सीबीआई ने नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के ट्रस्टी व फैकल्टी पर ₹10 लाख रिश्वत मामले में केस दर्ज किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुजरात के जूनागढ़ स्थित नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के ट्रस्टी प्रतीक मोरी और फैकल्टी सदस्य डॉ. अभय नलावडे के विरुद्ध ₹10 लाख की कथित रिश्वत पेशकश के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि दोनों ने नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) की हियरिंग कमेटी की एक सदस्य को 13 संदिग्ध 'भूत शिक्षकों' को क्लीन चिट दिलाने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की।
मामले की पृष्ठभूमि
एनसीआईएसएम ने लखनऊ के प्रबुद्ध आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रूपाली आर. महादिक को हियरिंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया था। उनका काम था — नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के 13 ऐसे शिक्षकों की जाँच करना, जिन पर संदेह था कि वे केवल कागज़ों पर नामांकित हैं और वास्तव में कॉलेज में उपस्थित नहीं रहते। यह जाँच भारतीय चिकित्सा पद्धति की नियामकीय शुचिता से सीधे जुड़ी थी।
रिश्वत की पेशकश का घटनाक्रम
एफआईआर के अनुसार, 18 अगस्त को डॉ. अभय नलावडे ने कथित तौर पर डॉ. महादिक को व्हाट्सएप कॉल किया और उन 13 शिक्षकों के पक्ष में सकारात्मक रिपोर्ट देने के बदले रिश्वत की पेशकश की। इसके बाद डॉ. महादिक ने एनसीआईएसएम के 'मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एमएआरबीआईएसएम)' के अध्यक्ष डॉ. मुकुल पटेल को इस बात की जानकारी दी।
एफआईआर के मुताबिक, डॉ. पटेल ने डॉ. महादिक को सलाह दी कि वे उस व्यक्ति के संपर्क में बनी रहें ताकि ठोस साक्ष्य के साथ उसे पकड़ा जा सके। 20 अगस्त को ट्रस्टी प्रतीक मोरी ने कथित तौर पर डॉ. महादिक से सीधे बात की और सभी 13 शिक्षकों के नाम साफ करने वाली पॉजिटिव रिपोर्ट के बदले ₹10 लाख देने का वादा किया।
शिकायतकर्ता की भूमिका और सीबीआई की कार्रवाई
रिश्वत लेने से इनकार करते हुए डॉ. महादिक ने 21 अगस्त को सीबीआई को हाथ से लिखी शिकायत सौंपी और मोरी तथा नलावडे के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की। एफआईआर में उल्लेख है कि गुप्त जाँच में प्रारंभिक रूप से पुष्टि हुई कि दोनों आरोपियों ने ₹10 लाख की रिश्वत का प्रस्ताव दिया था।
इसके बाद 22 अगस्त को मोरी ने कथित तौर पर नई दिल्ली में ₹10 लाख की रिश्वत देने का वादा दोहराया। सीबीआई ने कथित आपराधिक साजिश और सरकारी कर्मचारी को रिश्वत देने के प्रयास के आरोपों में यह केस दर्ज किया है।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय चिकित्सा शिक्षा में 'भूत शिक्षकों' की समस्या एक गंभीर नियामकीय चुनौती बनी हुई है। गौरतलब है कि एनसीआईएसएम की स्थापना ही इस तरह की गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए की गई थी। आलोचकों का कहना है कि नियामकीय समिति के सदस्यों को ही रिश्वत देने की कोशिश इस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
आगे क्या होगा
सीबीआई की जाँच अब आगे बढ़ेगी और यह देखा जाएगा कि नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के वे 13 संदिग्ध शिक्षक वास्तव में कार्यरत थे या नहीं। यदि जाँच में 'भूत शिक्षकों' की पुष्टि होती है, तो कॉलेज की मान्यता पर भी संकट आ सकता है। इस मामले का नतीजा आयुर्वेदिक शिक्षा के नियामकीय ढाँचे को और सख्त करने की दिशा में एक मिसाल बन सकता है।