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मध्य प्रदेश में धरोहर संरक्षण प्राथमिकता: सीएम मोहन यादव ने बड़वानी में खाटू श्याम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को किया वर्चुअल संबोधन

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मध्य प्रदेश में धरोहर संरक्षण प्राथमिकता: सीएम मोहन यादव ने बड़वानी में खाटू श्याम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को किया वर्चुअल संबोधन

सारांश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़वानी के तलून में खाटू श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को वर्चुअली संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य बताया और धार्मिक पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का माध्यम घोषित किया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जुलाई 2026 को बड़वानी के तलून में खाटू श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और 21 कुंडीय महायज्ञ को भोपाल से वर्चुअली संबोधित किया।
सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है।
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने का साधन बताया गया।
निमाड़ क्षेत्र की संत परंपरा और लोक संस्कृति को राज्य की विरासत का अभिन्न हिस्सा बताया।
बाबा खाटू श्याम को बर्बरीक का स्वरूप और वीरता-समर्पण का प्रतीक बताया गया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और विकास को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में रखती है। मुख्यमंत्री भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से बड़वानी जिले के तलून में आयोजित खाटू श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और 21 कुंडीय महायज्ञ कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य

मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होती है। उनके अनुसार, यह मंदिर राज्य की धार्मिक पर्यटन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा।

निमाड़ की सांस्कृतिक विरासत पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़वानी सहित निमाड़ की धरती संतों, संस्कृति और लोक परंपराओं से सदियों से समृद्ध रही है। उन्होंने भारत की संत परंपरा को समाज की दिशा निर्धारित करने वाला बताते हुए कहा कि संतों के मार्गदर्शन से समाज में सद्भाव, संयम और सेवा की भावना पुष्ट होती है। यादव ने यह भी कहा कि गरीबों, जरूरतमंदों और पीड़ितों की सेवा ही सच्ची भक्ति है और धर्म तथा सेवा के समन्वय से ही समाज प्रगति करता है — यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है।

खाटू श्याम और बर्बरीक का महत्व

मुख्यमंत्री ने इस अवसर को केवल मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि 'श्रद्धा, विश्वास और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का पर्व' बताया। उन्होंने कहा कि बाबा खाटू श्याम को 'हारे का सहारा' कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के दु:ख हरने वाले देवता माने जाते हैं। यादव ने बताया कि बाबा खाटू श्याम को बर्बरीक का स्वरूप माना जाता है, जिन्होंने महाभारत काल में धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया था। उनके अनुसार, यह त्याग भारतीय संस्कृति में वीरता, विनम्रता और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है।

धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास का संगम

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब मध्य प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को स्थानीय आर्थिक विकास के साधन के रूप में प्रोत्साहित कर रही है। गौरतलब है कि राज्य में उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों के विकास के बाद अब निमाड़ क्षेत्र को भी इस नक्शे पर स्थापित करने की कोशिश हो रही है। आने वाले समय में ऐसे और धार्मिक स्थलों के विकास की दिशा में राज्य सरकार के कदम जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस तरह के आयोजनों में सरकारी भागीदारी और धार्मिक-सांस्कृतिक विकास के बीच की रेखा अक्सर धुंधली होती है — और यह सवाल उठता है कि क्या स्थानीय अर्थव्यवस्था को वास्तविक लाभ पहुँच रहा है या यह मुख्यतः राजनीतिक संदेश है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जुलाई को किस कार्यक्रम को संबोधित किया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जुलाई 2026 को बड़वानी जिले के तलून में खाटू श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और 21 कुंडीय महायज्ञ कार्यक्रम को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित किया।
मध्य प्रदेश सरकार धार्मिक धरोहरों के संरक्षण पर क्यों जोर दे रही है?
सीएम मोहन यादव के अनुसार, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों को पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित कर रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है।
बाबा खाटू श्याम को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि बाबा खाटू श्याम को 'हारे का सहारा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों के दु:ख हरने वाले देवता माने जाते हैं। उन्हें बर्बरीक का स्वरूप माना जाता है, जिन्होंने महाभारत में धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश अर्पित किया था।
निमाड़ क्षेत्र का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, बड़वानी सहित निमाड़ की धरती संतों, संस्कृति और लोक परंपराओं से सदियों से समृद्ध रही है। यह क्षेत्र भारतीय संत परंपरा और सामाजिक सद्भाव का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
क्या मध्य प्रदेश में अन्य धार्मिक स्थलों का भी विकास हो रहा है?
हाँ, मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों के विकास के बाद अब निमाड़ क्षेत्र को भी धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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