7 अक्टूबर 2026
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सपा सांसद धर्मेंद्र यादव का आरोप: चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के नाम पर काट रहा वोट, CEC बर्खास्तगी की माँग

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सपा सांसद धर्मेंद्र यादव का आरोप: चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के नाम पर काट रहा वोट, CEC बर्खास्तगी की माँग

सारांश

सपा और AAP ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने CEC ज्ञानेश कुमार पर सुप्रीम कोर्ट के नाम पर वोट काटने का आरोप लगाया और बर्खास्तगी की माँग की — यह विवाद अब आजमगढ़ से संसद तक पहुँच चुका है।

मुख्य बातें

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने 7 अक्टूबर 2026 को आजमगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की माँग दोहराई।
यादव का आरोप: चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के नाम का दुरुपयोग कर मतदाताओं के वोट काटे।
CEC पर फॉर्म-6 में संसद की मंजूरी के बिना एकतरफा संशोधन और दो साथी आयुक्तों की राय नजरअंदाज करने का आरोप।
AAP सांसद संजय सिंह ने ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने और बंगाल, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा के चुनाव रद्द करने की माँग की।
AAP ने 9 अक्टूबर को लखनऊ में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया।
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा: आरोप विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि खुद चुनाव आयोग के दो सदस्यों द्वारा उठाए गए हैं।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने 7 अक्टूबर 2026 को आजमगढ़ में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की माँग को और तेज़ कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पहले आम जनता को, फिर राजनीतिक दलों को गुमराह किया और अब सर्वोच्च न्यायालय के नाम का दुरुपयोग कर मतदाताओं के वोट काटे जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस विरोध में शामिल होते हुए 9 अक्टूबर को लखनऊ में प्रदर्शन की घोषणा की है।

मुख्य आरोप और बयान

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, 'चुनाव आयोग पर पूरे देश का अविश्वास हो चुका है। सर्वोच्च न्यायालय के नाम का दुरुपयोग करके वोट काटना — इससे बड़ा देशद्रोह नहीं हो सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिना संसद की स्वीकृति के फॉर्म-6 में संशोधन किया, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। उन्होंने दो साथी चुनाव आयुक्तों की राय को भी नजरअंदाज किया, जबकि उनका समान संवैधानिक अधिकार था।

विरोध का विस्तार: आजमगढ़ से दिल्ली तक

यादव ने बताया कि समाजवादी पार्टी ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में मंगलवार को संसद के सामने प्रदर्शन किया था। बुधवार को आजमगढ़ में पार्टी के बुजुर्ग नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में जनता सड़कों पर उतर रही है।

सपा प्रवक्ता की दलील

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि यह आरोप विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि खुद चुनाव आयोग के दो सदस्यों द्वारा उठाए गए हैं, और अभी तक किसी सार्वजनिक मंच से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से भी सवाल किया कि चूँकि तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भाजपा सरकार ने की है, इसलिए उसे इस मामले में सबसे पहले संज्ञान लेना चाहिए था।

AAP का समर्थन और तीखे तेवर

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने इस विरोध को और धार देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेल भेजा जाना चाहिए और जहाँ-जहाँ चुनावों में गड़बड़ी हुई — चाहे वह बंगाल, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र या हरियाणा हो — उन सभी चुनावों को रद्द किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि फॉर्म-6 संशोधन विवाद और मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोप हाल के हफ्तों में विपक्षी दलों के बीच बड़ा मुद्दा बनकर उभरे हैं।

आगे क्या होगा

सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने साफ किया कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के लिए दबाव बनाए रखेगी, चाहे सरकार समय दे या न दे। यह विवाद ऐसे समय में और गहरा होता दिख रहा है जब कई राज्यों में चुनाव की तैयारियाँ चल रही हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक रूप से चयनात्मक भी — विपक्ष ने उन्हीं राज्यों के चुनाव रद्द करने की माँग की है जहाँ वे सत्ता से बाहर हैं। असली सवाल यह है कि फॉर्म-6 संशोधन विवाद में चुनाव आयोग के भीतरी मतभेद कितने गहरे हैं और क्या सर्वोच्च न्यायालय इस पर स्वतः संज्ञान लेगा। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पहले से ही संवैधानिक पुनर्विचार के दायरे में है — यह विवाद उस बहस को और तेज़ करेगा। भाजपा की चुप्पी भी उल्लेखनीय है, क्योंकि उसी सरकार ने तीनों आयुक्त नियुक्त किए हैं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा और AAP चुनाव आयोग के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
सपा और AAP का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में संसद की मंजूरी के बिना संशोधन कर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे हैं। पार्टियों का दावा है कि इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के नाम का दुरुपयोग किया गया।
फॉर्म-6 विवाद क्या है?
फॉर्म-6 मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आवेदन पत्र है। सपा का आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने बिना संसदीय अनुमोदन के इस फॉर्म में बदलाव किए, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। साथ ही, उन्होंने दो साथी चुनाव आयुक्तों की असहमति को भी नजरअंदाज किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की माँग कौन कर रहा है?
समाजवादी पार्टी (सपा) और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों ने CEC ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की माँग की है। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने आजमगढ़ और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किए, जबकि AAP सांसद संजय सिंह ने उन्हें जेल भेजने तक की माँग कर दी है।
AAP का 9 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित प्रदर्शन किस बारे में है?
आम आदमी पार्टी ने 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। यह प्रदर्शन मतदाता सूची से नाम हटाने और फॉर्म-6 संशोधन विवाद के विरोध में है, और इसे सपा के आंदोलन के साथ समन्वय करते हुए आयोजित किया जा रहा है।
भाजपा की इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया है?
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने बताया कि अभी तक भाजपा की ओर से इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने तर्क दिया कि चूँकि तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भाजपा सरकार ने की है, इसलिए पार्टी की जवाबदेही बनती है।
राष्ट्र प्रेस
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