दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर CISF ने यात्री के हैंड बैग से बरामद की बंदर की खोपड़ी, वन्यजीव कानून के तहत मामला दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर प्री-बोर्डिंग सुरक्षा जाँच के दौरान एक यात्री के हैंड बैगेज से एक खोपड़ी बरामद की। यात्री दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली उड़ान पकड़ने की तैयारी में था। पूछताछ में यात्री ने दावा किया कि यह बंदर की खोपड़ी है।
मुख्य घटनाक्रम
CISF कर्मियों ने एक्स-रे स्कैनर पर यात्री के हैंड बैग में संदिग्ध वस्तु की पहचान की। बैग खोलने और पूछताछ के बाद यात्री ने स्वयं स्वीकार किया कि वस्तु बंदर की खोपड़ी है। वस्तु की प्रकृति और वन्यजीवों से उसके संभावित संबंध को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की गई।
कानूनी कार्रवाई
CISF ने यात्री को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत आगे की विधिक कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित प्रजातियों के अंगों को रखना, परिवहन करना या व्यापार करना दंडनीय अपराध है। अधिकारियों के अनुसार मामले की आगे जाँच जारी है।
पूर्व की घटनाएँ — IGI पर संदिग्ध वस्तुएँ
यह ऐसे समय में आया है जब IGI हवाई अड्डे पर इस तरह की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। गौरतलब है कि 24 जनवरी को टर्मिनल 3 पर एक बक्से में मानव कंकाल जैसी वस्तु मिलने से अफरा-तफरी मच गई थी। दिल्ली पुलिस के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (हवाई अड्डा) विचित्र वीर ने बताया था कि बक्सा सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच एयरलाइन कार्यालय के पास प्रस्थान क्षेत्र में मिला था। एक यात्री को उड़ान में बक्सा ले जाने की अनुमति नहीं मिलने पर उसने इसे एयरलाइन कर्मचारियों के पास छोड़ दिया था, जिसे बाद में सफाई कर्मचारियों ने देखा और सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया।
बाद की जाँच में पता चला कि वह कंकाल असली नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक मॉडल था। पुलिस अधिकारियों ने तब स्पष्ट किया था कि कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली और स्थिति को स्थापित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार संभाला गया — तथापि, फोरेंसिक जाँच के लिए कंकाल को भेजा गया था।
वन्यजीव तस्करी और हवाई अड्डा सुरक्षा
विशेषज्ञों के अनुसार हवाई मार्ग से वन्यजीव उत्पादों की तस्करी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। CISF की सतर्कता और उन्नत स्कैनिंग तकनीक के चलते हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले पकड़ में आए हैं। वर्तमान मामले में भी एक्स-रे स्क्रीनिंग ने ही संदिग्ध वस्तु की पहचान में निर्णायक भूमिका निभाई।
आगे क्या
पुलिस यात्री से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खोपड़ी कहाँ से लाई गई और इसका उद्देश्य क्या था। वन्यजीव विभाग को भी मामले में शामिल किया जा सकता है। दोष सिद्ध होने पर आरोपी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है।