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सीआईएसएफ की 'जीरो कोल लीकेज' कार्रवाई: झारखंड-बंगाल में 428 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद, 4 एफआईआर दर्ज

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सीआईएसएफ की 'जीरो कोल लीकेज' कार्रवाई: झारखंड-बंगाल में 428 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद, 4 एफआईआर दर्ज

सारांश

सीआईएसएफ ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में एक साथ कई मोर्चों पर कार्रवाई करते हुए 428 मीट्रिक टन से अधिक अवैध कोयला जब्त किया — यह केंद्र की 'जीरो कोल लीकेज' नीति का अब तक का सबसे ठोस जमीनी प्रदर्शन है, जो 5 जुलाई की उच्च-स्तरीय बैठक के ठीक बाद आया।

मुख्य बातें

सीआईएसएफ ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में अवैध कोयला खनन के विरुद्ध अभियान में 428 मीट्रिक टन से अधिक कोयला बरामद किया।
अभियान में 4 एफआईआर दर्ज की गईं और अवैध गतिविधियों में प्रयुक्त वाहन व उपकरण जब्त किए गए।
कार्रवाई बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल के परिचालन क्षेत्रों में की गई।
5 जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह और कोयला मंत्री जी.
किशन रेड्डी की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक हुई थी।
सीआईएसएफ और कोल इंडिया अधिकारियों को एमएमडीआर एक्ट, 1957 के तहत तलाशी, जब्ती और वाद दायर करने के विस्तृत अधिकार दिए गए हैं।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने केंद्र सरकार की 'जीरो कोल लीकेज' पहल के तहत झारखंड और पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन, चोरी, अनाधिकृत भंडारण और परिवहन के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया, जिसमें 428 मीट्रिक टन से अधिक अवैध कोयला जब्त किया गया और 4 प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गईं। यह अभियान खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर एक्ट) के अंतर्गत संचालित किया गया।

अभियान का दायरा और तरीका

सीआईएसएफ ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की सहायक कंपनियों, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर खुफिया जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की। अभियान में मानव खुफिया नेटवर्क, ड्रोन निगरानी, अचानक निरीक्षण और परिवहन मार्गों की सतत निगरानी जैसी बहुस्तरीय तकनीकों का उपयोग किया गया। अवैध गतिविधियों में प्रयुक्त वाहनों और उपकरणों को भी जब्त कर आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई आरंभ की गई है।

कहाँ-कहाँ हुई कार्रवाई

यह संयुक्त अभियान मुख्यतः भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के परिचालन क्षेत्रों में चलाया गया। गौरतलब है कि धनबाद और उसके आसपास के इलाके लंबे समय से अवैध कोयला खनन के केंद्र रहे हैं।

उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब 5 जुलाई को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, कोयला सचिव तथा सीआईएसएफ, कोल इंडिया और बीसीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में गृह मंत्री ने धनबाद क्षेत्र में अवैध खनन और कोयला चोरी की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

कानूनी अधिकार और नई शक्तियाँ

कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि अक्टूबर 2025 की समीक्षा के बाद से सीआईएसएफ और कोल इंडिया के अधिकारियों को एमएमडीआर एक्ट, 1957 के तहत विस्तृत अधिकार प्रदान किए गए हैं। इनमें संदिग्ध स्थलों पर प्रवेश, तलाशी और जब्ती, न्यायालय में वाद दायर करने तथा अवैध खनन में प्रयुक्त औजारों, उपकरणों एवं वाहनों को जब्त करने का अधिकार शामिल है।

आगे की राह

सीआईएसएफ के अनुसार इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य देश के बहुमूल्य खनिज संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध खनन के नेटवर्क को ध्वस्त करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन निगरानी और बहु-एजेंसी समन्वय जैसे कदम दीर्घकालिक निरोध में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, बशर्ते जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन निरंतर बना रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि धनबाद जैसे क्षेत्रों में दशकों पुराने अवैध खनन नेटवर्क के मुकाबले यह कितनी बड़ी है। एमएमडीआर एक्ट के तहत नई शक्तियाँ देना एक स्वागतयोग्य कदम है, परंतु आलोचकों का कहना है कि जब तक स्थानीय राजनीतिक संरक्षण की जड़ें नहीं काटी जातीं, तब तक ये अभियान सतह को ही खुरचते रहेंगे। उच्च-स्तरीय बैठक के तुरंत बाद कार्रवाई का यह क्रम नीति की गंभीरता दर्शाता है, लेकिन निरंतरता और पारदर्शी परिणाम-रिपोर्टिंग के बिना 'जीरो कोल लीकेज' महज एक नारा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईएसएफ की अवैध कोयला खनन के विरुद्ध कार्रवाई क्या है?
सीआईएसएफ ने केंद्र की 'जीरो कोल लीकेज' पहल के तहत झारखंड और पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों में बहु-एजेंसी अभियान चलाकर 428 मीट्रिक टन से अधिक अवैध कोयला बरामद किया और 4 एफआईआर दर्ज कीं। यह अभियान एमएमडीआर एक्ट, 1957 के तहत संचालित है।
'जीरो कोल लीकेज' पहल क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह केंद्र सरकार की नीति है जिसका उद्देश्य कोयला खदानों से अवैध खनन, चोरी और अनाधिकृत परिवहन को पूरी तरह रोकना है। यह पहल देश के खनिज राजस्व की सुरक्षा और कोयला आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
5 जुलाई की उच्च-स्तरीय बैठक में क्या हुआ था?
गृह मंत्री अमित शाह और कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर धनबाद क्षेत्र में बिगड़ती अवैध खनन स्थिति की समीक्षा की। बैठक में अक्टूबर 2025 के बाद उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया गया और सीआईएसएफ व कोल इंडिया को एमएमडीआर एक्ट के तहत विस्तृत अधिकार देने की पुष्टि की गई।
इस अभियान में किन क्षेत्रों और कंपनियों को निशाना बनाया गया?
कार्रवाई मुख्यतः बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल के परिचालन क्षेत्रों में की गई, जो झारखंड और पश्चिम बंगाल में स्थित हैं। ड्रोन निगरानी, अचानक निरीक्षण और परिवहन मार्गों की निगरानी जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया।
सीआईएसएफ को एमएमडीआर एक्ट के तहत कौन-से नए अधिकार मिले हैं?
सीआईएसएफ और कोल इंडिया के अधिकारियों को अब संदिग्ध स्थलों पर प्रवेश, तलाशी और जब्ती, न्यायालय में वाद दायर करने तथा अवैध खनन में प्रयुक्त वाहनों व उपकरणों को जब्त करने का अधिकार एमएमडीआर एक्ट, 1957 के तहत दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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