। लंबे समय तक फरार रहने के कारण 15 सितंबर 2016 को शिबू कुमार सिंह को आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। इस गिरफ्तारी के साथ एक दशक से अधिक समय से चली आ रही उसकी फरारी का अंत हुआ है।
आगे क्या होगा
आरोपी को कोलकाता की सक्षम अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह गिरफ्तारी सीबीआई की उन मामलों में निरंतर कार्रवाई का हिस्सा है जहाँ आरोपी वर्षों से न्याय से बचते रहे हैं। मामले में तीन अन्य आरोपियों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।