ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव: चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी, 8 जून तक नामांकन, 18 जून को मतदान
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 1 जून 2025 को ओडिशा की रिक्त राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी, जिसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया उसी दिन से शुरू हो गई। यह सीट बीजू जनता दल (BJD) के पूर्व सांसद देबाशीष सामंतराय के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी।
चुनावी कार्यक्रम
भुवनेश्वर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओडिशा विधानसभा सचिव सत्यब्रत राउत ने पूरे कार्यक्रम की जानकारी दी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को होगी। उम्मीदवार 11 जून तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं।
यदि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 18 जून को मतदान होगा। मतगणना भी आवश्यकता पड़ने पर उसी दिन संपन्न की जाएगी।
रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति
उपचुनाव की निगरानी के लिए साहू को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। विधानसभा सचिवालय के एक अन्य अधिकारी को सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सामंतराय के इस्तीफे की पृष्ठभूमि
अप्रैल 2024 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित देबाशीष सामंतराय ने 25 मई को उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंपा। अन्यथा उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलता। इस्तीफे से एक दिन पहले, 25 मई को ही, उन्होंने BJD प्रमुख नवीन पटनायक को पत्र लिखकर पार्टी के भीतर लगातार हो रही उपेक्षा का हवाला देते हुए प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया।
पार्टी छोड़ने के ठीक अगले दिन, 26 मई को, सामंतराय नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए। गौरतलब है कि तीन बार विधायक रह चुके सामंतराय 2000–2004, 2009–2014 और 2014–2019 के दौरान टिरटोल और बाराबती-कटक निर्वाचन क्षेत्रों से ओडिशा विधानसभा में पहुँचे थे।
BJD पर असर
सामंतराय BJD के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं, इसलिए उनका जाना पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में BJD की सदस्य संख्या घटकर पाँच रह गई है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में BJP से सत्ता गँवाने के बाद पहले से ही दबाव में है।
आगे क्या
अब सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि BJP, BJD और कांग्रेस इस सीट पर किसे उम्मीदवार बनाती हैं। राज्यसभा उपचुनाव में विधायक मतदाता होते हैं, और ओडिशा विधानसभा में BJP के पास बहुमत को देखते हुए सत्तारूढ़ दल का पलड़ा भारी माना जा रहा है।