देबाशीष सामंतराय के इस्तीफे पर BJD का पलटवार: लेनिन मोहंती बोले — निजी स्वार्थ और कारोबारी दबाव में लिया फैसला
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (BJD) के प्रवक्ता डॉ. लेनिन मोहंती ने 25 मई 2025 को भुवनेश्वर में राज्यसभा सदस्य देबाशीष सामंतराय के इस्तीफे को 'व्यक्तिगत स्वार्थ और कारोबारी दबाव' का परिणाम बताया। मोहंती ने कहा कि जिस पार्टी ने सामंतराय को राजनीतिक पहचान दी, उसे इस तरह छोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस्तीफे पर BJD की प्रतिक्रिया
डॉ. मोहंती ने बताया कि देबाशीष सामंतराय ने BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक को अपना इस्तीफा भेजा है, जिसमें उन्होंने पार्टी में खुद को अपमानित और नीचा दिखाए जाने का आरोप लगाया है। मोहंती ने इस दावे को 'हैरान करने वाला' करार देते हुए कहा कि पार्टी ने सामंतराय को लगातार पाँच बार चुनाव लड़ने का अवसर दिया।
पार्टी का योगदान और सामंतराय का सफर
BJD प्रवक्ता ने विस्तार से बताया कि देबाशीष सामंतराय ने पार्टी के टिकट पर तीन विधानसभा चुनाव जीते और दो में हार का सामना किया, फिर भी पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा। बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया और संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ भी सौंपी गईं। मोहंती के अनुसार, यह स्पष्ट करता है कि पार्टी ने कभी उनके साथ भेदभाव नहीं किया।
राजनीतिक प्रवृत्ति पर चिंता
मोहंती ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में एक राजनीतिक प्रवृत्ति देखने को मिली है, जिसमें कुछ नेता किसी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा पहुँचने के बाद दूसरी पार्टियों में चले जाते हैं। बिना सीधे नाम लिए उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे कई नेता बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लेते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक बताया।
ईंधन मूल्य वृद्धि पर केंद्र सरकार पर निशाना
डॉ. मोहंती ने इस्तीफे के मुद्दे के साथ-साथ केंद्र सरकार पर बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और कमर्शियल गैस की कीमतों में कई बार वृद्धि हुई है, जिससे आम जनता और व्यापारिक वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
मोहंती ने सरकार से वैट में कटौती की माँग करते हुए कहा कि यदि करों में कमी की जाए तो लोगों को प्रति लीटर ₹10 से ₹14 तक की राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।
BJD पर असर और आगे की राह
मोहंती ने स्पष्ट किया कि सामंतराय के जाने से BJD को कोई बड़ा संगठनात्मक नुकसान नहीं होगा, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में सामंतराय को इस फैसले पर पछताना पड़ सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आई है जब ओडिशा में BJD विपक्ष की भूमिका में अपनी पुनर्संरचना कर रही है।