क्रूड ऑयल गिरावट को 'विंडफॉल' नहीं, विकसित भारत 2047 का अवसर मानें: भाजपा नेता गौरव वल्लभ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता गौरव वल्लभ ने 30 जून 2025 को कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई मौजूदा गिरावट को महज एक 'विंडफॉल' समझना गलत होगा। उनके अनुसार, इस अवसर का रणनीतिक उपयोग विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए किया जाना चाहिए। वल्लभ ने साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देश में 'भयंकर आर्थिक सुनामी' आने की आशंका को भी सिरे से खारिज किया।
चार स्तंभों पर टिकी रणनीति
गौरव वल्लभ ने कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी का लाभ चार प्रमुख क्षेत्रों में लगाया जाना चाहिए। पहला — रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Reserves) को बढ़ाना और जो भंडार कम हुए हैं, उन्हें पुनः भरना। दूसरा — पश्चिम एशिया संकट के कारण अस्थायी रूप से कमज़ोर हुई रुपये की स्थिरता को उसके मूल स्तर पर वापस लाना।
तीसरा — देश की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (Export Competitiveness) को बढ़ाना, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मुख्यतः घरेलू खपत पर आधारित है और अगली छलांग के लिए उत्पादन लागत घटाना ज़रूरी है। चौथा — राजकोषीय विश्वसनीयता (Fiscal Credibility) बनाए रखना, चाहे वह राजकोषीय घाटे के लक्ष्य हों या मुद्रास्फीति नियंत्रण के।
विकसित भारत 2047 से सीधा जोड़
वल्लभ ने स्पष्ट किया कि क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी को अगले 10-12 वर्षों की आर्थिक नींव मज़बूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अवसर 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, यदि इसे रणनीतिक रूप से इन चारों स्तंभों पर केंद्रित किया जाए।
गौरतलब है कि वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट ने भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राजकोषीय राहत का द्वार खोला है। भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात से पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर व्यापार घाटे, मुद्रास्फीति और राजकोषीय स्थिति पर पड़ता है।
राहुल गांधी के बयान पर तीखा पलटवार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देश में 'भयंकर आर्थिक सुनामी' आने की आशंका जताए जाने पर वल्लभ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी के पास इस दावे का कोई ठोस शोध-आधार है।
वल्लभ ने कहा कि राहुल गांधी वही नेता हैं जिन्होंने संसद में दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को 'डेड इकॉनमी' कहा था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद जब दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम दोगुने से ढाई गुना तक बढ़े, भारत में यह वृद्धि केवल 7 से 8 प्रतिशत के बीच रही — फिर भी राहुल गांधी ने सवाल उठाए। वल्लभ ने यह भी कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 680 अरब डॉलर पर बना हुआ है, जिस पर भी राहुल गांधी ने आपत्ति जताई थी।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती पर ज़ोर
वल्लभ ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था लचीली और मज़बूत है। उनके अनुसार, भारत आज भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि उच्च विकास दर और नियंत्रित मुद्रास्फीति किसी भी अर्थशास्त्री की नज़र में एक मज़बूत अर्थव्यवस्था की पहचान है, न कि 'सुनामी' की।
वल्लभ के इस बयान ने एक बार फिर सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी कांग्रेस के बीच आर्थिक नीति को लेकर जारी राजनीतिक बहस को तेज़ कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार क्रूड ऑयल की गिरावट से मिली राहत को किस हद तक दीर्घकालिक नीतिगत लाभ में बदल पाती है।