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सीआईएसएफ का कोयला तस्करी पर प्रहार: तीन हफ्तों में 1,798 मीट्रिक टन जब्त, 84 वाहन भी पकड़े

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सीआईएसएफ का कोयला तस्करी पर प्रहार: तीन हफ्तों में 1,798 मीट्रिक टन जब्त, 84 वाहन भी पकड़े

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह की समीक्षा बैठक के बाद शुरू हुए 'जीरो कोल लीकेज' अभियान में सीआईएसएफ ने तीन हफ्तों में 1,798 मीट्रिक टन अवैध कोयला, 84 वाहन जब्त किए और 21 शिकायतें दर्ज कीं — यह कोयला क्षेत्र में संगठित तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाइयों में से एक है।

मुख्य बातें

सीआईएसएफ ने 5 जुलाई से 19 जुलाई 2026 के बीच 1,798.725 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त किया, अनुमानित कीमत ₹1.08 करोड़ ।
सबसे अधिक 1,063.91 मीट्रिक टन कोयला बीसीसीएल, धनबाद से जब्त किया गया।
अवैध परिवहन में लगे 84 वाहन — हाइवा ट्रक और संशोधित मोटरसाइकिलें — जब्त कर स्थानीय पुलिस को सौंपे गए।
तस्करी में संलिप्त लोगों के खिलाफ 21 प्रत्यक्ष शिकायतें दर्ज।
अभियान गृह मंत्री अमित शाह की 5 जुलाई 2026 की उच्चस्तरीय बैठक के निर्देशों के बाद शुरू हुआ।
एमएमडीआर एक्ट की धारा 22, 23बी और 24 के तहत विशेष कानूनी अधिकारों का उपयोग किया जा रहा है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने कोयला चोरी, अवैध खनन और तस्करी के विरुद्ध चलाए गए विशेष अभियान में बड़ी सफलता दर्ज की है। 5 जुलाई से 19 जुलाई 2026 के बीच तीन सप्ताह की इस कार्रवाई में सीआईएसएफ ने अपने सुरक्षा क्षेत्र के विभिन्न कोयला खदानों से 1,798.725 मीट्रिक टन अवैध रूप से खनन, भंडारित या परिवहन किए जा रहे कोयले को जब्त किया, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत करीब ₹1.08 करोड़ बताई जा रही है।

अभियान का दायरा और मुख्य आँकड़े

जब्त किए गए कोयले में बीसीसीएल, धनबाद से 1,063.91 मीट्रिक टन, ईसीएल, शीतलपुर से 450.13 मीट्रिक टन तथा सीसीएल, रांची एवं सीएमपी (एच) से 284.715 मीट्रिक टन कोयला शामिल है। इसके साथ ही अवैध परिवहन में इस्तेमाल 84 वाहन भी जब्त किए गए, जिनमें भारी-भरकम हाइवा ट्रक और विशेष रूप से संशोधित मोटरसाइकिलें शामिल हैं। अवैध खनन व तस्करी में संलिप्त लोगों के खिलाफ 21 प्रत्यक्ष शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं।

अभियान की पृष्ठभूमि

यह सख्त अभियान 5 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद शुरू किया गया। उस बैठक में गृह मंत्रालय ने 'जीरो कोल लीकेज' के लक्ष्य को हासिल करने और अवैध खनन, चोरी तथा कोयले की तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। गौरतलब है कि कोयला क्षेत्रों में संगठित तस्करी नेटवर्क वर्षों से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचाते रहे हैं।

कानूनी अधिकार और तकनीकी निगरानी

सीआईएसएफ के अनुसार, इस अभियान को प्रभावी बनाने में खनिज एवं खदान (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर एक्ट) की धारा 22, 23बी और 24 के तहत मिले विशेष कानूनी अधिकार निर्णायक साबित हो रहे हैं। इन प्रावधानों के तहत अधिकृत अधिकारी सीधे सक्षम अदालत में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, तलाशी ले सकते हैं और अवैध खनिज भंडारण स्थलों पर कार्रवाई कर सकते हैं।

