23 अगस्त 2026
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जादवपुर विश्वविद्यालय में 'राष्ट्र-विरोधी' गतिविधियाँ बंद होंगी, CM सुवेंदु अधिकारी का संकल्प

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जादवपुर विश्वविद्यालय में 'राष्ट्र-विरोधी' गतिविधियाँ बंद होंगी, CM सुवेंदु अधिकारी का संकल्प

सारांश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय में वंदे मातरम न गाने, राष्ट्रीय ध्वज न फहराने और सीसीटीवी न लगने देने का हवाला देते हुए 'हर कीमत पर' राष्ट्रवाद स्थापित करने का संकल्प लिया — और कहा कि इस राज्य में रहना है तो वंदे मातरम गाना होगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 22 अगस्त 2026 को जादवपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ समाप्त करने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि JU में वंदे मातरम नहीं गाया जाता, राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाता और सीसीटीवी नहीं लगने दिए जाते।
SFI और ABVP के बीच हुई दो झड़पों का उन्होंने विशेष उल्लेख किया।
अधिकारी ने कहा — 'इस राज्य में रहना है तो वंदे मातरम गाना होगा, यही अंतिम निर्णय है।' उन्होंने इस सरकार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार करने वाली बताया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 22 अगस्त 2026 को शनिवार शाम स्पष्ट किया कि वे दक्षिण कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) में कथित राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाएँगे और वहाँ राष्ट्रवाद की भावना को 'हर कीमत पर' स्थापित करेंगे। यह बयान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में अन्नपूर्णा योजना के एक कार्यक्रम के दौरान दिया।

मुख्यमंत्री की मुख्य आपत्तियाँ

अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर की कई स्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ वंदे मातरम नहीं गाने दिया जाता, राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाता और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को परिसर में प्रवेश से रोका जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने दिए जाते। उन्होंने कहा, 'लेकिन हम जादवपुर के अंदर और बाहर राष्ट्रवाद स्थापित करेंगे।'

झड़पों का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच हुई दो झड़पों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इन घटनाओं को लेकर राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आलोचना करने वालों पर तीखा हमला बोला।

सरकार का रुख

अधिकारी ने कहा कि जो लोग इस राज्य में रहना चाहते हैं उन्हें वंदे मातरम गाना होगा — यह उनका 'अंतिम निर्णय' है। उन्होंने 'कश्मीर माँगे आज़ादी' जैसे नारे लगाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा, 'देशभक्ति, राष्ट्रवाद और राज्य के साथ कोई समझौता नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया का एक वर्ग चाहे 26 जनवरी या 15 अगस्त न मनाने वालों के प्रति सहानुभूति दिखाए, राज्य सरकार अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी।

वैचारिक संदर्भ

अधिकारी ने यह भी कहा कि वर्तमान राज्य सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है और पारंपरिक संस्कृति तथा राष्ट्रवाद के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि जादवपुर विश्वविद्यालय देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और वहाँ छात्र राजनीति लंबे समय से सक्रिय रही है।

आगे क्या

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएँ तेज़ होने की संभावना है। विपक्षी दलों और शैक्षणिक स्वायत्तता के समर्थकों की ओर से इस पर आलोचना आने की उम्मीद है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार जादवपुर विश्वविद्यालय में अपने घोषित लक्ष्यों को किस प्रशासनिक तंत्र के ज़रिये लागू करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपनी स्वतंत्र छात्र राजनीति के लिए जाने जाते हैं, अक्सर इस तनाव के केंद्र में रहे हैं। 'वंदे मातरम अनिवार्य' जैसी भाषा कानूनी रूप से जटिल है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय पहले स्पष्ट कर चुका है कि राष्ट्रगान का गायन बाध्यकारी नहीं बनाया जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह बयान प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा में पहला कदम है या चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति — इसका उत्तर आने वाले हफ्तों में सामने आएगा।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि JU में वंदे मातरम नहीं गाया जाता, राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाता और सीसीटीवी नहीं लगने दिए जाते — और वे इन सब स्थितियों को बदलकर 'हर कीमत पर' राष्ट्रवाद स्थापित करेंगे। यह बयान उन्होंने 22 अगस्त 2026 को भवानीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान दिया।
जादवपुर विश्वविद्यालय में SFI और ABVP के बीच झड़पें क्यों हुईं?
मुख्यमंत्री ने दो झड़पों का उल्लेख किया जो SFI (CPM का छात्र संगठन) और ABVP के बीच हुईं, हालाँकि उन्होंने विस्तृत कारण नहीं बताए। इन्हीं झड़पों को लेकर सोशल मीडिया पर राज्य सरकार की आलोचना हो रही थी, जिस पर अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
क्या पश्चिम बंगाल सरकार वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर सकती है?
यह कानूनी रूप से विवादास्पद प्रश्न है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रहने वालों को वंदे मातरम गाना होगा, लेकिन इसे किस तंत्र से लागू किया जाएगा, इसका कोई विवरण नहीं दिया गया। शैक्षणिक स्वायत्तता और मौलिक अधिकारों के संदर्भ में यह मुद्दा न्यायिक जाँच के दायरे में आ सकता है।
अधिकारी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उल्लेख क्यों किया?
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार BJP के वैचारिक पुरखे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार करने के लिए बनी है। यह बयान उनके राष्ट्रवादी एजेंडे को एक ऐतिहासिक-वैचारिक आधार देने का प्रयास है।
इस बयान का जादवपुर विश्वविद्यालय पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि सरकार CCTV लगाने, ध्वजारोहण अनिवार्य करने और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की परिसर में पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाती है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के साथ टकराव की स्थिति बन सकती है। विपक्षी दलों और शैक्षणिक स्वायत्तता के समर्थकों की प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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