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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तोड़ा इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट, 5 गिरफ्तार; ₹12 करोड़ की हेरोइन-MDMA बरामद

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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तोड़ा इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट, 5 गिरफ्तार; ₹12 करोड़ की हेरोइन-MDMA बरामद

सारांश

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने शाहदरा में छापेमारी से शुरू हुए ऑपरेशन में एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को तोड़ा — 5 गिरफ्तार, ₹12 करोड़ की हेरोइन और MDMA बरामद। नाइजीरिया, घाना और भारत के आरोपियों का यह गठजोड़ दिल्ली-एनसीआर में थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर सक्रिय था।

मुख्य बातें

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 8 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में 2 नाइजीरियाई (मोरिस ओकाली, इबेग्बू चिगोजी सैमुअल), 1 घाना नागरिक (इमैनुएल) और 2 भारतीय (समीर उर्फ नन्हे व एक महिला) शामिल।
बरामदगी में 2.554 किलोग्राम हेरोइन , 881 ग्राम एमडीएमए और 11 मोबाइल फोन — अनुमानित कीमत ₹12 करोड़ ।
पहली गिरफ्तारी शाहदरा में हुई; बाद में चंदर विहार , गाजियाबाद और पश्चिम विहार से अन्य आरोपी पकड़े गए।
NDPS एक्ट 1985 की धारा 21/22 के तहत एफआईआर नंबर 191 दर्ज; गिरोह के शेष सदस्यों की तलाश जारी।

दिल्ली क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज-I ने 8 अगस्त 2026 को दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया — जिनमें 2 नाइजीरियाई, 1 घाना का नागरिक और 2 भारतीय शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 2.554 किलोग्राम हेरोइन, 881 ग्राम एमडीएमए और 11 मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाज़ार कीमत लगभग ₹12 करोड़ बताई जा रही है। यह कार्रवाई 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत की गई।

मुख्य घटनाक्रम

ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब क्राइम ब्रांच को पक्की सूचना मिली कि मोरिस ओकाली (52 वर्ष, नाइजीरियाई नागरिक, निवासी चंदर विहार, निलोथी, दिल्ली) 19/20 जुलाई की रात दिल्ली के शाहदरा स्थित एक अस्पताल के पास नशीले पदार्थों की खेप पहुँचाने वाला है। इंस्पेक्टर लिछमन की अगुवाई में रेडिंग टीम ने उक्त स्थान पर रणनीतिक तैनाती की और मोरिस ओकाली को दबोचा। उसके बैग से 2.004 किलोग्राम हेरोइन और 863 ग्राम एमडीएमए बरामद हुई — दोनों ही कमर्शियल मात्रा की श्रेणी में।

गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 21/22 के तहत एफआईआर नंबर 191 दर्ज की गई।

श्रृंखलाबद्ध गिरफ्तारियाँ

मोरिस ओकाली की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली के चंदर विहार, निलोथी इलाके से दो और आरोपी पकड़े गए। इमैनुएल (लगभग 38 वर्ष, अकरा, घाना) के पास से 14 ग्राम एमडीएमए और इबेग्बू चिगोजी सैमुअल (लगभग 50 वर्ष, लागोस, नाइजीरिया) के पास से 254 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।

आगे की जाँच में दो भारतीय सह-आरोपी भी गिरफ्त में आए। समीर उर्फ नन्हे (लगभग 28 वर्ष, निवासी नंद नगरी, दिल्ली) को शालीमार गार्डन, गाजियाबाद से पकड़ा गया और उसके पास से 300 ग्राम हेरोइन मिली। एक महिला आरोपी (लगभग 36 वर्ष, निवासी शालीमार गार्डन, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) को पश्चिम विहार, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। जाँच में सामने आया कि समीर उर्फ नन्हे और उक्त महिला दोनों पहले भी कई आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे हैं।

