राहुल गांधी समेत 5 विपक्षी सांसदों के खिलाफ जमुई अदालत में शिकायत, संसद में प्रदर्शन पर विवाद
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और चार अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ जमुई सिविल कोर्ट में एक औपचारिक शिकायत दायर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर के भीतर किए गए एक नाटकीय विरोध प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं और संसद की संवैधानिक गरिमा को ठेस पहुँची है। यह मामला 6 अगस्त को जमुई के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के समक्ष दर्ज किया गया है।
शिकायत में किन सांसदों के नाम हैं
जमुई सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन द्वारा दायर इस शिकायत में पाँच सांसदों को नामजद किया गया है। इनमें राहुल गांधी (लोकसभा में विपक्ष के नेता), राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (पूर्णिया, निर्दलीय सांसद), अवधेश प्रसाद (फैजाबाद, समाजवादी पार्टी), रुचि वीरा (मुरादाबाद, समाजवादी पार्टी) और धर्मेंद्र यादव (आजमगढ़, समाजवादी पार्टी) शामिल हैं। अदालत द्वारा सुनवाई की तारीख तय किए जाने की उम्मीद है।
संसद में क्या हुआ था
विरोध प्रदर्शन राम मंदिर के दान में कथित दुरुपयोग के आरोपों को लेकर किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव पुजारी के वेश में संसद परिसर में दान पेटी लेकर बैठे, जबकि राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी सांसदों को दान पेटी में प्रतीकात्मक रूप से पैसे डालते देखा गया। प्रदर्शन का समापन पप्पू यादव के दान पेटी लेकर जाने के साथ हुआ, जो विपक्ष के आरोपों का प्रतीकात्मक चित्रण था।
शिकायतकर्ता के आरोप
शिकायतकर्ता राजीव रंजन ने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन केवल प्रचार पाने के उद्देश्य से किया गया, जबकि मूल मुद्दा पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय और एक विशेष जाँच दल (SIT) की निगरानी में था। उनका कहना है कि इस प्रदर्शन ने सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया और संवैधानिक महत्व की एक संस्था की गरिमा को नुकसान पहुँचाया। रंजन के अनुसार, उन्हें यह प्रदर्शन व्यक्तिगत और सामाजिक — दोनों स्तरों पर आपत्तिजनक लगा।
मामले की वर्तमान स्थिति
शिकायत में लगाए गए सभी आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और मामला फिलहाल जमुई अदालत में लंबित है। गौरतलब है कि यह शिकायत एक निजी अधिवक्ता द्वारा दायर की गई है और अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। यह ऐसे समय में आई है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है।
आगे क्या होगा
जमुई CJM अदालत अब यह तय करेगी कि शिकायत पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। यदि अदालत मामले में संज्ञान लेती है, तो नामजद सांसदों को नोटिस जारी किया जा सकता है। विपक्षी दलों की ओर से इस शिकायत पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।