यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026: लाखों उम्मीदवार बोले — 'तैयारी की कोई सीमा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 रविवार, 25 मई को देशभर के परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। अनुमानतः 8 से 9 लाख उम्मीदवारों ने इस परीक्षा में भाग लिया, जिनमें पहली बार परीक्षा देने वाले युवाओं से लेकर तीसरे-चौथे प्रयास के अनुभवी अभ्यर्थी तक शामिल रहे।
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
परीक्षा के सुचारू और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सीसीटीवी निगरानी, जैमर, बायोमेट्रिक जाँच और रेटिना स्कैन जैसी बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की। उम्मीदवारों को प्रवेश की अनुमति देने से पहले गहन जाँच की गई। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 21 केंद्रों पर 6,652 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए।
उम्मीदवारों की आवाज़: पहला प्रयास से तीसरे तक
नई दिल्ली के पुष्प विहार सेक्टर 3 स्थित केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जमा हुए। वहाँ पहुँचे अभिभावक मुरली मनोहर सिंह ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि लगभग 8 से 9 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, जिनमें से लगभग 15,000 प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं। इसका मतलब है कि लगभग 98.5 फीसदी उम्मीदवार अस्वीकृत हो जाते हैं, इसलिए यह परीक्षा चयन के बारे में नहीं है बल्कि अस्वीकृति के बारे में अधिक है।'
हरियाणा के रोहतक से परीक्षा देने आए नितिन ने पहले प्रयास की घबराहट को बेबाकी से बयाँ किया: 'पहली बार परीक्षा दे रहा हूँ, इसलिए थोड़ा चिंतित हूँ। लगता है कि तैयारी पूरी नहीं हुई है।' वहीं, नौकरी के साथ तैयारी करने वाले अभ्यर्थी रजत ने कहा कि यह उनका दूसरा प्रयास है और परीक्षा के बाद ही तैयारी का सही आकलन हो पाएगा।
तीसरे प्रयास में शामिल अभ्यर्थी आलोक का कहना था, 'तैयारी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती, हम लगातार तैयारी करते रहते हैं।' यह भावना उस वृहत्तर संघर्ष को दर्शाती है जो लाखों युवा इस परीक्षा के लिए वर्षों तक झेलते हैं।
प्रयागराज और अन्य केंद्रों पर उत्साह
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में परीक्षा केंद्र पर पहुँचे एक अभ्यर्थी ने कहा, 'तैयारियाँ अच्छी हैं, अच्छा महसूस कर रहा हूँ।' एक अन्य युवा ने केंद्र की व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि बायोमेट्रिक्स और रेटिना स्कैन के ज़रिये प्रवेश प्रक्रिया सुव्यवस्थित रही।
यूपीएससी परीक्षा: आँकड़ों में कठिनाई
यह ऐसे समय में आया है जब देश में सरकारी नौकरियों की माँग लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि यूपीएससी की सफलता दर दुनिया की सबसे कठिन प्रतिस्पर्धाओं में से एक है — अनुमानतः 98.5% से अधिक अभ्यर्थी प्रारंभिक चरण में ही बाहर हो जाते हैं। फिर भी हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में बैठते हैं, जो भारतीय युवाओं की प्रशासनिक सेवाओं के प्रति अटूट आकांक्षा को दर्शाता है।
आगे क्या
प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा (Mains) की तैयारी में जुट जाएँगे। यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर परिणाम की तिथि की जानकारी जल्द अपेक्षित है।