दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तोड़ा इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट, 5 गिरफ्तार; ₹12 करोड़ की हेरोइन-MDMA बरामद
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज-I ने 8 अगस्त 2026 को दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया — जिनमें 2 नाइजीरियाई, 1 घाना का नागरिक और 2 भारतीय शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 2.554 किलोग्राम हेरोइन, 881 ग्राम एमडीएमए और 11 मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाज़ार कीमत लगभग ₹12 करोड़ बताई जा रही है। यह कार्रवाई 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत की गई।
मुख्य घटनाक्रम
ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब क्राइम ब्रांच को पक्की सूचना मिली कि मोरिस ओकाली (52 वर्ष, नाइजीरियाई नागरिक, निवासी चंदर विहार, निलोथी, दिल्ली) 19/20 जुलाई की रात दिल्ली के शाहदरा स्थित एक अस्पताल के पास नशीले पदार्थों की खेप पहुँचाने वाला है। इंस्पेक्टर लिछमन की अगुवाई में रेडिंग टीम ने उक्त स्थान पर रणनीतिक तैनाती की और मोरिस ओकाली को दबोचा। उसके बैग से 2.004 किलोग्राम हेरोइन और 863 ग्राम एमडीएमए बरामद हुई — दोनों ही कमर्शियल मात्रा की श्रेणी में।
गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 21/22 के तहत एफआईआर नंबर 191 दर्ज की गई।
श्रृंखलाबद्ध गिरफ्तारियाँ
मोरिस ओकाली की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली के चंदर विहार, निलोथी इलाके से दो और आरोपी पकड़े गए। इमैनुएल (लगभग 38 वर्ष, अकरा, घाना) के पास से 14 ग्राम एमडीएमए और इबेग्बू चिगोजी सैमुअल (लगभग 50 वर्ष, लागोस, नाइजीरिया) के पास से 254 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।
आगे की जाँच में दो भारतीय सह-आरोपी भी गिरफ्त में आए। समीर उर्फ नन्हे (लगभग 28 वर्ष, निवासी नंद नगरी, दिल्ली) को शालीमार गार्डन, गाजियाबाद से पकड़ा गया और उसके पास से 300 ग्राम हेरोइन मिली। एक महिला आरोपी (लगभग 36 वर्ष, निवासी शालीमार गार्डन, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) को पश्चिम विहार, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। जाँच में सामने आया कि समीर उर्फ नन्हे और उक्त महिला दोनों पहले भी कई आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे हैं।
नेटवर्क की कार्यप्रणाली
जाँच के अनुसार, यह एक सुसंगठित अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क था जिसमें भारतीय और विदेशी नागरिक मिलकर काम कर रहे थे। आरोपी हेरोइन और एमडीएमए की थोक व खुदरा खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण में सक्रिय रूप से शामिल थे। पुलिस के अनुसार, सहयोगियों के एक व्यापक नेटवर्क के ज़रिए यह गैर-कानूनी कारोबार दिल्ली-एनसीआर में फैला हुआ था।
ऑपरेशन टीम
यह कार्रवाई डीसीपी संजीव कुमार यादव की समग्र देखरेख और एसीपी सुनील श्रीवास्तव (ईस्टर्न रेंज-I) की कड़ी निगरानी में संपन्न हुई। फील्ड टीम में इंस्पेक्टर लिछमन, एसआई बिजेंद्र सिंह, एसआई अरविंद कुमार, एसआई शैलेंद्र तिवारी, एएसआई जोगिंदर, एएसआई बीप्ति, हेड कांस्टेबल सूर्य प्रकाश और हेड कांस्टेबल महा सिंह शामिल रहे।
आगे की जाँच
क्राइम ब्रांच के अनुसार, गिरोह के शेष सदस्यों की पहचान, उनकी भूमिकाओं का खुलासा और पूरे सप्लाई नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने की कोशिशें जारी हैं। यह मामला दर्शाता है कि दिल्ली-एनसीआर में अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क किस हद तक पैठ बना चुके हैं — और सुरक्षा एजेंसियों के लिए आगे की चुनौती केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि इन नेटवर्कों की फंडिंग और आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त करना है।