तकनीकी मोर्चे पर मानव खुफिया सूचना, सीसीटीवी निगरानी, कोयले की आवाजाही की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वित अभियान का उपयोग किया जा रहा है।

तस्करी का तरीका और वाहनों की जब्ती

जब्त किए गए 84 वाहन यह उजागर करते हैं कि कोयला तस्कर भारी ट्रकों के साथ-साथ संशोधित मोटरसाइकिलों के ज़रिए छोटे-छोटे हिस्सों में कोयले की तस्करी कर रहे थे — जो परंपरागत निगरानी तंत्र को चकमा देने की रणनीति थी। जब्त वाहनों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है।

आगे की रणनीति

सीआईएसएफ के महानिदेशक ने कहा कि बल आगे भी खुफिया जानकारी आधारित अभियान, अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी और अपने वैधानिक अधिकारों का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए कोयला कंपनियों, स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर 'जीरो कोल लीकेज' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कार्रवाई जारी रखेगा। यह अभियान दर्शाता है कि केंद्र सरकार कोयला क्षेत्र में संगठित अपराध के विरुद्ध दीर्घकालिक रणनीति अपना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या तीन सप्ताह का यह अभियान एक स्थायी व्यवस्था में बदल पाएगा या गृह मंत्रालय की समीक्षा बैठक के बाद आई अल्पकालिक सक्रियता मात्र रहेगी। कोयला क्षेत्र में संगठित तस्करी नेटवर्क दशकों पुराने हैं और स्थानीय राजनीतिक संरक्षण के बिना इतने विस्तृत नहीं हो सकते — 84 वाहनों की जब्ती और मात्र 21 शिकायतें यह सवाल उठाती हैं कि नेटवर्क के ऊपरी सिरे तक कार्रवाई पहुँची या नहीं। 'जीरो कोल लीकेज' का लक्ष्य तब तक अधूरा रहेगा जब तक जब्ती के आँकड़ों के साथ-साथ दोषसिद्धि दर और राजस्व वसूली के आँकड़े सार्वजनिक न हों।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईएसएफ के कोयला विरोधी अभियान में क्या-क्या जब्त किया गया?
सीआईएसएफ ने तीन सप्ताह के अभियान में 1,798.725 मीट्रिक टन अवैध कोयला और 84 वाहन जब्त किए, साथ ही 21 प्रत्यक्ष शिकायतें दर्ज कराई गईं। जब्त कोयले की अनुमानित कीमत करीब ₹1.08 करोड़ बताई गई है।
यह अभियान कब और क्यों शुरू हुआ?
यह अभियान 5 जुलाई 2026 को गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद शुरू किया गया। बैठक में 'जीरो कोल लीकेज' के लक्ष्य को हासिल करने और कोयला तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।
किन कोयला क्षेत्रों में सबसे अधिक कार्रवाई हुई?
सबसे अधिक 1,063.91 मीट्रिक टन कोयला बीसीसीएल, धनबाद से जब्त किया गया। इसके अलावा ईसीएल, शीतलपुर से 450.13 मीट्रिक टन और सीसीएल, रांची एवं सीएमपी (एच) से 284.715 मीट्रिक टन कोयला जब्त किया गया।
सीआईएसएफ को कोयला तस्करी रोकने के क्या कानूनी अधिकार हैं?
सीआईएसएफ के अधिकारियों को एमएमडीआर एक्ट, 1957 की धारा 22, 23बी और 24 के तहत विशेष अधिकार प्राप्त हैं। इनके तहत वे सीधे सक्षम अदालत में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, तलाशी ले सकते हैं और अवैध खनिज भंडारण स्थलों पर कार्रवाई कर सकते हैं।
कोयला तस्कर किन तरीकों से तस्करी करते थे?
जब्त 84 वाहनों से पता चला कि तस्कर भारी हाइवा ट्रकों के साथ-साथ विशेष रूप से संशोधित मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल कर छोटे-छोटे हिस्सों में कोयले की तस्करी करते थे। यह रणनीति परंपरागत निगरानी तंत्र को चकमा देने के लिए अपनाई जाती थी।
राष्ट्र प्रेस
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