जादवपुर यूनिवर्सिटी विवाद: देशविरोधी नारे मिटाए गए, दिलीप घोष की चेतावनी — दोबारा लिखा तो होगी कानूनी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 31 अगस्त 2026 को न्यूटाउन में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर कथित तौर पर लिखे गए देशविरोधी नारों की पहचान कर उन्हें मिटा दिया गया है। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कोई दोबारा इस तरह के नारे लिखने की कोशिश करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
जादवपुर यूनिवर्सिटी में कथित देशविरोधी नारे लिखे जाने को लेकर विवाद गहराने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया। मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल में दीवारों पर राजनीतिक विचार और नारे लिखने की पुरानी परंपरा रही है और लोकतांत्रिक ढंग से काम करने वाले संगठन इस माध्यम से अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी यूनिवर्सिटी या अन्य सार्वजनिक स्थान पर देश के विरुद्ध आवाज उठाना या नारे लिखना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।
सरकार की चेतावनी
घोष ने कहा, 'लोकतंत्र में लोगों को अपने विचार रखने और नारे लगाने की इजाज़त होनी चाहिए — बंगाल में यह परंपरा रही है। जो देशविरोधी नारा लिखा गया था, उसे मिटा दिया गया है। किसी को भी दोबारा ऐसे नारे लिखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, वरना कानूनी कार्रवाई की जाएगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।
टीएमसी नेताओं पर टिप्पणी
इस अवसर पर दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं पर भी निशाना साधा। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन को पुलिस द्वारा बुलाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ TMC नेताओं को पहले यह लगता था कि वे कानून या अदालतों की परवाह किए बिना कुछ भी कर सकते हैं। उनके अनुसार, ऐसे नेताओं को इस तरह की स्थिति का सामना करना ही पड़ेगा और कानून अपना काम करेगा।
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा कि किसी को भी बाहर जाने से नहीं रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद विधानसभा की बैठकों में शामिल हो रहे हैं और सामान्य रूप से अपने काम कर रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी पर राजनीतिक हमला
दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी पर सीधा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि जो नेता जनता के बीच नहीं जाते और जिनका लोगों से सीधा संपर्क नहीं है, उन्हें स्वाभाविक रूप से जनता के बीच जाने को लेकर भय महसूस हो सकता है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।
आगे क्या होगा
प्रशासन की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर में किसी भी प्रकार के देशविरोधी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह देखना अहम होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठन इस मसले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या राज्य सरकार इस संबंध में कोई औपचारिक दिशानिर्देश जारी करती है।