बीजापुर में 25 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण: 93 हथियार और 14 करोड़ की बरामदगी

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बीजापुर में 25 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण: 93 हथियार और 14 करोड़ की बरामदगी

सारांश

बीजापुर में 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 12 महिलाएं शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण घटना के तहत 93 हथियार और 14 करोड़ रुपए की सामग्री बरामद की गई है। जानें इस अभियान के पीछे की कहानी और क्या हैं इसके परिणाम।

Key Takeaways

  • बीजापुर में 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया।
  • 93 घातक हथियार बरामद हुए।
  • 14.06 करोड़ रुपए की सामग्री की बरामदगी हुई।
  • सरकार पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान करेगी।
  • स्थानीय समुदाय के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है।

बीजापुर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान ने एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। 'पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन' योजना के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े 25 माओवादी कैडरों (12 महिलाओं समेत) ने अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

मंगलवार को बीजापुर में आयोजित एक विशेष समारोह में इन 25 कैडरों ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इन पर कुल 1.47 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। साथ ही सुरक्षा बलों ने इनके पास से 93 घातक हथियार, जैसे कि एलएमजी, एके-47, एसएलआर, आईएनएसएएस, .303 राइफल इत्यादि बरामद किए।

सबसे बड़ी उपलब्धि रही 14.06 करोड़ रुपए की सामग्री की बरामदगी, जिसमें 2.90 करोड़ रुपए नकद और 7.20 किलोग्राम सोना (जिसका मूल्य 11.16 करोड़ रुपए है) शामिल है। इस प्रकार, 1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 1003 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं और कुल 19.43 करोड़ रुपए की बरामदगी हो चुकी है।

आत्मसमर्पण करने वालों में कई वरिष्ठ कैडर शामिल हैं, जैसे कि सीवाईपीसी मंगल कोरसा उर्फ मोटू, सीवाईपीसी आकाश उर्फ फागु उईका, डीवीसीएम शंकर मुचाकी, एसीएम राजू रैयाम उर्फ मुन्ना और एसीएम पाले कुरसम उर्फ कमली कुरसम (महिला)। इनमें से कई कैडर 1997 से 2004 के बीच संगठन में शामिल हुए थे और विभिन्न बड़े हमलों में शामिल रहे थे।

इस कार्यक्रम में बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. भापुसे, सीआरपीएफ के उप महानिरीक्षक बी.एस. नेगी, बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। स्थानीय समाज के बुजुर्गों और आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के परिवारजनों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।

छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत, इन कैडरों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य उन्हें सम्मानजनक जीवन और समाज में पूर्ण रूप से समाहित करना है।

'पूना मारगेम' अभियान के माध्यम से सुरक्षा बलों (डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा, सीआरपीएफ इत्यादि) ने निरंतर विश्वास निर्माण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया है, जिसके परिणामस्वरूप माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में लौटने की प्रवृत्ति में वृद्धि हुई है।

पुलिस ने शेष बचे माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर हथियार त्याग दें। शासन उनके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Point of View

यह घटना न केवल छत्तीसगढ़ में सुरक्षा स्थिति को बेहतर बनाने का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का सकारात्मक प्रभाव हो रहा है। माओवादी कैडरों का मुख्यधारा में लौटना एक सशक्त समाज की दिशा में एक बड़ा कदम है।
NationPress
31/03/2026

Frequently Asked Questions

बीजापुर में माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण क्यों हुआ?
बीजापुर में माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण 'पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन' पहल के तहत हुआ, जिसमें उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
आत्मसमर्पण के दौरान कितने हथियार बरामद हुए?
आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा बलों ने 93 घातक हथियार बरामद किए।
सरकार इन कैडरों के लिए क्या सहायता प्रदान कर रही है?
सरकार इन कैडरों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करेगी।
इस आत्मसमर्पण का स्थानीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह आत्मसमर्पण स्थानीय समाज में शांति और विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
क्या यह आत्मसमर्पण एक स्थायी समाधान है?
हालांकि, यह आत्मसमर्पण एक सकारात्मक कदम है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता है।
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