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चौधरी चरण सिंह: जमींदारी उन्मूलन से किसानों को मिला हक, भारत रत्न से हुए सम्मानित

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चौधरी चरण सिंह: जमींदारी उन्मूलन से किसानों को मिला हक, भारत रत्न से हुए सम्मानित

सारांश

खेतों की मिट्टी से उठकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचे चौधरी चरण सिंह ने जमींदारी उन्मूलन से करोड़ों किसानों की ज़िंदगी बदली, 'अजगर' गठबंधन से उत्तर भारतीय राजनीति की धुरी बदली और नाबार्ड की नींव रखी। मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित यह नेता आज भी कृषि राजनीति का प्रतीक है।

मुख्य बातें

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को नूरपुर गाँव, मेरठ (वर्तमान हापुड़), उत्तर प्रदेश में हुआ था।
'उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950' ( 1952 में लागू) उनकी सबसे बड़ी नीतिगत उपलब्धि रही।
3 अप्रैल 1967 को वे उत्तर प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने।
28 जुलाई 1979 को भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली; कार्यकाल में नाबार्ड की वैचारिक नींव रखी।
29 मई 1987 को 84 वर्ष की आयु में निधन; दिल्ली में किसान घाट पर समाधि।
30 मार्च 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मरणोपरांत भारत रत्न पोते जयंत चौधरी को सौंपा।

चौधरी चरण सिंह — भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री और किसानों के अप्रतिम नेता — का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले (वर्तमान हापुड़) के नूरपुर गाँव में एक मध्यमवर्गीय कृषक परिवार में हुआ था। खेतों की मिट्टी में पले-बढ़े इस नेता ने आगे चलकर करोड़ों किसानों की ज़िंदगी बदल दी। उनके पिता मीर सिंह एक साधारण किसान थे, और यही पृष्ठभूमि चरण सिंह की राजनीतिक दृष्टि की नींव बनी।

शिक्षा और स्वतंत्रता संग्राम

चरण सिंह ने 1923 में आगरा कॉलेज से विज्ञान स्नातक (बीएससी), 1925 में इतिहास में एम.ए. और 1927 में मेरठ कॉलेज से एलएलबी की उपाधि प्राप्त की। महात्मा गांधी और सरदार पटेल के विचारों से प्रेरित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए। नमक सत्याग्रह (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान उन्हें कई बार ब्रिटिश जेलों में बंद किया गया, लेकिन उनका संकल्प अटल रहा।

गौरतलब है कि वे तेवतिया गोत्र के जाट परिवार से थे और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानी राजा नाहर सिंह के वंशज माने जाते हैं।

जमींदारी उन्मूलन: ऐतिहासिक भूमि सुधार

स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश के कृषि एवं राजस्व मंत्री के रूप में चरण सिंह ने वह कर दिखाया जो भारतीय प्रशासनिक इतिहास में मील का पत्थर बना। उन्होंने 'उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950' (जो 1952 में लागू हुआ) को आकार दिया। इस कानून ने सदियों पुरानी जमींदारी व्यवस्था को समाप्त कर लाखों काश्तकार किसानों को उनकी भूमि का वैध स्वामित्व दिलाया।

यह ऐसे समय में आया जब स्वतंत्र भारत में भूमि-असमानता एक गहरी सामाजिक चुनौती थी। इस सुधार ने उत्तर भारत के ग्रामीण समाज की संरचना को मौलिक रूप से बदल दिया।

राजनीतिक उभार और 'अजगर' गठबंधन

1 अप्रैल 1967 को चरण सिंह ने कांग्रेस से नाता तोड़ा और 'भारतीय क्रांति दल' (बीकेडी) की स्थापना की। 3 अप्रैल 1967 को वे उत्तर प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने — यह उत्तर भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत थी।

