GMCH चंडीगढ़ में SC एमबीबीएस काउंसलिंग पर हाईकोर्ट की रोक, बोनाफाइड बनाम माइग्रेंट सर्टिफिकेट विवाद
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (GMCH) में अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के तहत एमबीबीएस प्रवेश काउंसलिंग पर तत्काल रोक लगा दी है। यह विवाद बोनाफाइड और माइग्रेंट निवास प्रमाण पत्र की परिभाषा को लेकर उठा है, जिसमें SC उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया के बीच में ही जनरल कैटेगरी में स्थानांतरित करने का आरोप है।
मामले की पृष्ठभूमि
वकील प्रदीप शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि GMCH ने 8 अगस्त 2026 को एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें SC, OBC, जनरल और NRI श्रेणियों के लिए कट-ऑफ सूची प्रकाशित की गई। इस सूची में SC उम्मीदवारों को स्पष्ट रूप से उनकी श्रेणी में दर्शाया गया था। उम्मीदवारों ने उसी आधार पर आवेदन किया और शुल्क जमा कराया।
शर्मा के अनुसार, बाद में GMCH ने उन उम्मीदवारों के प्रमाण पत्रों को बोनाफाइड की जगह माइग्रेंट घोषित कर दिया, यह कहते हुए कि वे झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों से संबंधित हैं और चंडीगढ़ के स्थायी निवासी नहीं हैं, इसलिए उन्हें UT पुल में नहीं माना जाएगा।
कानूनी दलीलें
वकील प्रदीप शर्मा ने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांत के अनुसार एक बार प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद उसके नियम बीच में नहीं बदले जा सकते। उन्होंने कहा, 'भारत सरकार की तरफ से अगस्त 2025 में नोटिफिकेशन जारी की गई, उसमें जातियों के नाम के साथ लिखा था कि ये जातियाँ SC और ये OBC के अंदर आएंगी। उसके बाद उन्होंने अपना सर्टिफिकेट संबंधित प्राधिकरण से बनवाया। अप्लाई करने और शुल्क देने के बाद अब GMCH ये कहता है कि आप माइग्रेंट हैं।'
शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि SC और OBC उम्मीदवारों ने NEET UG 2026 की काउंसलिंग सूची के अनुसार अपनी-अपनी श्रेणियों में परीक्षा पास की थी। जनरल और SC श्रेणियों के कट-ऑफ स्कोर में स्वाभाविक रूप से अंतर होता है — जनरल कैटेगरी का स्कोर ऊपर और SC का नीचे रहता है — इसलिए श्रेणी परिवर्तन सीधे उम्मीदवारों की प्रवेश पात्रता को प्रभावित करता है।
हाईकोर्ट का आदेश
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने SC काउंसलिंग पर रोक लगाते हुए जनरल कैटेगरी की काउंसलिंग जारी रखने की अनुमति दे दी है। OBC श्रेणी से जुड़ा मामला अभी न्यायालय में लंबित है। अगली सुनवाई की तारीख का अभी ऐलान नहीं हुआ है।
आम उम्मीदवारों पर असर
यह विवाद उन SC उम्मीदवारों के लिए गंभीर संकट पैदा करता है जिन्होंने NEET UG 2026 में अपनी श्रेणी के अनुसार रैंक हासिल की, दस्तावेज़ जमा किए और शुल्क अदा किया। यदि उन्हें जनरल कैटेगरी में रखा जाता है, तो उच्च कट-ऑफ के कारण उनकी प्रवेश संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। यह मामला केवल GMCH तक सीमित नहीं है — यह उन सभी SC उम्मीदवारों के लिए मिसाल बन सकता है जो अन्य राज्यों से चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में प्रवेश लेना चाहते हैं।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद GMCH को SC काउंसलिंग प्रक्रिया तत्काल रोकनी होगी। न्यायालय से अपेक्षा है कि वह बोनाफाइड और माइग्रेंट सर्टिफिकेट की परिभाषा और UT पुल पात्रता पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे। OBC मामले पर अगली सुनवाई में भी इसी मुद्दे पर निर्णय होने की संभावना है।