10 अगस्त 2026
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कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह का पार्टी नेतृत्व पर हमला, बिहार हार और अल्पसंख्यक छवि पर उठाए सवाल

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कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह का पार्टी नेतृत्व पर हमला, बिहार हार और अल्पसंख्यक छवि पर उठाए सवाल

सारांश

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा — बिहार की हार के लिए गैर-राजनीतिक नियुक्तियों को दोषी ठहराया और चेतावनी दी कि 'अल्पसंख्यकों की पार्टी' की धारणा कांग्रेस के हिंदू जनाधार को खोखला कर रही है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने 23 जून को पार्टी की आंतरिक रणनीति पर सार्वजनिक रूप से कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि शाहनवाज आलम के एआईसीसी सचिव बनने के बाद उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया गया, जो पार्टी के पतन का मोड़ था।
सिंह ने असम में 18-20 सीटों तक सिमटने का उदाहरण देते हुए गलत चुनावी गणित की आलोचना की।
उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस को 'अल्पसंख्यकों की पार्टी' के रूप में पेश किए जाने की धारणा पूरे भारत में फैलाई जा रही है।
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इन बयानों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने मंगलवार, 23 जून को अपनी ही पार्टी की आंतरिक रणनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बिहार में कांग्रेस के लगातार खराब चुनावी प्रदर्शन को नेतृत्व के गलत निर्णयों से सीधे जोड़ा और चेतावनी दी कि पार्टी को अल्पसंख्यक-केंद्रित दल के रूप में देखे जाने की बढ़ती धारणा उसके व्यापक जनाधार को कमज़ोर कर रही है।

बिहार में पतन और नेतृत्व की भूमिका

कभी बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अखिलेश सिंह ने कहा कि उन्हें पद से हटाए जाने का निर्णय पार्टी के पतन में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने कहा, 'मैं उस समय बिहार का अध्यक्ष था। शाहनवाज आलम एआईसीसी सचिव बने और उन्होंने सबसे पहले मुझे पद से हटा दिया। अगर मैं उस पद पर बना रहता, तो कांग्रेस सिर्फ पाँच या छह सीटों तक सीमित नहीं रहती।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमज़ोर होती जा रही है और पार्टी के भीतर संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर असंतोष की आवाज़ें उठती रही हैं।

गैर-राजनीतिक नियुक्तियों पर निराशा

खुद को एक अनुभवी जनप्रतिनिधि बताते हुए सिंह ने कहा कि बिहार की राजनीतिक जटिलताओं की समझ उन लोगों से कहीं बेहतर है जिन्हें अचानक महत्वपूर्ण भूमिकाओं में बिठा दिया जाता है। उन्होंने कहा, 'सलमान साहब मुझे अच्छी तरह जानते हैं। वे राज्यों को समझते हैं। लेकिन बिहार की बागडोर उन लोगों को सौंप दी जाती है जिनका जनता की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होता।'

गौरतलब है कि कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर राज्य इकाइयों और केंद्रीय नेतृत्व के बीच तनाव पहले भी सामने आता रहा है। अखिलेश सिंह की यह टिप्पणी उसी असंतोष की ताज़ा अभिव्यक्ति मानी जा रही है।

अल्पसंख्यक छवि पर गंभीर चेतावनी

सिंह ने केरल और असम के उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी ने चुनावी गणित में गलत अनुमान लगाया, जिसके परिणामस्वरूप भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा, 'हम सोच भी नहीं सकते थे कि असम में अल्पसंख्यक 30 से कम सीटें हार सकते हैं। स्थिति ऐसी हो गई कि हमारे पास केवल 18-20 सीटें बचीं, और उनमें से भी 18 कांग्रेस की थीं।'

उन्होंने आगाह किया कि देशभर में एक खतरनाक धारणा गढ़ी जा रही है। उनके अनुसार, 'यह धारणा बनाई जा रही है कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों की पार्टी है। हिंदू उन्हें न तो ले सकते हैं और न ही दे सकते हैं। अगर पश्चिम बंगाल में कोई सीट जीतता है, तो उसे अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के रूप में पेश किया जाता है। यह धारणा पूरे भारत में फैलाई जा रही है।'

आंतरिक असंतोष का व्यापक संदर्भ

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक रूप से पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए हों। आलोचकों का कहना है कि पार्टी के भीतर असंतोष की यह आवाज़ें संगठनात्मक सुधार की ज़रूरत को रेखांकित करती हैं। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अखिलेश सिंह के बयानों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे की राह

अखिलेश प्रसाद सिंह के इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर बहस तेज़ होने की संभावना है। बिहार में पार्टी की पुनर्स्थापना की कोशिशों के बीच इस तरह के सार्वजनिक मतभेद पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे सार्वजनिक मतभेद बढ़ते ही रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश प्रसाद सिंह ने कांग्रेस की आलोचना किस बात पर की?
उन्होंने बिहार में पार्टी के खराब चुनावी प्रदर्शन के लिए नेतृत्व के गलत फैसलों को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि गैर-राजनीतिक व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाना पार्टी के लिए नुकसानदेह रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बिहार अध्यक्ष पद से हटाना एक बड़ी भूल थी।
अखिलेश सिंह ने शाहनवाज आलम का ज़िक्र क्यों किया?
उन्होंने कहा कि शाहनवाज आलम के एआईसीसी सचिव बनने के बाद सबसे पहले उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया गया, जो उनके अनुसार पार्टी के बिहार में पतन का निर्णायक मोड़ था।
कांग्रेस की 'अल्पसंख्यक पार्टी' वाली धारणा क्या है और यह क्यों चिंताजनक है?
अखिलेश सिंह के अनुसार, देशभर में यह धारणा फैलाई जा रही है कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों की पार्टी है, जिससे हिंदू मतदाता पार्टी से दूर हो रहे हैं। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जीती गई सीटों को भी अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के रूप में पेश किया जाता है, जो पार्टी की व्यापक छवि को नुकसान पहुँचाता है।
असम में कांग्रेस की स्थिति पर सिंह ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि असम में पार्टी का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि केवल 18-20 सीटें बचीं, जबकि उम्मीद कहीं अधिक थी। उन्होंने इसे गलत चुनावी गणित और रणनीतिक चूक का परिणाम बताया।
कांग्रेस नेतृत्व ने अखिलेश सिंह के बयानों पर क्या कहा?
अभी तक कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह बयान पार्टी के भीतर संगठनात्मक असंतोष की एक ताज़ा कड़ी माने जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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