दीपोत्सव 2026: अयोध्या में 15 से अधिक राज्यों के लोक कलाकार, मयूर से छऊ तक बिखरेंगे रंग
सारांश
मुख्य बातें
दीपोत्सव 2026 में अयोध्या की सड़कें और सांस्कृतिक मंच देश की विविध लोक परंपराओं से सजेंगे, जब उत्तर प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों और पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात सहित कई राज्यों के लोक कलाकार अपनी पारंपरिक विधाएँ प्रस्तुत करेंगे। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस बारे में विस्तृत जानकारी दी। रामनगरी में दीपों की रोशनी के बीच यह सांस्कृतिक संगम भारतीय एकता और विविधता का जीवंत दर्पण बनेगा।
उत्तर प्रदेश के जिलों की लोक विधाएँ
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, प्रदेश के कलाकार दलों में मथुरा का मयूर और बम रसिया नृत्य, प्रयागराज का ढेढ़िया नृत्य, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल-सिंघा और करमा नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। अयोध्या के कलाकार बधावा, फरुवाही तथा डमरू एवं शंख नृत्य की प्रस्तुति देंगे।
इसके अतिरिक्त गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झाँसी का राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी दर्शकों के समक्ष अपनी लोक परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा। आजमगढ़ के कलाकार धोबिया नृत्य और प्रयागराज के कलाकार कबीरी गायन के साथ शोभायात्रा को जीवंत बनाएंगे।
देशभर के राज्यों की सांस्कृतिक भागीदारी
पश्चिम बंगाल के कलाकार श्री खोल, ओडिशा के कलाकार मास्क डांस, शाही जात्रा, रणप्पा चढैय्या और शंख वादन की प्रस्तुति देंगे। झारखंड का पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा और गुजरात का तलवार रास भी दर्शकों को अपनी ओर खींचेगा।
राजस्थान का घूमर-चरी, बिहार की झिझिया, चेन्नई की कावड़ी, कड़गम व मयूर नृत्य तथा आंध्र प्रदेश का बोनालू भी दीपोत्सव की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अभिन्न हिस्सा होंगे। इन विविध लोक विधाओं के जरिए दर्शकों को देश की अलग-अलग परंपराओं, वेशभूषा, संगीत और नृत्य शैलियों से परिचित होने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।
शोभायात्रा में लोककला की छटा
दीपोत्सव की शोभायात्रा में भी लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से उत्सव को विशेष रंग देंगे। इसमें प्रयागराज का ढेढ़िया नृत्य, मथुरा का मयूर नृत्य, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल एवं सिंघा नृत्य और अयोध्या का बधावा नृत्य शामिल रहेगा।
गौरतलब है कि शोभायात्रा में लोक प्रदर्शनियाँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं — ये अपने-अपने क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान की जीती-जागती अभिव्यक्ति हैं। मयूर, करमा, राई, धोबिया, थारू और छऊ जैसी विधाएँ अपने समुदायों की सदियों पुरानी परंपराओं की संवाहक हैं।
प्रशासन का उद्देश्य और आधिकारिक बयान
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में दीपों की रोशनी के साथ लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं की छटा भी रामनगरी को खास पहचान देगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और देश के अनेक राज्यों से आने वाले कलाकार अयोध्या को सांस्कृतिक संगम का स्वरूप देंगे।
आयोजकों के अनुसार, लोक कलाकारों की भागीदारी का एक प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक कला रूपों को मंच देना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। अभिजात ने जोड़ा कि लोक प्रस्तुतियों के जरिए दीपोत्सव भारतीय संस्कृति की विविधता, परंपरा और आपसी एकता का संदेश भी प्रसारित करेगा।
आगे की तैयारियाँ
यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या लगातार बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों का केंद्र बनती जा रही है। दीपोत्सव का यह संस्करण देश की सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर समेटने का प्रयास है, जो राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में अयोध्या की उभरती पहचान को और पुख्ता करेगा।