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कांग्रेस को अल्पसंख्यकों की पार्टी बताने का नैरेटिव बन रहा है: सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह का बड़ा बयान

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कांग्रेस को अल्पसंख्यकों की पार्टी बताने का नैरेटिव बन रहा है: सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह का बड़ा बयान

सारांश

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने खुलकर कहा — बिहार अध्यक्ष पद से हटाया गया तो पार्टी पाँच-छह सीटों पर सिमट गई। साथ ही उन्होंने चेताया कि देशभर में कांग्रेस को अल्पसंख्यकों की पार्टी साबित करने का नैरेटिव जानबूझकर तैयार किया जा रहा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने 23 जून को बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए आंतरिक निर्णयों को ज़िम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने के बाद पार्टी पाँच-छह सीटों तक सीमित रह गई।
एआईसीसी में गैर-राजनीतिक लोगों को राज्यों का प्रभारी बनाए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
असम में परिसीमन के ज़रिये अल्पसंख्यक सीटें 30 से घटाकर 18-20 तक सीमित किए जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने चेताया कि पूरे देश में कांग्रेस को अल्पसंख्यकों की पार्टी बताने का नैरेटिव जानबूझकर बनाया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने मंगलवार, 23 जून को नई दिल्ली में पार्टी की आंतरिक रणनीति पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन की जड़ें संगठनात्मक निर्णयों में हैं — खासकर उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद पार्टी की स्थिति लगातार कमज़ोर होती गई।

बिहार में हार की वजह: अखिलेश प्रसाद सिंह का पक्ष

अखिलेश प्रसाद सिंह ने सीधे शब्दों में कहा, 'मैं उस समय बिहार का अध्यक्ष था। शाहनवाज आलम एआईसीसी सेक्रेटरी बन गए और उन्होंने सबसे पहला काम मुझे पद से हटाने का किया। उसके बाद जो नतीजे आए, वे खुद सब कुछ बयां करते हैं। अगर मैं उस पद पर बना रहता, तो कांग्रेस सिर्फ पाँच-छह सीटों तक सीमित नहीं रहती।' यह बयान पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष की एक और परत उजागर करता है।

गैर-राजनीतिक प्रभारियों पर निशाना

सांसद ने खुद को 'सियासी अखाड़े का आदमी' बताते हुए कहा, 'मैं बिहार को अच्छी तरह समझता हूँ। हम बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों को समझते हैं। लेकिन जिन लोगों का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें बिहार का प्रभारी बना दिया जाता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सही राजनीतिक अनुभव रखने वाले नेताओं को ज़िम्मेदारी दी जाती तो परिणाम भिन्न होते।

अल्पसंख्यक नैरेटिव पर चिंता

अखिलेश प्रसाद सिंह ने कांग्रेस की छवि को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'एक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों की पार्टी है — हिंदुओं से इनका लेना-देना नहीं है। पश्चिम बंगाल में जो सीटें जीती हैं, उनमें अल्पसंख्यक बिरादरी के लोग जीते हैं। पूरे हिंदुस्तान में ऐसी नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है।' उनके अनुसार यह धारणा पार्टी के व्यापक जनाधार को नुकसान पहुँचा रही है।

असम में परिसीमन और अल्पसंख्यक सीटों का मुद्दा

सांसद ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के ज़रिये अल्पसंख्यक समुदाय की सीटें 30 से घटाकर 18-20 तक सीमित कर दी गईं। उन्होंने कहा कि इनमें से 18 सीटें कांग्रेस के खाते में आईं — जो यह दर्शाता है कि पार्टी की जीत का दायरा संकुचित होता जा रहा है। केरल का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को रोका नहीं जा सका, इसीलिए समुदाय को उचित स्थान मिल सका।

आगे क्या

अखिलेश प्रसाद सिंह के इन बयानों ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक सुधार की बहस को फिर से तेज़ कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी कई राज्यों में अपनी ज़मीन मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि वरिष्ठ नेताओं का इस तरह खुलकर बोलना पार्टी नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि आंतरिक असंतोष को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि यह 'नैरेटिव' बाहर से नहीं, पार्टी के भीतर के निर्णयों से ही पोषित हो रहा है। बिना संगठनात्मक सुधार के, 2029 की राह और संकरी होती जाएगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश प्रसाद सिंह ने बिहार में कांग्रेस की हार के लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया?
उन्होंने कहा कि उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और वह पाँच-छह सीटों तक सिमट गई। साथ ही गैर-राजनीतिक लोगों को राज्यों का प्रभारी बनाए जाने को भी उन्होंने नुकसानदेह बताया।
कांग्रेस को अल्पसंख्यकों की पार्टी बताने वाला नैरेटिव क्या है?
अखिलेश प्रसाद सिंह के अनुसार, देशभर में यह धारणा जानबूझकर बनाई जा रही है कि कांग्रेस केवल अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है और हिंदू मतदाताओं से उसका कोई सरोकार नहीं। पश्चिम बंगाल में जीती सीटों के उदाहरण से उन्होंने इस नैरेटिव को रेखांकित किया।
असम में परिसीमन से कांग्रेस पर क्या असर पड़ा?
सांसद के अनुसार, परिसीमन के ज़रिये असम में अल्पसंख्यक समुदाय की सीटें 30 से घटाकर 18-20 तक सीमित कर दी गईं। इनमें से 18 सीटें कांग्रेस के खाते में आईं, जो पार्टी के सिकुड़ते जनाधार का संकेत है।
शाहनवाज आलम का इस विवाद में क्या संदर्भ है?
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि शाहनवाज आलम के एआईसीसी सेक्रेटरी बनने के बाद उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया गया। उनका आरोप है कि इसी निर्णय के बाद बिहार में पार्टी का प्रदर्शन लगातार गिरता गया।
क्या कांग्रेस नेतृत्व ने अखिलेश प्रसाद सिंह के बयान पर कोई प्रतिक्रिया दी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभी तक कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला पार्टी के भीतर संगठनात्मक सुधार की बहस को नई धार दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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