कांग्रेस बैठक में पेपर लीक, परिसीमन और राम मंदिर चढ़ावे पर मंथन; तीन अहम प्रस्ताव पारित
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की 20 अगस्त को नई दिल्ली में हुई ऑफ-ब्रीफिंग बैठक में पेपर लीक, शिक्षा के निजीकरण, परिसीमन, जातिगत जनगणना, भारत-चीन संबंध और राम मंदिर चढ़ावा विवाद सहित कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने बैठक के बाद मीडिया को जानकारी दी।
पेपर लीक पर केंद्र-राज्य समन्वय की चुनौती
बैठक में पेपर लीक की समस्या पर गहन विचार-विमर्श हुआ। जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर राज्यों के अपने-अपने कानून हैं और केंद्र का अलग कानून है। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों स्तरों के बीच समन्वय स्थापित किए बिना परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं आ सकती। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा अनियमितताओं को लेकर छात्रों में व्यापक रोष देखा गया है।
राहुल गांधी ने उठाया शिक्षा निजीकरण का मुद्दा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बैठक में सरकारी स्कूलों के बंद होने और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर विशेषज्ञों की राय ली जाए और पार्टी की आगामी रणनीति तय की जाए। इसी क्रम में पार्टी ने घोषणा की कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम देशभर के 400 स्थानों पर आयोजित किया जाएगा — न केवल बड़े महानगरों में, बल्कि छोटे कस्बों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी। राहुल गांधी सभी स्थानों पर नहीं जाएंगे; विभिन्न वरिष्ठ नेता अलग-अलग कार्यक्रमों का नेतृत्व करेंगे।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर करीब 40 मिनट की चर्चा
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर बैठक में करीब 30-40 मिनट तक विचार-विमर्श हुआ और सभी वक्ताओं ने अपनी राय रखी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पहले ही इस मुद्दे पर विरोध दर्ज करा चुकी है। अब पार्टी ने हर राज्य में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस ने इस मामले की जाँच सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश से कराने की माँग की है, हालाँकि पार्टी की कार्यसमिति (CWC) के एक वरिष्ठ वकील सदस्य ने यह भी कहा कि जाँच किसी निष्पक्ष न्यायाधीश से होनी चाहिए।
परिसीमन पर तीन अहम प्रस्ताव
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस ने तीन स्पष्ट रुख अपनाए हैं। पहला — लोकसभा की मौजूदा 545 सीटों को 25 वर्षों तक फ्रीज किया जाए। दूसरा — सभी राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या यथावत बनाए रखी जाए। तीसरा — महिला आरक्षण को 2029 के आम चुनाव से लागू किया जाए। पार्टी का मानना है कि परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन बिंदुओं पर स्पष्टता अनिवार्य है। गौरतलब है कि दक्षिणी राज्यों में परिसीमन को लेकर लंबे समय से आशंका बनी हुई है कि इससे उनकी संसदीय प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है।
जातिगत जनगणना और भारत-चीन संबंध भी एजेंडे पर
बैठक में जातिगत जनगणना पर पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो वादा किया था, वह पूरा नहीं हो रहा है और मौजूदा तरीके से जनगणना कराने से अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। भारत-चीन संबंधों पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। पार्टी ने संकेत दिया कि इन सभी मुद्दों पर आगामी हफ्तों में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।