देहिंग पटकाई में 165 तितली प्रजातियाँ, 37 लुप्तप्राय: हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया संरक्षण का गढ़
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 25 अगस्त को देहिंग पटकाई को राज्य की दुर्लभ और लुप्तप्राय तितली प्रजातियों का सबसे सुरक्षित प्राकृतिक आश्रय स्थल घोषित किया। उन्होंने बताया कि इस जैव-विविधता संपन्न क्षेत्र में तितलियों की 165 दर्ज प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 37 प्रजातियाँ लुप्तप्राय श्रेणी में आती हैं।
मुख्यमंत्री का संदेश और एक्स पोस्ट
मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "तितली, उड़ जा..." — इस संक्षिप्त संदेश के ज़रिये उन्होंने देहिंग पटकाई की असाधारण पारिस्थितिक समृद्धि और वहाँ के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा की अनिवार्यता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संरक्षण के चल रहे प्रयासों से एक ऐसा समृद्ध आवास निर्मित हो रहा है, "जहाँ दुर्लभ प्रजातियाँ फल-फूल सकें।"
देहिंग पटकाई की जैव-विविधता का महत्व
असम के पूर्वी छोर पर स्थित देहिंग पटकाई अपने घने उष्णकटिबंधीय वनों और वन्यजीव-समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पहचाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तितलियाँ किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण जैव-संकेतक होती हैं — उनकी आबादी वनस्पति की स्थिति, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और प्राकृतिक आवासों की समग्र सेहत को दर्शाती है। इस क्षेत्र में 165 प्रजातियों की पहचान इसकी पारिस्थितिक परिपक्वता का प्रमाण है।
गौरतलब है कि 37 लुप्तप्राय प्रजातियों की उपस्थिति इस क्षेत्र को केवल एक वन्यजीव स्थल नहीं, बल्कि एक जीवित संरक्षण प्रयोगशाला बनाती है। तितलियों के आवास की रक्षा से पौधों की परागण-प्रक्रिया सुनिश्चित होती है, जिससे उसी पारिस्थितिक माहौल पर निर्भर अनेक अन्य प्रजातियों को भी जीवन-आधार मिलता है।
असम में संरक्षण की व्यापक पहल
मुख्यमंत्री सरमा का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब असम सरकार जैव-विविधता संरक्षण और वन संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन पर विशेष ज़ोर दे रही है। हाल के वर्षों में राज्य ने वन क्षेत्रों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने और प्राकृतिक आवासों के पारिस्थितिक महत्व के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं।
यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब पूर्वोत्तर भारत के वन क्षेत्रों पर विकास परियोजनाओं और जलवायु परिवर्तन का दोहरा दबाव बढ़ रहा है। देहिंग पटकाई को संरक्षित रखना इस संदर्भ में असम की प्राकृतिक विरासत की रक्षा की बड़ी रणनीति का अभिन्न हिस्सा है।
आगे की राह
देहिंग पटकाई में तितलियों की 165 प्रजातियों की वैज्ञानिक पहचान इस क्षेत्र के संरक्षण की नीतिगत प्राथमिकता को और पुख्ता करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के दस्तावेज़ीकरण से न केवल नीति-निर्माताओं को दिशा मिलती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संस्थाओं से सहयोग और वित्त-पोषण के रास्ते भी खुलते हैं। देहिंग पटकाई का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि घोषणाएँ ज़मीनी संरक्षण कार्रवाई में कितनी तेज़ी से तब्दील होती हैं।