योगी सरकार ने दीपावली से पहले बढ़ाई न्यूनतम मजदूरी, 74 नियोजनों में वीडीए की नई दरें 1 अक्टूबर से लागू
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 अक्टूबर 2026 को दीपावली से ठीक पहले श्रमिकों के लिए बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के 74 अनुसूचित नियोजनों में परिवर्तनीय महंगाई भत्ते (वीडीए) की संशोधित दरें लागू कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में श्रम विभाग द्वारा 21 अक्टूबर 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार ये दरें 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी।
संशोधन का आधार क्या है
श्रम विभाग के शासनादेश के अनुसार, यह संशोधन जनवरी से जून 2026 की अवधि के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के औसत 431 अंकों के आधार पर किया गया है। पहले निर्धारित 400 अंकों के आधार स्तर से ऊपर सूचकांक में हुई वृद्धि को ध्यान में रखते हुए महंगाई भत्ते की गणना की गई है।
इसका उद्देश्य बढ़ती महंगाई के अनुरूप अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रमिकों की क्रय शक्ति को बनाए रखना है। न्यूनतम मासिक मजदूरी में कुल ₹174.25 से लेकर ₹238.39 तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
क्षेत्रवार नई दरें
गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी ₹13,690 से बढ़ाकर ₹13,883.59, अर्धकुशल श्रमिकों की ₹15,059 से बढ़ाकर ₹15,271.41 और कुशल श्रमिकों की ₹16,868 से बढ़ाकर ₹17,106.39 कर दी गई है। इन श्रेणियों में मासिक अतिरिक्त लाभ क्रमशः ₹193.59, ₹212.41 और ₹238.39 होगा।
नगर निगम वाले अन्य जनपदों में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी ₹13,006 से बढ़ाकर ₹13,189.68, अर्धकुशल की ₹14,306 से ₹14,507.46 और कुशल की ₹16,025 से ₹16,250.86 की गई है। इस वर्ग के श्रमिकों को ₹183.68 से ₹225.86 तक का अतिरिक्त मासिक लाभ मिलेगा।
प्रदेश के शेष जनपदों में अकुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी ₹12,356 से बढ़कर ₹12,530.25, अर्धकुशल की ₹13,590 से ₹13,782.30 और कुशल की ₹15,224 से ₹15,438.42 हो गई है। यहाँ मासिक वृद्धि ₹174.25 से ₹214.42 के बीच है।
किन श्रमिकों को मिलेगा लाभ
यह संशोधन औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत अकुशल, अर्धकुशल एवं कुशल — तीनों श्रेणियों के श्रमिकों पर लागू होगा। न्यूनतम मजदूरी की दैनिक दर मासिक दर के 1/26 के अनुपात में निर्धारित की जाएगी।
गौरतलब है कि जिन कर्मचारियों को पहले से निर्धारित दरों से अधिक मजदूरी मिल रही है, उनके पारिश्रमिक में कोई कटौती नहीं होगी — उन्हें पुरानी अधिक दर पर भुगतान जारी रहेगा।
नियोजकों पर जिम्मेदारी
श्रम विभाग ने संबंधित नियोजकों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निर्देश दिया है कि वे श्रमिक की कुशलता की श्रेणी और जनपद के अनुसार लागू नई न्यूनतम दरों पर भुगतान सुनिश्चित करें। आलोचक यह सवाल उठाते रहे हैं कि न्यूनतम मजदूरी के अनुपालन की निगरानी ग्रामीण और असंगठित क्षेत्रों में एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन में श्रमिकों पर महंगाई का बोझ अधिक होता है और यह संशोधन उनकी वास्तविक क्रय शक्ति को कुछ हद तक सहारा देने का प्रयास करता है। आगे की समीक्षा अप्रैल 2027 से नई अवधि के लिए अपेक्षित होगी।