पटना: रिश्वत लेकर नशे के आरोपियों को छोड़ने पर फुलवारीशरीफ थाने के 8 पुलिसकर्मी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
पटना के फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में मादक पदार्थ के एक मामले में कथित तौर पर मोटी रकम लेकर दो संदिग्धों को छोड़ने के आरोप में आठ पुलिसकर्मियों को 4 नवंबर 2026 को निलंबित कर दिया गया है। पटना नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) के कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय जाँच भी आरंभ कर दी गई है।
मूल घटनाक्रम
26 अक्टूबर 2026 को फुलवारीशरीफ थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री के संदेह में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में आकिब खान उर्फ मो. साकिब खान (32) को नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया। उनके विरुद्ध फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 के अंतर्गत NDPS एक्ट और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
छापेमारी के दौरान आकिब के साथ मो. आफताब आलम और मो. एहसान को भी हिरासत में लेकर थाने लाया गया था। हालाँकि, आरोप है कि इन दोनों के नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किए गए और वरीय अधिकारियों को भी इसकी सूचना नहीं दी गई।
रिश्वत और आपसी विवाद से खुला मामला
अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी दल में शामिल पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने कथित तौर पर मो. आफताब आलम और मो. एहसान से मोटी रकम लेकर उन्हें पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया। इसके बाद रकम के बँटवारे को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच ही कहासुनी और विवाद उत्पन्न हो गया, जिससे मामला वरीय अधिकारियों के संज्ञान में आया।
गौरतलब है कि यह मामला आंतरिक असंतोष के कारण सामने आया, न कि किसी बाहरी शिकायत से — जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के ऐसे मामले अक्सर कितनी देर से उजागर होते हैं।
आरोपी पुलिसकर्मी
प्रथम दृष्टया जाँच में फुलवारीशरीफ थाने के पाँच पुलिस अवर निरीक्षकों सहित तीन पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। आरोपी पुलिस पदाधिकारियों में दिवाकर प्रसाद, नारद मुनी सिंह, रितेश कुमार, आकाश कुमार और पवन कुमार के नाम शामिल हैं। इनके अलावा तीन अन्य पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है।
जाँच की स्थिति
सहायक पुलिस अधीक्षक, फुलवारीशरीफ इस मामले की विभागीय जाँच कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसकी अलग से पड़ताल की जा रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार पुलिस पहले से ही जवाबदेही को लेकर दबाव में है।
आगे क्या होगा
विभागीय जाँच पूरी होने के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक और आपराधिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई संभव है। प्राथमिकी दर्ज होने से यह मामला केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा — न्यायिक प्रक्रिया भी समानांतर चलेगी।