वनाग्नि, पेयजल और बिजली पर सीएम धामी की समीक्षा बैठक: 1,000 नए फॉरेस्ट गार्ड और शीतलाखेत मॉडल लागू होगा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 22 मई 2025 को देहरादून में वनाग्नि नियंत्रण, पेयजल व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और मानसून की तैयारियों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए और स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वनाग्नि नियंत्रण: शीतलाखेत मॉडल और 1,000 नई नियुक्तियाँ
मुख्यमंत्री धामी ने वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाने के लिए शीतलाखेत मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि आग की सूचना मिलने के एक घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी मौके पर पहुँचें और रिस्पॉन्स टाइम न्यूनतम रखा जाए। इसके साथ ही वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के भी आदेश दिए गए।
फॉरेस्ट गार्ड की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने 1,000 नई नियुक्तियाँ करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्राम समितियों और वन पंचायतों को वनाग्नि रोकथाम के लिए नियमानुसार आवश्यक बजट उपलब्ध कराने को कहा गया।
पेयजल और बिजली: कालाबाजारी पर सख्ती
गर्मी के मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध पेयजल और बिजली आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने वाटर टैंकरों की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने और चारधाम यात्रा मार्ग, अस्पतालों तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में बैकअप व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।
स्वास्थ्य सेवाएँ: फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए। साथ ही संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अस्पताल अग्निकांड की घटनाएँ सामने आई हैं।
चारधाम यात्रा: स्वास्थ्य स्क्रीनिंग पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा पर जाने वाले जिन श्रद्धालुओं को स्क्रीनिंग टेस्ट में अनफिट पाया जाए, उन्हें यात्रा न करने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति से बचा जा सके। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में चारधाम यात्रा के दौरान हृदयाघात से कई श्रद्धालुओं की मृत्यु हो चुकी है।
सड़क पर नमाज़ और कानून-व्यवस्था
बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री धामी ने सड़क पर नमाज़ पढ़ने को लेकर भी सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सड़कों पर नमाज़ की अनुमति नहीं दी जाएगी और आवागमन तथा कानून-व्यवस्था में अवरोध पैदा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन की भूमि है और यहाँ का माहौल बिगाड़ने का किसी को अधिकार नहीं है।
आने वाले हफ्तों में मानसून पूर्व तैयारियों की स्थिति और वनाग्नि नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की प्रगति रिपोर्ट अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।