चुनाव आयोग में धोखाधड़ी का आरोप, AIMIM के वारिस पठान ने ज्ञानेश कुमार से माँगा इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 30 सितंबर 2026 को मुंबई में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में कथित तौर पर धोखाधड़ी और गड़बड़ी हुई है, जिस कारण लोगों का मतदान का अधिकार प्रभावित हुआ है।
चुनाव आयोग पर आरोप
पठान ने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को विरोध करने का अधिकार देता है और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवाल इसी अधिकार के तहत आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने उन लोगों के निर्देश पर काम किया जिनके खिलाफ भी सवाल उठ रहे हैं।
पठान के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित होता है, तो इस पर सवाल उठाना स्वाभाविक है।
मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता की हत्या पर प्रतिक्रिया
मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के एक नेता की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना पर पठान ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुंबई में एक बार फिर गोलीबारी की घटनाएँ सामने आ रही हैं, जो पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल मामले की जाँच कर रही है और इस घटना में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं — पठान की राय
दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली दंगों से जुड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किए जाने पर पठान ने कानूनी सिद्धांतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 'जमानत नियम है और जेल अपवाद' — यह कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है।
पठान ने तर्क दिया कि किसी भी व्यक्ति को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हिरासत में है, मुकदमा आगे नहीं बढ़ रहा और जमानत भी नहीं मिल रही, तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उनके अनुसार उमर खालिद का ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
विपक्ष की आवाज़ और संवैधानिक अधिकार
पठान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब कई विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि मतदाता सूची से नामों के कथित विलोपन का मुद्दा कई राज्यों में राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता लोकतंत्र की नींव है और इस पर कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
आगे देखा जाए तो पठान के बयान से विपक्षी खेमे में चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन और तेज होने के संकेत मिलते हैं।