28 अगस्त 2026
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जादवपुर यूनिवर्सिटी में वामपंथी समूहों पर CM सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला, रक्षाबंधन पर लिया संकल्प

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जादवपुर यूनिवर्सिटी में वामपंथी समूहों पर CM सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला, रक्षाबंधन पर लिया संकल्प

सारांश

रक्षाबंधन पर CM सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के वामपंथी छात्र समूहों को सीधे निशाने पर लिया — 'कश्मीर मांगे आजादी' और 'रेड सैल्यूट किशनजी' जैसे नारों को राष्ट्र-विरोधी बताते हुए उन्हें 'घर के कचरे की तरह' बाहर फेंकने का संकल्प लिया। शाम को JU में 10,000 लोगों के साथ वंदे मातरम का आयोजन।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 28 अगस्त को भवानीपुर, दक्षिण कोलकाता में रक्षाबंधन कार्यक्रम में जादवपुर यूनिवर्सिटी के वामपंथी छात्र समूहों पर तीखा हमला बोला।
'कश्मीर मांगे आजादी' और 'रेड सैल्यूट किशनजी' जैसे नारों को उन्होंने राष्ट्र-विरोधी करार दिया।
किशनजी (कोटेश्वर राव) माओवादी नेता थे, जो नवंबर 2011 में पश्चिम बंगाल में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे।
मुख्यमंत्री ने उसी शाम JU में 10,000 लोगों के साथ 'वंदे मातरम' के पूरे संस्करण के गायन कार्यक्रम में भाग लेने की घोषणा की।
इससे पहले अधिकारी ने पुलिसकर्मियों के साथ रक्षाबंधन मनाया और नजरुल मंच पर भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार, 28 अगस्त को जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) में सक्रिय वामपंथी छात्र समूहों पर कड़ा प्रहार किया और विश्वविद्यालय परिसर को 'राष्ट्र-विरोधी ताकतों' से मुक्त कराने का आह्वान किया। दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर में रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।

मुख्यमंत्री के तीखे बोल

मुख्यमंत्री अधिकारी ने भवानीपुर में अपने निर्वाचन क्षेत्र के कार्यक्रम में कहा, 'जब कोलकाता की सड़कों पर आजादी के नारे लगते हैं तो मुझे दुख होता है। आजादी क्या है? देश को बहुत पहले ही आजादी मिल चुकी है।' उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे 'रेड सैल्यूट किशनजी' जैसे नारों पर भी कड़ा एतराज जताया।

अधिकारी ने कहा, 'रक्षाबंधन के इस शुभ अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम उन्हें अपने घर के कचरे की तरह बाहर फेंक देंगे।' उन्होंने 'कश्मीर मांगे आजादी' जैसे नारों को भी सीधे निशाने पर लिया।

किशनजी कौन थे — पृष्ठभूमि

कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी माओवादी संगठन के एक वरिष्ठ नेता थे, जो नवंबर 2011 में पश्चिम बंगाल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें 'भारत के संविधान में अविश्वास रखने वाला व्यक्ति' बताया और कहा कि उनके समर्थन में लिखे नारे युवा पीढ़ी को गुमराह करते हैं।

आंतरिक खतरों पर चेतावनी

मुख्यमंत्री ने देश को भीतर से कमजोर करने की कोशिश करने वालों के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने कहा, 'बाहरी दुश्मनों से निपटने के लिए हमारे पास भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना है। लेकिन देश के अंदर भी कई ऐसे लोग हैं जो देश को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं — हमें उनसे सावधान रहना होगा और उन्हें खत्म करना होगा।'

जेयू में 'वंदे मातरम' कार्यक्रम

अधिकारी ने घोषणा की कि वे उसी दिन शाम को जादवपुर यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहाँ 10,000 लोग मिलकर 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण गाएंगे। इससे पहले उन्होंने दक्षिण कोलकाता के नजरुल मंच पर भी रक्षाबंधन समारोह में हिस्सा लिया और पुलिसकर्मियों के साथ त्योहार मनाया।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब जादवपुर यूनिवर्सिटी लंबे समय से वामपंथी छात्र राजनीति का केंद्र रही है और परिसर में विभिन्न विचारधाराओं के बीच टकराव की घटनाएँ सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को चुनौती देने की रणनीति के तहत विश्वविद्यालय परिसरों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अधिकारी का यह बयान आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसे सीधे निशाना बनाना TMC-शासित राज्य में BJP की 'काउंटर-नैरेटिव' की कोशिश को दर्शाता है। हालाँकि, 'घर के कचरे की तरह बाहर फेंकने' जैसी भाषा विपक्ष को आलोचना का मौका देती है। असली सवाल यह है कि क्या इस तरह के भाषण परिसरों में वास्तविक बदलाव लाते हैं या केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा करते हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी पर क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर 'रेड सैल्यूट किशनजी' जैसे नारे लिखे हैं और परिसर में 'कश्मीर मांगे आजादी' जैसे नारे लगाए जाते हैं। उन्होंने इसे राष्ट्र-विरोधी गतिविधि बताते हुए ऐसी ताकतों को परिसर से बाहर करने का आह्वान किया।
किशनजी कौन थे और उनका उल्लेख क्यों हुआ?
किशनजी का असली नाम कोटेश्वर राव था और वे माओवादी संगठन के एक वरिष्ठ नेता थे। वे नवंबर 2011 में पश्चिम बंगाल में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। अधिकारी ने उनके नाम पर लिखे नारों को संविधान-विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया।
रक्षाबंधन पर जादवपुर यूनिवर्सिटी में क्या कार्यक्रम हुआ?
मुख्यमंत्री अधिकारी ने घोषणा की कि वे शाम को जादवपुर यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे जहाँ 10,000 लोग मिलकर 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण गाएंगे। इससे पहले उन्होंने भवानीपुर और नजरुल मंच पर भी रक्षाबंधन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
अधिकारी ने 'आंतरिक दुश्मनों' के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहरी खतरों से निपटने के लिए भारतीय सेना और वायु सेना है, लेकिन देश को भीतर से कमजोर करने की कोशिश करने वाले लोगों से भी सतर्क रहना होगा। उन्होंने नागरिकों से ऐसे तत्वों को पहचानने और उनका विरोध करने का आग्रह किया।
यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्यों अहम है?
जादवपुर यूनिवर्सिटी पारंपरिक रूप से वामपंथी छात्र राजनीति का केंद्र रही है और TMC-शासित राज्य में BJP के लिए यह एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है। अधिकारी का यह हमला BJP की उस रणनीति को दर्शाता है जो विश्वविद्यालय परिसरों में वैचारिक पकड़ मजबूत करने पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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