जादवपुर विश्वविद्यालय में 'राष्ट्र-विरोधी' गतिविधियाँ बंद होंगी, CM सुवेंदु अधिकारी का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 22 अगस्त 2026 को शनिवार शाम स्पष्ट किया कि वे दक्षिण कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) में कथित राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाएँगे और वहाँ राष्ट्रवाद की भावना को 'हर कीमत पर' स्थापित करेंगे। यह बयान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में अन्नपूर्णा योजना के एक कार्यक्रम के दौरान दिया।
मुख्यमंत्री की मुख्य आपत्तियाँ
अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर की कई स्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ वंदे मातरम नहीं गाने दिया जाता, राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाता और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को परिसर में प्रवेश से रोका जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने दिए जाते। उन्होंने कहा, 'लेकिन हम जादवपुर के अंदर और बाहर राष्ट्रवाद स्थापित करेंगे।'
झड़पों का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच हुई दो झड़पों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इन घटनाओं को लेकर राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आलोचना करने वालों पर तीखा हमला बोला।
सरकार का रुख
अधिकारी ने कहा कि जो लोग इस राज्य में रहना चाहते हैं उन्हें वंदे मातरम गाना होगा — यह उनका 'अंतिम निर्णय' है। उन्होंने 'कश्मीर माँगे आज़ादी' जैसे नारे लगाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा, 'देशभक्ति, राष्ट्रवाद और राज्य के साथ कोई समझौता नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया का एक वर्ग चाहे 26 जनवरी या 15 अगस्त न मनाने वालों के प्रति सहानुभूति दिखाए, राज्य सरकार अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी।
वैचारिक संदर्भ
अधिकारी ने यह भी कहा कि वर्तमान राज्य सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है और पारंपरिक संस्कृति तथा राष्ट्रवाद के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि जादवपुर विश्वविद्यालय देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और वहाँ छात्र राजनीति लंबे समय से सक्रिय रही है।
आगे क्या
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएँ तेज़ होने की संभावना है। विपक्षी दलों और शैक्षणिक स्वायत्तता के समर्थकों की ओर से इस पर आलोचना आने की उम्मीद है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार जादवपुर विश्वविद्यालय में अपने घोषित लक्ष्यों को किस प्रशासनिक तंत्र के ज़रिये लागू करती है।