1 अगस्त 2026
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सीजेआई जस्टिस सूर्य कांत बोले — 'शांति कानून की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि', जयपुर में मीडिएशन की पुरजोर वकालत

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सीजेआई जस्टिस सूर्य कांत बोले — 'शांति कानून की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि', जयपुर में मीडिएशन की पुरजोर वकालत

सारांश

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने जयपुर में कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 में मीडिएशन को कानून के शासन का पूरक स्तंभ बताया — यह सदियों पुरानी उस धारणा को सीधी चुनौती है जो न्याय को केवल कोर्टरूम तक सीमित मानती आई है।

मुख्य बातें

सीजेआई जस्टिस सूर्य कांत ने 31 जुलाई 2026 को जयपुर में कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि शांति कानून की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियों में से एक है — यह कानून की अनुपस्थिति नहीं।
मीडिएशन को मुकदमेबाजी के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि कानून के शासन के पूरक स्तंभ के रूप में देखने का आह्वान किया।
अदालतों और मध्यस्थता को प्रतिद्वंद्वी नहीं, पूरक बताया — अदालतें निश्चितता देती हैं, मीडिएशन स्वायत्त समाधान।
पूरे कॉमनवेल्थ में कानूनी पेशेवरों के लिए जयपुर डिक्लेरेशन को व्यावहारिक मार्गदर्शिका बनाने का आह्वान।

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने 31 जुलाई 2026 को जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 का उद्घाटन करते हुए मध्यस्थता (मीडिएशन) को न्याय-प्रणाली का अनिवार्य स्तंभ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति का अर्थ कानून की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शांति स्वयं कानून की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियों में से एक है।

पुरानी धारणा को चुनौती

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सदियों से यह मान लिया गया था कि कानून का शासन केवल कोर्टरूम में होता है, जबकि शांति बातचीत और समझौते जैसी 'नरम' प्रक्रियाओं से मिलती है। उन्होंने कहा, 'यह कॉन्फ्रेंस उसी पुरानी धारणा को सुधारने की कोशिश करती है।' उनके अनुसार मीडिएशन को अब मुकदमेबाजी के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि कानून के शासन के एक पूरक स्तंभ के रूप में देखा जाना चाहिए।

जयपुर की 'पिंक सिटी' से प्रेरणा

जस्टिस सूर्य कांत ने जयपुर की ऐतिहासिक नगर-योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर तालमेल और सही अनुपात के सिद्धांतों पर बसाया गया था, ताकि कोई भी हिस्सा दूसरे पर हावी न हो। उन्होंने कहा, 'मीडिएशन भी यही सिखाती है — किसी एक की आवाज को दूसरे पर हावी नहीं होने देना चाहिए, चाहे वह कितनी भी ताकतवर क्यों न हो।' उनके अनुसार इस कॉन्फ्रेंस के लिए जयपुर से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता था।

पारंपरिक पंचायत व्यवस्था का संदर्भ

मुख्य न्यायाधीश ने भारत की पारंपरिक पंचायत प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी सफलता इसी में थी कि विवाद समाप्त होने के बाद भी सभी पक्षों को एक साथ रहना होता था। उन्होंने कहा, 'शांति की असली परीक्षा यह नहीं कि कागज पर समझौता हुआ या नहीं — असली परीक्षा यह है कि क्या अगले दिन सुबह पड़ोसी एक साथ बैठकर चाय पी सकते हैं।'

अदालत और मीडिएशन — प्रतिद्वंद्वी नहीं, पूरक

जस्टिस सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि अदालतें और मध्यस्थता एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं। उनके शब्दों में, 'अदालतें निश्चितता और नजीर देती हैं, जबकि मीडिएशन लोगों को अंतिम फैसले की नौबत आने से पहले ही अपनी कहानी का अंत खुद लिखने का मौका देती है।' उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता ने न्याय-प्रणाली में अपनी सही जगह बना ली है और इसे अदालती कार्यवाही से कमतर नहीं समझा जाना चाहिए।

जयपुर डिक्लेरेशन की अहमियत

सीजेआई ने पीस मीडिएशन पर प्रस्तावित जयपुर डिक्लेरेशन को पूरे कॉमनवेल्थ में कानूनी पेशेवरों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका बनाने का आह्वान किया। यह घोषणा-पत्र कॉमनवेल्थ देशों में शांति-मध्यस्थता को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस घोषणा-पत्र को सदस्य देश किस हद तक अपनी न्याय-प्रणालियों में लागू करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत दिशा का संकेत है। असली सवाल यह है कि जयपुर डिक्लेरेशन कागज पर रहेगा या कॉमनवेल्थ देशों की न्याय-प्रणालियों में संस्थागत बदलाव लाएगा। भारत में 2023 का मध्यस्थता अधिनियम पहले से मौजूद है, लेकिन जागरूकता और क्रियान्वयन की खाई अभी पाटी नहीं गई है। बिना बाध्यकारी ढाँचे और जवाबदेही तंत्र के, यह घोषणा भी उन अच्छे इरादों की सूची में जुड़ने का जोखिम उठाती है जो व्यवहार में रूपांतरित नहीं हो पाते।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 क्या है?
यह जयपुर में 31 जुलाई 2026 को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है जिसका उद्देश्य कॉमनवेल्थ देशों में शांति-मध्यस्थता को न्याय-प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाना है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने इसका उद्घाटन किया।
सीजेआई सूर्य कांत ने मीडिएशन को क्यों महत्त्वपूर्ण बताया?
उन्होंने कहा कि मीडिएशन मुकदमेबाजी का विकल्प नहीं, बल्कि कानून के शासन का पूरक स्तंभ है। यह लोगों को अंतिम फैसले की नौबत आने से पहले अपनी कहानी का अंत खुद लिखने का अवसर देती है।
जयपुर डिक्लेरेशन क्या है और इसका महत्त्व क्या है?
जयपुर डिक्लेरेशन पीस मीडिएशन पर प्रस्तावित एक घोषणा-पत्र है जिसे पूरे कॉमनवेल्थ में कानूनी पेशेवरों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका बनाने का लक्ष्य है। सीजेआई ने इसे कॉमनवेल्थ देशों में मध्यस्थता को संस्थागत रूप देने की दिशा में अहम कदम बताया।
अदालत और मीडिएशन में क्या फर्क है?
जस्टिस सूर्य कांत के अनुसार अदालतें निश्चितता और कानूनी नजीर देती हैं, जबकि मीडिएशन पक्षकारों को स्वयं समाधान तक पहुँचने का अवसर देती है। दोनों प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
पारंपरिक पंचायत व्यवस्था और मीडिएशन में क्या समानता है?
सीजेआई ने कहा कि पंचायत व्यवस्था की सफलता इसलिए थी क्योंकि विवाद के बाद भी सभी पक्षों को साथ रहना होता था — शांति की असली परीक्षा कागजी समझौता नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव की बहाली है। आधुनिक मीडिएशन भी इसी सिद्धांत पर काम करती है।
राष्ट्र प्रेस
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