31 अगस्त 2026
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जादवपुर यूनिवर्सिटी विवाद: देशविरोधी नारे मिटाए गए, दिलीप घोष की चेतावनी — दोबारा लिखा तो होगी कानूनी कार्रवाई

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जादवपुर यूनिवर्सिटी विवाद: देशविरोधी नारे मिटाए गए, दिलीप घोष की चेतावनी — दोबारा लिखा तो होगी कानूनी कार्रवाई

सारांश

जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर कथित देशविरोधी नारे लिखे जाने के बाद पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने सख्त रुख अपनाया — नारे मिटाए गए और दोबारा लिखने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। साथ ही TMC नेताओं पर भी निशाना साधा गया।

मुख्य बातें

जादवपुर यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर लिखे गए देशविरोधी नारों की पहचान कर उन्हें मिटा दिया गया है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 31 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि दोबारा ऐसे नारे लिखने पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन को पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर घोष ने कहा — 'कानून अपना काम करेगा।' घोष ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता जनता से दूर रहते हैं, उन्हें जनता के बीच जाने में डर लगता है।
लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की अनुमति है, लेकिन देशविरोधी नारे किसी भी स्थान पर स्वीकार्य नहीं होंगे — यह घोष का स्पष्ट संदेश।

पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 31 अगस्त 2026 को न्यूटाउन में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर कथित तौर पर लिखे गए देशविरोधी नारों की पहचान कर उन्हें मिटा दिया गया है। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कोई दोबारा इस तरह के नारे लिखने की कोशिश करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

जादवपुर यूनिवर्सिटी में कथित देशविरोधी नारे लिखे जाने को लेकर विवाद गहराने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया। मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल में दीवारों पर राजनीतिक विचार और नारे लिखने की पुरानी परंपरा रही है और लोकतांत्रिक ढंग से काम करने वाले संगठन इस माध्यम से अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी यूनिवर्सिटी या अन्य सार्वजनिक स्थान पर देश के विरुद्ध आवाज उठाना या नारे लिखना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

सरकार की चेतावनी

घोष ने कहा, 'लोकतंत्र में लोगों को अपने विचार रखने और नारे लगाने की इजाज़त होनी चाहिए — बंगाल में यह परंपरा रही है। जो देशविरोधी नारा लिखा गया था, उसे मिटा दिया गया है। किसी को भी दोबारा ऐसे नारे लिखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, वरना कानूनी कार्रवाई की जाएगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।

टीएमसी नेताओं पर टिप्पणी

इस अवसर पर दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं पर भी निशाना साधा। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन को पुलिस द्वारा बुलाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ TMC नेताओं को पहले यह लगता था कि वे कानून या अदालतों की परवाह किए बिना कुछ भी कर सकते हैं। उनके अनुसार, ऐसे नेताओं को इस तरह की स्थिति का सामना करना ही पड़ेगा और कानून अपना काम करेगा।

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा कि किसी को भी बाहर जाने से नहीं रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद विधानसभा की बैठकों में शामिल हो रहे हैं और सामान्य रूप से अपने काम कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी पर राजनीतिक हमला

दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी पर सीधा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि जो नेता जनता के बीच नहीं जाते और जिनका लोगों से सीधा संपर्क नहीं है, उन्हें स्वाभाविक रूप से जनता के बीच जाने को लेकर भय महसूस हो सकता है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।

आगे क्या होगा

प्रशासन की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर में किसी भी प्रकार के देशविरोधी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह देखना अहम होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठन इस मसले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या राज्य सरकार इस संबंध में कोई औपचारिक दिशानिर्देश जारी करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक दबाव का संकेत देता है, जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि किस विशेष कानून के तहत यह कार्रवाई होगी। आलोचकों का कहना है कि परिसर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और 'देशविरोधी' की परिभाषा के बीच की रेखा को सत्तारूढ़ दलों द्वारा अपनी सुविधा से खींचा जाता रहा है। TMC नेताओं पर एक साथ निशाना साधना यह भी दर्शाता है कि यह बयान केवल विश्वविद्यालय नीति नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति का हिस्सा भी है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जादवपुर यूनिवर्सिटी में देशविरोधी नारे विवाद क्या है?
जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर कथित तौर पर देशविरोधी नारे लिखे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने बताया कि इन नारों की पहचान कर उन्हें मिटा दिया गया है और भविष्य में ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
दिलीप घोष ने क्या चेतावनी दी है?
दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि जादवपुर यूनिवर्सिटी या किसी भी स्थान पर देशविरोधी नारे लिखना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई दोबारा ऐसे नारे लिखने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन को पुलिस ने क्यों बुलाया?
स्रोत में इसका विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। दिलीप घोष ने इस प्रसंग में कहा कि कुछ TMC नेताओं को लगता था कि वे कानून की परवाह किए बिना कुछ भी कर सकते हैं, और अब कानून अपना काम कर रहा है।
दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
घोष ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि जो नेता जनता के बीच नहीं जाते और जिनका लोगों से सीधा संपर्क नहीं है, उन्हें जनता के बीच जाने में स्वाभाविक रूप से डर लग सकता है।
क्या पश्चिम बंगाल में दीवार-लेखन की कोई परंपरा है?
हाँ, दिलीप घोष ने स्वयं स्वीकार किया कि बंगाल में दीवारों पर राजनीतिक विचार और नारे लिखने की पुरानी परंपरा रही है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति तक सीमित है — देशविरोधी नारों के लिए नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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