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झारखंड: ₹15 लाख इनामी जोनल कमांडर सहित 20+ नक्सली 28 जुलाई को करेंगे आत्मसमर्पण

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झारखंड: ₹15 लाख इनामी जोनल कमांडर सहित 20+ नक्सली 28 जुलाई को करेंगे आत्मसमर्पण

सारांश

झारखंड में नक्सल-विरोधी अभियान को बड़ी कामयाबी मिलने वाली है — ₹15 लाख इनामी जोनल कमांडर सहित 20 से अधिक माओवादी 28 जुलाई को रांची में आत्मसमर्पण करेंगे। यह घटनाक्रम बताता है कि लगातार सुरक्षा दबाव और पुनर्वास नीति मिलकर माओवादी संगठन की नींव हिला रहे हैं।

मुख्य बातें

भाकपा (माओवादी) से जुड़े 20 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले चुके हैं।
₹15 लाख इनामी जोनल कमांडर सहित एक रीजनल कमांडर और एक सब-जोनल कमांडर भी शामिल हैं।
औपचारिक आत्मसमर्पण 28 जुलाई 2026 को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में संभावित है।
आत्मसमर्पणकर्ता हथियार और गोला-बारूद भी झारखंड पुलिस को सौंपेंगे।
सूत्रों के अनुसार सभी नक्सली सुरक्षित स्थान पर पहुँच चुके हैं; आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

झारखंड में नक्सल-विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े 20 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले चुके हैं और 28 जुलाई 2026 को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में इनका औपचारिक आत्मसमर्पण कराया जा सकता है। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कौन-कौन करेगा आत्मसमर्पण

सूत्रों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में ₹15 लाख का इनामी एक जोनल कमांडर शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा एक रीजनल कमांडर और एक सब-जोनल कमांडर स्तर के माओवादी भी इस समूह में हैं। ₹5 लाख से ₹10 लाख तक के इनामी कई अन्य सक्रिय नक्सली भी मुख्यधारा में लौटने की तैयारी में हैं।

आत्मसमर्पण की प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार, सभी नक्सली सुरक्षित स्थान पर पहुँच चुके हैं और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं। 28 जुलाई को होने वाले कार्यक्रम में ये नक्सली अपने हथियार और गोला-बारूद भी झारखंड पुलिस को सौंपेंगे। प्रत्येक आत्मसमर्पणकर्ता की पहचान और संगठन में उनकी भूमिका से संबंधित विवरण औपचारिक समारोह के दौरान सार्वजनिक किया जाएगा।

माओवादी संगठन पर बढ़ता दबाव

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और अन्य एजेंसियों के संयुक्त अभियानों ने माओवादी ढाँचे को लगातार कमज़ोर किया है। हाल के महीनों में शीर्ष माओवादी नेताओं के मारे जाने और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों से संगठन की कमर टूटी है। विश्लेषकों का मानना है कि इसी दबाव के चलते बड़ी संख्या में सक्रिय नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं।

पुनर्वास नीति की भूमिका

राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति भी इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रही है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में इस नीति के तहत कई इनामी नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यदि 28 जुलाई का यह आत्मसमर्पण संपन्न होता है, तो यह झारखंड में नक्सल-विरोधी अभियान की अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक होगी।

आगे क्या होगा

आधिकारिक पुष्टि के बाद आत्मसमर्पणकर्ताओं को पुनर्वास कार्यक्रम के तहत शामिल किया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियाँ इनसे मिलने वाली खुफिया जानकारी का उपयोग शेष माओवादी नेटवर्क के विरुद्ध अभियान को और तेज़ करने में करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि माओवादी संगठन के भीतर गहराते मनोबल-संकट का संकेत है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार की पुनर्वास नीति इन आत्मसमर्पणकर्ताओं को दीर्घकालिक रूप से मुख्यधारा में टिकाए रख सकती है — क्योंकि अतीत में कई पुनर्वासित नक्सली दोबारा संगठन में लौटे हैं। खुफिया जानकारी का उपयोग शेष नेटवर्क को ध्वस्त करने में कितनी तेज़ी से होता है, यह इस सफलता की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में 28 जुलाई को कौन से नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे?
सूत्रों के अनुसार ₹15 लाख इनामी एक जोनल कमांडर, एक रीजनल कमांडर, एक सब-जोनल कमांडर और ₹5 लाख से ₹10 लाख तक के इनामी कई अन्य सक्रिय नक्सलियों सहित 20 से अधिक भाकपा (माओवादी) सदस्य 28 जुलाई 2026 को रांची में आत्मसमर्पण कर सकते हैं। आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
झारखंड में नक्सली आत्मसमर्पण क्यों कर रहे हैं?
सुरक्षा बलों के तेज़ अभियानों, शीर्ष माओवादी नेताओं के मारे जाने और लगातार गिरफ्तारियों से संगठन पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने नक्सलियों को हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का विकल्प दिया है।
आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों का क्या होगा?
आत्मसमर्पण के बाद इन्हें झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति के तहत शामिल किया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियाँ इनसे मिली खुफिया जानकारी का उपयोग शेष माओवादी नेटवर्क के विरुद्ध अभियान में करेंगी।
28 जुलाई का आत्मसमर्पण कार्यक्रम कहाँ होगा?
यह कार्यक्रम रांची स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित होने की संभावना है, जहाँ नक्सली अपने हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपेंगे।
क्या इस आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है?
अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों का इन नक्सलियों से संपर्क हो चुका है और सभी सुरक्षित स्थान पर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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