चेन्नई पुलिस इंस्पेक्टर गिरफ्तार: आर्मस्ट्रांग हत्याकांड में फंसाने की धमकी देकर व्यापारी से ऐंठे लाखों
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई में ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने 4 अगस्त 2026 को एक पुलिस इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया, जिस पर एक शेयर बाज़ार व्यापारी से लाखों रुपए ऐंठने का गंभीर आरोप है। आरोपी इंस्पेक्टर ने कथित तौर पर व्यापारी को 2024 में हुई बहुजन समाज पार्टी (BSP) नेता के. आर्मस्ट्रांग की हत्या के मामले में झूठा फंसाने की धमकी देकर पिछले दो वर्षों में बार-बार पैसे वसूले।
मामले का घटनाक्रम
शिकायतकर्ता अनिल कुमार (35), जो चेन्नई में शेयर मार्केट ट्रेडर हैं, ने चेन्नई पुलिस मुख्यालय पहुँचकर इंस्पेक्टर मोहम्मद बुहारी के विरुद्ध औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। कुमार का आरोप है कि बुहारी ने उनसे कहा कि उनका मोबाइल नंबर आर्मस्ट्रांग हत्याकांड की जाँच में संदिग्ध के रूप में सामने आया है — जबकि कुमार के अनुसार उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
कुमार ने बताया कि उन्होंने पहले अपना नंबर एक परिचित वकील के साथ साझा किया था। आरोप है कि इंस्पेक्टर बुहारी ने उसी नंबर का उपयोग कर उन्हें जाँच से जोड़ने का भय दिखाया और धन की माँग की।
ताज़ा वसूली और गिरफ्तारी
शिकायत के अनुसार, हाल ही में एक शनिवार को इंस्पेक्टर बुहारी ने व्यापारी के आवास पर जाकर ₹5 लाख की माँग की। कुमार ने यह राशि वाशरमैनपेट मेट्रो रेलवे स्टेशन के निकट पुलिस को सौंपी। इस शिकायत के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल जाँच शुरू की और बुहारी को गिरफ्तार कर लिया गया।
जाँच का दायरा
अधिकारियों के अनुसार, अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस वसूली रैकेट में कोई अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल तो नहीं है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) आर्मस्ट्रांग हत्याकांड की अलग से जाँच कर रही है। इंस्पेक्टर बुहारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच पुलिस विभाग स्वयं कर रहा है।
आर्मस्ट्रांग हत्याकांड की पृष्ठभूमि
BSP नेता के. आर्मस्ट्रांग की हत्या 2024 में हुई थी, जो तमिलनाडु में राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला बना। CBI द्वारा इसकी जाँच जारी है। आलोचकों का कहना है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की आड़ में कुछ तत्व निर्दोष लोगों को धमकाने का अवसर तलाश रहे थे — और बुहारी की गिरफ्तारी इसी आशंका को पुष्ट करती है।
आगे क्या होगा
इंस्पेक्टर मोहम्मद बुहारी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग की आंतरिक जाँच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया भी तेज़ी से आगे बढ़ेगी।