सीजेआई सूर्यकांत मॉस्को में बोले: बदलती दुनिया में न्याय व्यवस्था का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मंगलवार, 23 जून को मॉस्को में कहा कि भारत और रूस की न्याय व्यवस्थाएँ भले ही अलग-अलग कानूनी परंपराओं से उपजी हों, किंतु दोनों के सामने एक समान और कठिन चुनौती है — तेज़ी से बदलती दुनिया में नागरिकों का न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखना। यह बात उन्होंने रूस के सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष इगोर क्रास्नोव के साथ हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक में कही।
भारत-रूस न्यायिक संवाद: समानताएँ और साझा दायित्व
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि 2024 में सोची में आयोजित ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीशों की बैठक के दौरान उनकी रूस यात्रा के बाद से उन्होंने दोनों देशों की न्याय प्रणाली के बीच एक दिलचस्प समानता महसूस की है। उन्होंने कहा, "भारत का सर्वोच्च न्यायालय और रूस का सर्वोच्च न्यायालय — दोनों ही विशाल और बहुविध समाजों की सेवा करते हैं। हमारी कानूनी परंपराएँ अलग-अलग इतिहास से विकसित हुई हैं, लेकिन हमारे सामने एक साझा प्रश्न है कि तेज़ी से बदलती दुनिया में न्यायपालिका के प्रति जनता का विश्वास कैसे अक्षुण्ण रखा जाए।"
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत और रूस जैसे भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशाल देशों में न्याय-प्रशासन स्वयं में एक असाधारण जिम्मेदारी है।
तकनीक और न्याय: संतुलन की ज़रूरत
न्याय व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते प्रयोग पर सीजेआई ने कहा कि आधुनिक अदालतों को तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करना होगा, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही अनिवार्य है कि न्याय मानवीय मूल्यों से जुड़ा रहे। उन्होंने स्पष्ट किया, "न्याय का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम तकनीकी बदलावों को इंसानी मूल्यों के साथ किस तरह जोड़ते हैं।"
उनके अनुसार, तकनीक अदालतों तक पहुँच को सुगम बना सकती है और प्रक्रियाओं को गति दे सकती है, परंतु न्याय प्रदान करना सदैव एक मानवीय प्रक्रिया ही बनी रहेगी। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विश्व भर की न्यायपालिकाएँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के न्यायिक उपयोग को लेकर नैतिक प्रश्नों से जूझ रही हैं।
भारत की अदालतों का डिजिटल रूपांतरण
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि भारत में न्यायपालिका के डिजिटल रूपांतरण की पूरी यात्रा इसी दर्शन पर आधारित रही है कि तकनीक न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाए, न कि न्याय के मूल सिद्धांतों को प्रतिस्थापित करे। इस क्रम में ई-फाइलिंग, ऑनलाइन सुनवाई, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, एआई-आधारित अनुवाद और वर्चुअल न्यायिक सहायता जैसी सुविधाएँ लागू की गई हैं। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के बाद से भारतीय अदालतों में वर्चुअल सुनवाई की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
न्यायिक सहयोग की संभावनाएँ
दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग के विस्तार पर चर्चा करते हुए सीजेआई ने कहा कि भारत और रूस न्यायिक अकादमियों के बीच आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध साझेदारी और श्रेष्ठ कार्यपद्धतियों के आपसी साझाकरण के ज़रिए अपने संबंधों को नई ऊँचाई दे सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों सर्वोच्च न्यायालयों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग से दोनों देशों की न्याय संस्थाएँ और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा न्याय-प्रदान की प्रक्रिया और परिष्कृत बनेगी।
आगे की राह
यह बैठक भारत-रूस न्यायिक संबंधों को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। न्यायपालिका में मानव संसाधन विकास पर ज़ोर देते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्याय संस्थाओं की दीर्घकालिक सफलता अंततः लोगों में निवेश — निरंतर शिक्षा, प्रशिक्षण और पेशेवर विकास — पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स के व्यापक ढाँचे में भारत-रूस न्यायिक सहयोग वैश्विक दक्षिण में कानून के शासन को मज़बूत करने की दृष्टि से दूरगामी महत्त्व रखता है।