उन्होंने कृषक जातियों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने के लिए 'अजगर' (अहीर, जाट, गुर्जर और राजपूत) का सामाजिक गठबंधन बनाया। हरित क्रांति और भूमि सुधारों से आर्थिक रूप से सशक्त हुई इन मध्यवर्ती कृषक जातियों को संगठित कर उन्होंने उत्तर भारत में पारंपरिक उच्च-जातीय राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी।

प्रधानमंत्री पद और नीतिगत विरासत

आपातकाल के बाद 1977 के ऐतिहासिक चुनाव में जनता पार्टी की सरकार बनी। मोरारजी देसाई की कैबिनेट में गृह मंत्री और वित्त मंत्री के रूप में उल्लेखनीय कार्य के बाद, 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह ने भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

यद्यपि उनका कार्यकाल अल्पकालिक रहा, तथापि इसी दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग को पूर्ण मंत्रालय का दर्जा दिलाया और नाबार्ड (NABARD) की स्थापना का वैचारिक आधार तैयार किया — जो आज भी कृषि ऋण की रीढ़ है।

सम्मान और स्मृति

29 मई 1987 को 84 वर्ष की आयु में चौधरी चरण सिंह का निधन हो गया। दिल्ली में यमुना तट पर स्थित उनके समाधि स्थल को 'किसान घाट' नाम दिया गया है। उनके जन्मदिन 23 दिसंबर को देश में प्रतिवर्ष 'राष्ट्रीय किसान दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाज़ा। 30 मार्च 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान उनके पोते जयंत चौधरी को सौंपा। उनकी विरासत आज भी भारत की कृषि नीति और ग्रामीण राजनीति को दिशा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने उत्तर प्रदेश में सामाजिक शक्ति-संतुलन को मौलिक रूप से बदला। 'अजगर' गठबंधन महज चुनावी गणित नहीं था — यह पिछड़ी और मध्यवर्ती जातियों के राजनीतिक समावेश की पहली सुसंगत रणनीति थी, जिसने मंडल-पूर्व भारत में पिछड़े वर्गों की आवाज़ को संसदीय वैधता दी। आज जब कृषि संकट और भूमि-अधिकार फिर केंद्र में हैं, तो चरण सिंह का मॉडल — नीति को ज़मीनी अनुभव से जोड़ना — पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौधरी चरण सिंह कौन थे और उनकी विरासत क्या है?
चौधरी चरण सिंह भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री (28 जुलाई 1979) और किसान आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। उन्होंने जमींदारी उन्मूलन अधिनियम 1952 के ज़रिए लाखों काश्तकारों को भूमि-स्वामित्व दिलाया और नाबार्ड की नींव रखी।
उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन अधिनियम 1950 क्या था?
यह अधिनियम 1950 में पारित हुआ और 1952 में लागू हुआ। इसने सदियों पुरानी जमींदारी व्यवस्था को समाप्त कर काश्तकार किसानों को उनकी जोती जा रही भूमि का कानूनी स्वामित्व प्रदान किया। इसे उत्तर प्रदेश के कृषि एवं राजस्व मंत्री के रूप में चरण सिंह ने तैयार किया था।
राष्ट्रीय किसान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय किसान दिवस प्रतिवर्ष 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर मनाया जाता है। यह उनके किसान-हितैषी योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर स्मरण करने का अवसर है।
चरण सिंह को भारत रत्न कब और कैसे मिला?
भारत सरकार ने चौधरी चरण सिंह को मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित करने की घोषणा की। 30 मार्च 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान उनके पोते जयंत चौधरी को सौंपा।
चरण सिंह का 'अजगर' गठबंधन क्या था?
'अजगर' गठबंधन अहीर, जाट, गुर्जर और राजपूत कृषक जातियों का राजनीतिक-सामाजिक मोर्चा था, जिसे चरण सिंह ने उत्तर भारत में पारंपरिक उच्च-जातीय राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती देने के लिए संगठित किया। यह गठबंधन उत्तर भारतीय लोकतंत्र में पिछड़ी और मध्यवर्ती जातियों के राजनीतिक उभार का आधार बना।
राष्ट्र प्रेस
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