चाईबासा में ₹10 लाख इनामी माओवादी जोनल कमांडर सालुका कायम सहित तीन ने किया आत्मसमर्पण
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के ₹10 लाख के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ डांगिल ने 7 अगस्त 2026 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उनके साथ दो महिला माओवादी कैडरों ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। पुलिस मुख्यालय ने तीनों के आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि की है।
आत्मसमर्पण करने वाले कौन हैं
आत्मसमर्पण करने वाली दोनों महिला कैडरों की पहचान कोदो मुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी और पिंकी के रूप में हुई है। पद्मनी पर ₹1 लाख का इनाम था और वह टोंटो थाना क्षेत्र के रेंगड़ा टोला, बंगलासाई की निवासी है। पिंकी गोइलकेरा थाना क्षेत्र के इचागोड़ा गाँव की रहने वाली है।
जोनल कमांडर सालुका कायम सोनुवा थाना क्षेत्र के कुदाबुरू कायमसाई गाँव का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड में उसके कई उपनाम दर्ज हैं — सालुका, डांगिल, मारू और भुवनेश्वर। वह संगठन की साउथ जोन सेंट्रल कमेटी से जुड़ा था और कोल्हान क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के प्रमुख चेहरों में गिना जाता था।
सुरक्षा बलों के अभियान का दबाव
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कोल्हान के घने जंगलों में माओवादी गतिविधियों को संचालित रखने में सालुका की अहम भूमिका थी। वह लंबे समय से पुलिस की वांछित सूची में था। यह आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ है जब पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त टीमें माओवादी ठिकानों के विरुद्ध कोल्हान के जंगलों में लगातार अभियान चला रही हैं।
पुलिस के अनुसार, निरंतर अभियानों के कारण माओवादी संगठन पर दबाव बढ़ता जा रहा है — ठिकानों को सुरक्षित रखना और कैडरों की गतिविधियाँ जारी रखना संगठन के लिए कठिन होता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने संगठन के विरुद्ध कई सफल कार्रवाइयाँ की हैं।
सरकार की पुनर्वास नीति की भूमिका
केवल बल-प्रयोग नहीं, बल्कि सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति ने भी इस कदम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नीति के तहत हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले माओवादियों को पुनर्वास और निर्धारित सरकारी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। तीनों आत्मसमर्पणकर्ता इस नीति के अंतर्गत लाभ पाने के पात्र होंगे।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह आत्मसमर्पण कोल्हान क्षेत्र में माओवादी संगठन की घटती पकड़ का संकेत माना जा रहा है। सुरक्षा बल अभियान जारी रखेंगे और विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ कमांडर का मुख्यधारा में लौटना संगठन के शेष सदस्यों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाल सकता है। पुनर्वास प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों को सामान्य जीवन में एकीकृत किया जाएगा।