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महाराष्ट्र: ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक का आश्वासन, पेंशन-सेवा लाभ पर होगा विचार

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महाराष्ट्र: ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक का आश्वासन, पेंशन-सेवा लाभ पर होगा विचार

सारांश

महाराष्ट्र विधान परिषद में मंत्री आशीष शेलार ने राज्य के 3,000 से अधिक ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों के पेंशन और सेवा लाभों पर मुख्य सचिव स्तर की बैठक का आश्वासन दिया। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की माँग केंद्र में है।

मुख्य बातें

मंत्री आशीष शेलार ने 30 जून 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक बुलाने का आश्वासन दिया।
महाराष्ट्र में लगभग 3,000 से 3,500 ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारी कार्यरत हैं; 50 से अधिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
नियुक्ति की आयु सीमा 46 से 55 वर्ष होने से सरकारी सेवा का कार्यकाल सीमित रहता है।
सदस्यों ने सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की माँग की।
हाई कोर्ट, छत्रपति संभाजीनगर बेंच के 24 अप्रैल 2026 के आदेश का सदस्यों ने हवाला दिया।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने मंगलवार, 30 जून 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद में आश्वासन दिया कि राज्य के ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों के सेवा लाभों और नौकरी से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शीघ्र एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार संबंधित न्यायालय के फैसलों और मौजूदा कानूनी ढाँचे की समीक्षा के बाद कर्मचारियों के हित में उचित निर्णय लेगी।

ध्यान आकर्षण प्रस्ताव की पृष्ठभूमि

यह आश्वासन एमएलसी अभिजीत वंजारी, अशोक (भाई) जगताप, सुधाकर अडबाले, धीरज लिंगाडे, सतेज (बंटी) पाटिल और जयंत असगांवकर द्वारा लाए गए 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के जवाब में आया। इस प्रस्ताव में ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों के लिए पेंशन योजना और अन्य सेवा लाभों की माँग उठाई गई थी।

कर्मचारियों की स्थिति और आँकड़े

मंत्री शेलार ने सदन को बताया कि महाराष्ट्र के विभिन्न सरकारी संस्थानों में इस समय लगभग 3,000 से 3,500 ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि सेवानिवृत्त हो चुके ऐसे कर्मचारियों की संख्या 50 से अधिक है। इन पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित आयु सीमा 46 से 55 वर्ष के बीच होने के कारण सरकारी सेवा में उनका प्रभावी कार्यकाल अपेक्षाकृत कम रहता है।

सदस्यों की प्रमुख माँगें

चर्चा के दौरान विधान परिषद सदस्यों ने कई महत्वपूर्ण माँगें रखीं। सदस्यों ने आग्रह किया कि जिस तिथि से कर्मचारियों ने ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारी के रूप में सेवा आरंभ की थी, उसे ही सरकारी नियुक्ति की आधिकारिक तिथि माना जाए, ताकि उन्हें पूर्वव्यापी सेवा लाभ मिल सकें। इसके अतिरिक्त, आंध्र प्रदेश सरकार के मॉडल का हवाला देते हुए सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने की भी माँग की गई।

सदस्यों ने यह भी माँग की कि महाराष्ट्र सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1982 के तहत सभी ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। साथ ही, हाई कोर्ट, छत्रपति संभाजीनगर बेंच के 24 अप्रैल 2026 के आदेश और विभिन्न सरकारी आदेशों का उल्लेख करते हुए एक बार के लिए विशेष नीतिगत निर्णय लेने का आग्रह किया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री शेलार ने स्पष्ट किया कि सरकार न्यायालय के फैसलों और कानूनी ढाँचे के आधार पर इस मामले की गहन समीक्षा करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली बैठक में उन सभी संभावित उपायों पर विचार किया जाएगा जिनसे इन कर्मचारियों को राहत मिल सके और वे अपने पात्र लाभ प्राप्त कर सकें।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में संविदा और अंशकालिक सरकारी कर्मचारियों के सेवा अधिकारों को लेकर विभिन्न राज्यों में बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि छत्रपति संभाजीनगर बेंच के अप्रैल 2026 के आदेश ने इस मामले को नई गति दी है। मुख्य सचिव स्तर की बैठक के नतीजे यह तय करेंगे कि महाराष्ट्र इन कर्मचारियों के लिए किस नीतिगत दिशा में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है कि महाराष्ट्र विधानमंडल में इन कर्मचारियों के लिए आश्वासन दिए गए हों — असली सवाल यह है कि इस बार ठोस नीतिगत निर्णय कितनी जल्दी आता है। छत्रपति संभाजीनगर बेंच का अप्रैल 2026 का आदेश सरकार पर कानूनी दबाव बनाता है, जो इस मुद्दे को केवल विधायी सहानुभूति से आगे ले जाता है। पुरानी पेंशन योजना की माँग राष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस से जुड़ी है, और महाराष्ट्र का निर्णय अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है। बिना समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, यह आश्वासन भी उन वादों की सूची में जुड़ने का जोखिम उठाता है जो सदन की कार्यवाही से आगे नहीं बढ़ पाते।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारी कौन होते हैं?
ये वे कर्मचारी हैं जिन्हें महाराष्ट्र के विभिन्न सरकारी संस्थानों में 46 से 55 वर्ष की आयु में अंशकालिक आधार पर नियुक्त किया जाता है। इस समय राज्य में लगभग 3,000 से 3,500 ऐसे कर्मचारी कार्यरत हैं और 50 से अधिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक क्यों बुलाई जा रही है?
महाराष्ट्र विधान परिषद में सदस्यों द्वारा लाए गए ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के जवाब में मंत्री आशीष शेलार ने यह आश्वासन दिया। बैठक का उद्देश्य ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों के पेंशन, सेवा लाभ और अन्य मुद्दों पर ठोस नीतिगत निर्णय लेना है।
कर्मचारियों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
सदस्यों ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — सेवा आरंभ तिथि को आधिकारिक नियुक्ति तिथि मानकर पूर्वव्यापी लाभ देना, सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करना, और महाराष्ट्र सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1982 के तहत पुरानी पेंशन योजना लागू करना।
छत्रपति संभाजीनगर बेंच के 24 अप्रैल 2026 के आदेश का क्या महत्व है?
हाई कोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर बेंच ने 24 अप्रैल 2026 को एक आदेश दिया जिसका हवाला विधान परिषद सदस्यों ने सरकार पर एक बार के नीतिगत निर्णय के लिए दबाव बनाने में किया। यह आदेश इस मुद्दे को केवल विधायी बहस से आगे एक कानूनी बाध्यता का रूप देता है।
आंध्र प्रदेश मॉडल का संदर्भ क्यों दिया गया?
सदस्यों ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा अपनाए गए मॉडल का उल्लेख करते हुए महाराष्ट्र में भी ग्रेजुएट पार्ट-टाइम कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करने की माँग की। उनका तर्क था कि सीमित कार्यकाल के कारण ये कर्मचारी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में कम लाभ पाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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