केरल CM वीडी सतीशन ने कोच्चि मर्सिडीज दुर्घटना पीड़ित परिवार से मुलाकात की, न्याय का दिलाया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को कोच्चि के चेरानेल्लूर में हुई घातक मर्सिडीज-बेंज कार दुर्घटना में जान गँवाने वाले जयाबालकृष्णन के परिवार से उनके घर जाकर मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने परिजनों को सांत्वना दी और कानूनी लड़ाई में सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
दुर्घटना का घटनाक्रम
कोच्चि के समीप चेरानेल्लूर में एक 17 वर्षीय नाबालिग द्वारा चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार ने जयाबालकृष्णन के स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। यह मामला तब और अधिक संवेदनशील हो गया जब परिवार ने आरोप लगाया कि नाबालिग आरोपी के पिता, जो एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हैं, ने दुर्घटना के बाद अहम सबूत नष्ट करने की कोशिश की।
पीड़ित परिवार का दावा है कि दुर्घटना के तुरंत बाद आरोपी के पिता और उनका परिवार एक अन्य वाहन से घटनास्थल पर पहुँच गए थे, और उनके अनुसार यह बात आसपास के सीसीटीवी फुटेज से साबित होगी। परिवार का आरोप है कि न्यायाधीश का जल्दी पहुँचना सबूतों को नष्ट करने के इरादे से था।
मुख्यमंत्री की मुलाकात और सरकार का रुख
मुख्यमंत्री सतीशन ने पीड़ित परिवार के घर पहुँचकर उनसे मुलाकात की और मामले की प्रगति की समीक्षा की। परिवार ने इस दौरान एक औपचारिक शिकायत मुख्यमंत्री को सौंपी, जिसमें न्यायाधीश पिता द्वारा सबूत नष्ट करने के कथित प्रयास का उल्लेख था। सतीशन ने आश्वासन दिया कि सरकार परिवार की कानूनी लड़ाई में हर कदम पर साथ खड़ी रहेगी।
जयाबालकृष्णन की बेटी भद्रकीर्ति ने मीडिया को बताया कि परिवार ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी चिंताएँ और मुकदमा लड़ने में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयाँ रखीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार के वकील श्रीजीत आगे भी उनका पक्ष रखते रहेंगे और अदालत के निर्णय के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अदालत की नाबालिग की पहचान पर कड़ी आपत्ति
एर्नाकुलम सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को नाबालिग आरोपी की पहचान सार्वजनिक होने पर कड़ी आपत्ति जताई। यह मामला तब उठा जब राज्य सरकार और पीड़ित परिवार दोनों की ओर से नाबालिग की जमानत रद्द करने के लिए अलग-अलग याचिकाएँ दायर की गईं।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में आए किसी बच्चे का पूरा नाम और घर का पता सार्वजनिक करना किशोर न्याय अधिनियम (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) का उल्लंघन है। अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि याचिकाओं में किशोर का नाम हटाकर उसकी जगह 'नाबालिग आरोपी' जैसी पहचान का उपयोग किया जाए।
अदालत ने अभियोजन पक्ष और पीड़ित परिवार के वकील को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कानूनी कार्यवाही के दौरान किशोर की पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी सामने न आए।
आगे की सुनवाई
इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई शनिवार को निर्धारित है। गौरतलब है कि यह मामला न केवल एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि इसमें न्यायपालिका के एक सदस्य की संलिप्तता के आरोपों ने इसे केरल में व्यापक सामाजिक और कानूनी बहस का विषय बना दिया है। न्याय की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक ध्यान खींचने की संभावना है।