सीजेआई जस्टिस सूर्य कांत बोले — 'शांति कानून की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि', जयपुर में मीडिएशन की पुरजोर वकालत
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने 31 जुलाई 2026 को जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 का उद्घाटन करते हुए मध्यस्थता (मीडिएशन) को न्याय-प्रणाली का अनिवार्य स्तंभ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति का अर्थ कानून की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शांति स्वयं कानून की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियों में से एक है।
पुरानी धारणा को चुनौती
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सदियों से यह मान लिया गया था कि कानून का शासन केवल कोर्टरूम में होता है, जबकि शांति बातचीत और समझौते जैसी 'नरम' प्रक्रियाओं से मिलती है। उन्होंने कहा, 'यह कॉन्फ्रेंस उसी पुरानी धारणा को सुधारने की कोशिश करती है।' उनके अनुसार मीडिएशन को अब मुकदमेबाजी के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि कानून के शासन के एक पूरक स्तंभ के रूप में देखा जाना चाहिए।
जयपुर की 'पिंक सिटी' से प्रेरणा
जस्टिस सूर्य कांत ने जयपुर की ऐतिहासिक नगर-योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर तालमेल और सही अनुपात के सिद्धांतों पर बसाया गया था, ताकि कोई भी हिस्सा दूसरे पर हावी न हो। उन्होंने कहा, 'मीडिएशन भी यही सिखाती है — किसी एक की आवाज को दूसरे पर हावी नहीं होने देना चाहिए, चाहे वह कितनी भी ताकतवर क्यों न हो।' उनके अनुसार इस कॉन्फ्रेंस के लिए जयपुर से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता था।
पारंपरिक पंचायत व्यवस्था का संदर्भ
मुख्य न्यायाधीश ने भारत की पारंपरिक पंचायत प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी सफलता इसी में थी कि विवाद समाप्त होने के बाद भी सभी पक्षों को एक साथ रहना होता था। उन्होंने कहा, 'शांति की असली परीक्षा यह नहीं कि कागज पर समझौता हुआ या नहीं — असली परीक्षा यह है कि क्या अगले दिन सुबह पड़ोसी एक साथ बैठकर चाय पी सकते हैं।'
अदालत और मीडिएशन — प्रतिद्वंद्वी नहीं, पूरक
जस्टिस सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि अदालतें और मध्यस्थता एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं। उनके शब्दों में, 'अदालतें निश्चितता और नजीर देती हैं, जबकि मीडिएशन लोगों को अंतिम फैसले की नौबत आने से पहले ही अपनी कहानी का अंत खुद लिखने का मौका देती है।' उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता ने न्याय-प्रणाली में अपनी सही जगह बना ली है और इसे अदालती कार्यवाही से कमतर नहीं समझा जाना चाहिए।
जयपुर डिक्लेरेशन की अहमियत
सीजेआई ने पीस मीडिएशन पर प्रस्तावित जयपुर डिक्लेरेशन को पूरे कॉमनवेल्थ में कानूनी पेशेवरों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका बनाने का आह्वान किया। यह घोषणा-पत्र कॉमनवेल्थ देशों में शांति-मध्यस्थता को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस घोषणा-पत्र को सदस्य देश किस हद तक अपनी न्याय-प्रणालियों में लागू करते हैं।