ऑपरेशन नवजीवन: झारखंड में ₹39 लाख इनामी 6 माओवादी कमांडरों समेत 16 नक्सलियों ने रांची में डाले हथियार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है — ऑपरेशन नवजीवन के तहत ₹39 लाख के संयुक्त इनाम वाले छह शीर्ष माओवादी कमांडरों सहित कुल 16 नक्सलियों ने 28 जुलाई को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया। इन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार सौंपे। यह झारखंड में हाल के वर्षों के सबसे बड़े सामूहिक आत्मसमर्पणों में से एक है।
कौन-कौन से कमांडर शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ा नाम ₹15 लाख के इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो का है, जिन पर अकेले 128 आपराधिक मामले दर्ज हैं। ₹10 लाख के इनामी जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा के खिलाफ 78 मामले लंबित हैं। इसके अलावा ₹5-5 लाख के इनामी सब-जोनल कमेटी सदस्य अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल और सुखलाल बिरंजिया उर्फ अकेला, तथा ₹2-2 लाख के इनामी एरिया कमेटी सदस्य सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम और रिसिव सोय भी इस समूह में शामिल हैं।
गौरतलब है कि देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा को ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का मुख्य अंगरक्षक माना जाता रहा है। शेष आत्मसमर्पणकर्ताओं में संतोष मांझी उर्फ जगबंधु, जयकांत मुंडा उर्फ गूंगा उर्फ बंगाली, राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा, एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत, सुमित्रा सुरीन, चंपा मंझियाइन उर्फ गुड़िया, सालमी मुंडा उर्फ पारूल, मुन्नी सुरीन उर्फ मुरीन सुरीन और सीता मुंडा शामिल हैं।
जब्त हथियार और गोला-बारूद
आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा बलों को 11 आधुनिक हथियार सौंपे गए, जिनमें 6 इंसास राइफल, 2 AK-47 राइफल, 1 HK-33 राइफल, 1 US कार्बाइन और 1 M-16 राइफल शामिल हैं। इसके साथ ही 38 मैगजीन और 1,562 जीवित कारतूस भी जमा किए गए।
दर्ज मामलों का ब्यौरा
झारखंड पुलिस के अनुसार, इन 16 नक्सलियों के विरुद्ध राज्य के विभिन्न जिलों में हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, लेवी वसूली, विस्फोट और अन्य माओवादी गतिविधियों से जुड़े कुल 425 आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह आँकड़ा इस बात का संकेत है कि ये कमांडर दशकों से सक्रिय रहे हैं।
पुनर्वास नीति और आगे की राह
झारखंड पुलिस का कहना है कि निरंतर नक्सल विरोधी अभियान, सुरक्षा बलों के दबाव और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के संयुक्त प्रभाव से बड़ी संख्या में उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी 16 नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता, कौशल विकास, रोज़गार के अवसर और अन्य सुविधाएँ दी जाएंगी। इस समारोह में डीजीपी तदाशा मिश्र, एडीजी मनोज कौशिक, आईजी साकेत सिंह, आईजी पंकज कंबोज, आईजी (अभियान) नरेंद्र सिंह और आईजी अनूप बिरथरे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह आत्मसमर्पण झारखंड को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है, हालाँकि मिसिर बेसरा जैसे शीर्ष नेता अभी भी फरार हैं।