चक्रवात 'अर्णब': NDRF की 39 टीमें तैनात, आंध्र प्रदेश में 3 की मौत, विशाखापत्तनम में 300mm बारिश
सारांश
मुख्य बातें
चक्रवात अर्णब के तटीय इलाकों से टकराने की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने 28 अक्टूबर 2026 को अपनी तैयारियाँ चरम पर पहुँचा दी हैं। NDRF के डीआईजी एसएस सूदन ने बताया कि आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सहित विभिन्न राज्यों में कुल 39 टीमें राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तैनात कर दी गई हैं। राज्य के आपदा नियंत्रण केंद्रों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, आंध्र प्रदेश में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 16 टीमें तैनात की गई हैं, जो सर्वाधिक प्रभावित ज़िलों में राहत कार्य संभाल रही हैं। विशाखापत्तनम क्षेत्र में पिछले एक दिन में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जो असाधारण रूप से भारी मानी जाती है। कई स्थानों पर बिजली एवं संचार खंभे उखड़ने की सूचना मिली है, और दूरसंचार व्यवस्था बाधित होने से राहत समन्वय में कठिनाई आ रही है।
डीआईजी सूदन ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में संचार लाइनें बहाल करने का काम तेज़ी से जारी है। संबंधित एजेंसियों से लगातार सूचनाएँ एकत्र कर स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
रिजर्व और एयरलिफ्ट की तैयारी
तैनात 39 टीमों के अतिरिक्त 10 रिजर्व टीमें ओडिशा और तमिलनाडु सहित संबंधित स्थानों पर सतर्क अवस्था में रखी गई हैं। इसके अलावा 12 अतिरिक्त रिजर्व टीमें तीन अलग-अलग स्थानों पर तैयार हैं, जिन्हें यदि ज़रूरत पड़े तो हवाई मार्ग से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचाया जा सकता है।
डीआईजी सूदन ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी राज्य सरकार अतिरिक्त सहायता की माँग करती है, तो NDRF तत्काल प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह तैयार है। चक्रवात की गति और तीव्रता के अनुसार टीमों की पुनर्तैनाती भी की जा सकती है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि विशाखापत्तनम और तटीय आंध्र के कई ज़िले पहले से ही मानसून के कारण जलभराव से जूझ रहे थे। 300 मिमी से अधिक की एकल-दिवसीय वर्षा ने निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और गहरा कर दिया है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से हज़ारों घर अंधेरे में हैं और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर-नवंबर का मौसम ऐतिहासिक रूप से चक्रवाती गतिविधि के लिए सबसे संवेदनशील रहा है। पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में कई विनाशकारी चक्रवात — 'हुदहुद' (2014) और 'तितली' (2018) — आ चुके हैं।
NDRF की प्राथमिकता और रणनीति
डीआईजी एसएस सूदन ने कहा कि NDRF की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में समय पर पहुँचकर राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करना है। टीमें अपने निर्धारित क्षेत्रों में तैनात रहकर स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर रही हैं।
स्थिति की निगरानी 24 घंटे जारी है और राज्यों के राज्य आपदा नियंत्रण केंद्रों (SCOC) से लगातार अपडेट प्राप्त किए जा रहे हैं। आने वाले घंटों में चक्रवात के कमज़ोर पड़ने या दिशा बदलने की स्थिति में रणनीति में बदलाव किया जाएगा।