नेटवर्क की कार्यप्रणाली

जाँच के अनुसार, यह एक सुसंगठित अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क था जिसमें भारतीय और विदेशी नागरिक मिलकर काम कर रहे थे। आरोपी हेरोइन और एमडीएमए की थोक व खुदरा खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण में सक्रिय रूप से शामिल थे। पुलिस के अनुसार, सहयोगियों के एक व्यापक नेटवर्क के ज़रिए यह गैर-कानूनी कारोबार दिल्ली-एनसीआर में फैला हुआ था।

ऑपरेशन टीम

यह कार्रवाई डीसीपी संजीव कुमार यादव की समग्र देखरेख और एसीपी सुनील श्रीवास्तव (ईस्टर्न रेंज-I) की कड़ी निगरानी में संपन्न हुई। फील्ड टीम में इंस्पेक्टर लिछमन, एसआई बिजेंद्र सिंह, एसआई अरविंद कुमार, एसआई शैलेंद्र तिवारी, एएसआई जोगिंदर, एएसआई बीप्ति, हेड कांस्टेबल सूर्य प्रकाश और हेड कांस्टेबल महा सिंह शामिल रहे।

आगे की जाँच

क्राइम ब्रांच के अनुसार, गिरोह के शेष सदस्यों की पहचान, उनकी भूमिकाओं का खुलासा और पूरे सप्लाई नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने की कोशिशें जारी हैं। यह मामला दर्शाता है कि दिल्ली-एनसीआर में अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क किस हद तक पैठ बना चुके हैं — और सुरक्षा एजेंसियों के लिए आगे की चुनौती केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि इन नेटवर्कों की फंडिंग और आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरी चिंता का संकेत भी है — दिल्ली-एनसीआर में विदेशी नागरिकों और स्थानीय नेटवर्क का इस कदर संगठित गठजोड़ यह सवाल उठाता है कि ये लोग कितने अरसे से और किन माध्यमों से सक्रिय थे। ₹12 करोड़ की बरामदगी कमर्शियल मात्रा में है, जो बताती है कि यह कोई छोटा खुदरा ऑपरेशन नहीं था। असली परीक्षा आगे की जाँच में है — क्या पुलिस इस नेटवर्क की फंडिंग, आपूर्ति मार्ग और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों तक पहुँच पाती है, या यह मामला गिरफ्तारी तक सिमट कर रह जाता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने किस ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया?
दिल्ली क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज-I ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में हेरोइन और एमडीएमए की थोक व खुदरा आपूर्ति में सक्रिय था। इसमें नाइजीरिया, घाना और भारत के नागरिक शामिल थे।
इस ऑपरेशन में कितनी ड्रग्स बरामद हुई और उसकी कीमत क्या है?
पुलिस ने कुल 2.554 किलोग्राम हेरोइन, 881 ग्राम एमडीएमए और 11 मोबाइल फोन बरामद किए। बरामद नशीले पदार्थों की अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाज़ार कीमत लगभग ₹12 करोड़ बताई गई है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन्हें कहाँ से पकड़ा गया?
पाँच आरोपियों में मोरिस ओकाली (नाइजीरिया, शाहदरा से), इबेग्बू चिगोजी सैमुअल (नाइजीरिया, चंदर विहार से), इमैनुएल (घाना, चंदर विहार से), समीर उर्फ नन्हे (दिल्ली, गाजियाबाद से) और एक महिला (गाजियाबाद, पश्चिम विहार से) शामिल हैं। सभी पर NDPS एक्ट 1985 की धारा 21/22 के तहत मामला दर्ज है।
यह कार्रवाई किस अभियान के तहत हुई और इसका नेतृत्व किसने किया?
यह ऑपरेशन 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत किया गया। डीसीपी संजीव कुमार यादव की समग्र देखरेख और एसीपी सुनील श्रीवास्तव की निगरानी में इंस्पेक्टर लिछमन की टीम ने यह कार्रवाई अंजाम दी।
क्या इस गिरोह के और सदस्य अभी भी फरार हैं?
हाँ, क्राइम ब्रांच के अनुसार गिरोह के शेष सदस्यों की पहचान और उनकी भूमिकाओं का खुलासा करने की कोशिशें जारी हैं। पूरे सप्लाई नेटवर्क को उजागर करना अभी भी जाँच का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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