4 नवंबर 2026
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पटना: रिश्वत लेकर नशे के आरोपियों को छोड़ने पर फुलवारीशरीफ थाने के 8 पुलिसकर्मी निलंबित

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पटना: रिश्वत लेकर नशे के आरोपियों को छोड़ने पर फुलवारीशरीफ थाने के 8 पुलिसकर्मी निलंबित

सारांश

पटना के फुलवारीशरीफ थाने में नशे के मामले के दो संदिग्धों को रिश्वत लेकर छोड़ने का आरोप। रकम के बँटवारे पर पुलिसकर्मियों में आपस में ही झगड़ा हुआ, तब जाकर मामला उजागर हुआ। आठ पुलिसकर्मी निलंबित, FIR दर्ज।

मुख्य बातें

फुलवारीशरीफ थाने के 8 पुलिसकर्मी 4 नवंबर 2026 को निलंबित किए गए।
26 अक्टूबर 2026 की छापेमारी में आकिब खान उर्फ मो.
साकिब खान को NDPS एक्ट व आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था।
एहसान को कथित तौर पर मोटी रकम लेकर पीआर बॉन्ड पर रिहा किया गया।
रकम के बँटवारे पर पुलिसकर्मियों में आपसी विवाद से मामला वरीय अधिकारियों के संज्ञान में आया।
आरोपी पुलिसकर्मियों में दिवाकर प्रसाद , नारद मुनी सिंह , रितेश कुमार , आकाश कुमार , पवन कुमार सहित तीन अन्य शामिल।
सहायक पुलिस अधीक्षक, फुलवारीशरीफ विभागीय जाँच कर रहे हैं; कुछ स्थानीय लोगों की संलिप्तता की भी जाँच जारी।

पटना के फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में मादक पदार्थ के एक मामले में कथित तौर पर मोटी रकम लेकर दो संदिग्धों को छोड़ने के आरोप में आठ पुलिसकर्मियों को 4 नवंबर 2026 को निलंबित कर दिया गया है। पटना नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) के कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय जाँच भी आरंभ कर दी गई है।

मूल घटनाक्रम

26 अक्टूबर 2026 को फुलवारीशरीफ थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री के संदेह में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में आकिब खान उर्फ मो. साकिब खान (32) को नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया। उनके विरुद्ध फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 के अंतर्गत NDPS एक्ट और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

छापेमारी के दौरान आकिब के साथ मो. आफताब आलम और मो. एहसान को भी हिरासत में लेकर थाने लाया गया था। हालाँकि, आरोप है कि इन दोनों के नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किए गए और वरीय अधिकारियों को भी इसकी सूचना नहीं दी गई।

रिश्वत और आपसी विवाद से खुला मामला

अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी दल में शामिल पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने कथित तौर पर मो. आफताब आलम और मो. एहसान से मोटी रकम लेकर उन्हें पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया। इसके बाद रकम के बँटवारे को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच ही कहासुनी और विवाद उत्पन्न हो गया, जिससे मामला वरीय अधिकारियों के संज्ञान में आया।

गौरतलब है कि यह मामला आंतरिक असंतोष के कारण सामने आया, न कि किसी बाहरी शिकायत से — जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के ऐसे मामले अक्सर कितनी देर से उजागर होते हैं।

आरोपी पुलिसकर्मी

प्रथम दृष्टया जाँच में फुलवारीशरीफ थाने के पाँच पुलिस अवर निरीक्षकों सहित तीन पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। आरोपी पुलिस पदाधिकारियों में दिवाकर प्रसाद, नारद मुनी सिंह, रितेश कुमार, आकाश कुमार और पवन कुमार के नाम शामिल हैं। इनके अलावा तीन अन्य पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है।

जाँच की स्थिति

सहायक पुलिस अधीक्षक, फुलवारीशरीफ इस मामले की विभागीय जाँच कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसकी अलग से पड़ताल की जा रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार पुलिस पहले से ही जवाबदेही को लेकर दबाव में है।

आगे क्या होगा

विभागीय जाँच पूरी होने के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक और आपराधिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई संभव है। प्राथमिकी दर्ज होने से यह मामला केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा — न्यायिक प्रक्रिया भी समानांतर चलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पुलिस की आंतरिक जवाबदेही व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है — मामला इसलिए उजागर नहीं हुआ क्योंकि कोई बाहरी शिकायतकर्ता था, बल्कि इसलिए कि पुलिसकर्मी खुद रकम के बँटवारे पर लड़ पड़े। बिहार में नशा-विरोधी अभियानों की विश्वसनीयता पर इस तरह की घटनाएँ गहरा प्रश्नचिह्न लगाती हैं। यह भी विचारणीय है कि ऐसे कितने मामले बिना किसी आंतरिक विवाद के दबे रह जाते हैं। विभागीय जाँच के साथ-साथ इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए संरचनात्मक निगरानी तंत्र की भी आवश्यकता है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में आठ पुलिसकर्मी क्यों निलंबित किए गए?
फुलवारीशरीफ थाने के इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने नशे के एक मामले में पकड़े गए दो संदिग्धों — मो. आफताब आलम और मो. एहसान — को कथित तौर पर मोटी रकम लेकर पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया और उनके नाम FIR में दर्ज नहीं किए। मामला वरीय अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद 4 नवंबर 2026 को सभी आठ को निलंबित किया गया।
फुलवारीशरीफ थाने की यह घटना कब और कैसे सामने आई?
26 अक्टूबर 2026 को हुई छापेमारी के बाद रकम के बँटवारे को लेकर आरोपी पुलिसकर्मियों के बीच आपसी कहासुनी हुई, जिससे मामला वरीय अधिकारियों तक पहुँचा। यह घटना किसी बाहरी शिकायत से नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के आंतरिक विवाद से उजागर हुई।
इस मामले में कौन-से पुलिस अधिकारी निलंबित हुए हैं?
निलंबित पुलिसकर्मियों में पुलिस अवर निरीक्षक दिवाकर प्रसाद, नारद मुनी सिंह, रितेश कुमार, आकाश कुमार और पवन कुमार सहित तीन अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। कुल आठ पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की गई है।
मूल नशा मामले में किसे गिरफ्तार किया गया था?
आकिब खान उर्फ मो. साकिब खान (उम्र 32 वर्ष) को 26 अक्टूबर 2026 को फुलवारीशरीफ में मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ NDPS एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
आगे इस मामले में क्या होगा?
सहायक पुलिस अधीक्षक, फुलवारीशरीफ विभागीय जाँच कर रहे हैं और कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका की भी पड़ताल जारी है। FIR दर्ज होने से आपराधिक कार्रवाई भी समानांतर चलेगी और दोषी पाए जाने पर विभागीय व न्यायिक दोनों स्तरों पर कठोर कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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