29 जुलाई 2026
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झारखंड के 8 माओवादियों ने बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, ₹49 लाख के इनामी कैडर छोड़ेंगे हिंसा

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झारखंड के 8 माओवादियों ने बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, ₹49 लाख के इनामी कैडर छोड़ेंगे हिंसा

सारांश

झारखंड में सक्रिय ₹49 लाख के इनामी 8 माओवादी कैडरों ने बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया — जिनमें 5 महिलाएँ शामिल हैं। छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति और कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रेरित यह आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान की बढ़ती सफलता का संकेत है।

मुख्य बातें

8 माओवादी कैडरों ने 29 जुलाई को बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 5 महिलाएँ शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों पर कुल ₹49 लाख का इनाम घोषित था।
अश्विन उर्फ लच्छू , रंगा उर्फ सोहन और दोबा माड़वी उर्फ राहत पर प्रत्येक पर ₹8 लाख ; शेष पाँच महिलाओं पर प्रत्येक पर ₹5 लाख का इनाम था।
ये सभी प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े थे और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय थे।
आत्मसमर्पण करने वालों को छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, आवास और रोज़गार के अवसर दिए जाएँगे।

झारखंड में सक्रिय 8 माओवादी कैडरों ने 29 जुलाई को हिंसा का मार्ग त्यागकर बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इन कैडरों में पाँच महिलाएँ शामिल हैं और इन सभी पर कुल मिलाकर ₹49 लाख का इनाम घोषित था। झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के सहयोग से यह आत्मसमर्पण संपन्न हुआ।

आत्मसमर्पण का कारण

ये सभी कैडर लंबे समय से प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े थे और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय थे। छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, बीजापुर जिले में संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की सफलता तथा पूर्व माओवादी कैडरों के सफल पुनर्वास की खबरों से प्रेरित होकर इन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

इसके अतिरिक्त, सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव, संगठन की लगातार कमज़ोर होती स्थिति, हिंसक एवं जनविरोधी विचारधारा से मोहभंग तथा आदिवासी क्षेत्रों में तेज़ी से हो रहे विकास कार्यों ने भी इनके निर्णय में अहम भूमिका निभाई।

आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों का विवरण

30 वर्षीय अश्विन उर्फ लच्छू, रंगा उर्फ सोहन और दोबा माड़वी उर्फ राहत — इन तीनों पर प्रत्येक पर ₹8 लाख का इनाम था। 28 वर्षीय फगनी पोयम उर्फ रजनी, 25 वर्षीय सूरज मुन्नी चम्पिया उर्फ सुबनी, 27 वर्षीय हिड़मे कड़ती उर्फ रीता, 25 वर्षीय बुधरी कुंजाम उर्फ अनुषा और 20 वर्षीय सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी — इन पाँचों पर प्रत्येक पर ₹5 लाख का इनाम घोषित था।

पुनर्वास की व्यवस्था

छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत इन सभी कैडरों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और स्वरोज़गार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँगे। जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि ये स्थायी रूप से मुख्यधारा के जीवन से जुड़ सकें।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक साथ सुरक्षा अभियान और पुनर्वास कार्यक्रम चला रही हैं। गौरतलब है कि बीजापुर जिला पहले भी वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध अभियानों में अग्रणी रहा है और यह आत्मसमर्पण उस नीतिगत दृष्टिकोण की एक और कड़ी है। आने वाले समय में इन कैडरों का सफल पुनर्वास अन्य सक्रिय माओवादियों के लिए भी एक संदेश बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति की व्यावहारिक परीक्षा है — जो झारखंड तक अपनी पहुँच बना रही है। सवाल यह है कि क्या ये कार्यक्रम दीर्घकालिक पुनर्वास सुनिश्चित कर पाते हैं या केवल आत्मसमर्पण की संख्या बढ़ाने तक सीमित रहते हैं। महिला कैडरों की बड़ी संख्या इस बात का संकेत है कि माओवादी संगठन के भीतर असंतोष लैंगिक रेखाओं के पार फैल रहा है — जो नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण डेटा बिंदु है। पुनर्वास की गुणवत्ता और स्थायित्व ही तय करेगा कि यह कदम वास्तविक बदलाव की शुरुआत है या महज़ एक आँकड़ा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड के माओवादियों ने बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण क्यों किया?
इन कैडरों ने छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति, बीजापुर में कौशल विकास कार्यक्रमों की सफलता और पूर्व माओवादियों के सफल पुनर्वास से प्रेरित होकर आत्मसमर्पण किया। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और संगठन की कमज़ोर होती स्थिति ने भी इस निर्णय में भूमिका निभाई।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर कितना इनाम था?
आत्मसमर्पण करने वाले 8 कैडरों पर कुल ₹49 लाख का इनाम घोषित था। अश्विन उर्फ लच्छू, रंगा उर्फ सोहन और दोबा माड़वी उर्फ राहत पर प्रत्येक पर ₹8 लाख, जबकि शेष पाँच महिला कैडरों पर प्रत्येक पर ₹5 लाख का इनाम था।
आत्मसमर्पण के बाद इन माओवादियों को क्या सुविधाएँ मिलेंगी?
छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत इन्हें आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और स्वरोज़गार के अवसर प्रदान किए जाएँगे। जिला प्रशासन और पुलिस इनके मुख्यधारा में स्थायी पुनर्वास के लिए निरंतर मार्गदर्शन करेगी।
इस आत्मसमर्पण में झारखंड पुलिस और CRPF की क्या भूमिका थी?
झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के सहयोग से यह आत्मसमर्पण प्रक्रिया बीजापुर पुलिस के समक्ष संपन्न हुई। यह अंतर-राज्यीय सुरक्षा समन्वय का एक उदाहरण है जिसमें झारखंड में सक्रिय कैडरों ने छत्तीसगढ़ की पुलिस को आत्मसमर्पण किया।
क्या छत्तीसगढ़ की नक्सल पुनर्वास नीति अन्य राज्यों में भी प्रभावी हो रही है?
इस आत्मसमर्पण से संकेत मिलता है कि छत्तीसगढ़ की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति की सफलता की खबरें झारखंड तक पहुँच रही हैं और वहाँ के सक्रिय कैडरों को भी प्रेरित कर रही हैं। बीजापुर जिले में संचालित पुनर्वास कार्यक्रम अन्य राज्यों के माओवादियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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