दिल्ली के गोल्फ लिंक्स में ₹35 लाख डकैती: ₹50 हजार इनामी फरार नौकर सुशील कुमार बिहार से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 2 नवंबर 2026 को एक अहम सफलता हासिल करते हुए नई दिल्ली के पॉश इलाके गोल्फ लिंक्स में हुई सशस्त्र डकैती के मुख्य फरार आरोपी को बिहार के मधुबनी जिले से गिरफ्तार किया। ₹50 हजार के इनामी इस आरोपी की पहचान 22 वर्षीय सुशील कुमार के रूप में हुई है, जो घटनास्थल पर घरेलू नौकर के रूप में कार्यरत था। 31 अक्टूबर 2026 को मधुबनी के घोघरडीहा रेलवे स्टेशन के निकट विशेष दल ने उसे दबोचा।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार यह मामला 16 अप्रैल 2026 का है, जब गोल्फ लिंक्स स्थित मकान नंबर 187 में 7 से 8 हथियारबंद बदमाश घुस आए। यह मकान 76 वर्षीय व्यवसायी अशोक चावला का है। तलवारों और अन्य घातक हथियारों से लैस हमलावरों ने परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की और ₹30 से 35 लाख नकद तथा कीमती गहने लूटकर फरार हो गए।
घटना के बाद तुगलक रोड थाने में मामला दर्ज किया गया। जाँच में सामने आया कि वारदात को घर के नए नौकर सुशील कुमार की भीतरी मिलीभगत से अंजाम दिया गया था। पुलिस ने इससे पहले 6 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन सुशील कुमार फरार हो गया था।
कानूनी कार्यवाही और इनाम
फरार होने के बाद न्यायालय ने सुशील कुमार के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। अपराध की गंभीरता को देखते हुए 22 अक्टूबर 2026 को उसकी गिरफ्तारी पर ₹50 हजार का नकद इनाम घोषित किया गया।
गौरतलब है कि दिल्ली क्राइम ब्रांच की विभिन्न इकाइयों को दिल्ली और अन्य राज्यों में सक्रिय कुख्यात, इनामी और फरार अपराधियों को पकड़ने का विशेष टास्क सौंपा गया था।
ऑपरेशन की रूपरेखा
एडवांस्ड तकनीकी निगरानी और जमीनी खुफिया तंत्र के माध्यम से पुलिस को बिहार के मधुबनी में आरोपी के छिपे होने की जानकारी मिली। इस पर इंस्पेक्टर वीर सिंह ने एक विशेष रेड टीम का गठन किया। सब-इंस्पेक्टर इमरान और अंकुर के नेतृत्व वाली इस टीम में एएसआई दीपचंद, एएसआई उमेश कुमार तथा हेड कांस्टेबल योगराज, मनोज, संदीप, मनीष, मुकेश चौधरी और अनूप शामिल थे।
इलाका नेपाल सीमा के करीब और संवेदनशील होने के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा। 31 अक्टूबर को टीम ने सुनियोजित तरीके से घोघरडीहा रेलवे स्टेशन के पास सुशील कुमार को घेरकर गिरफ्तार किया।
पुलिस नेतृत्व की भूमिका
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व इंस्पेक्टर वीर सिंह ने किया, जबकि निगरानी एसीपी पंकज अरोड़ा और डीसीपी (क्राइम ब्रांच) संजीव कुमार यादव ने की। यह ऑपरेशन क्राइम ब्रांच के एंटी-एक्सटॉर्शन एंड किडनैपिंग सेल (AEKC) ने संचालित किया।
आगे की कार्यवाही
1 नवंबर 2026 को आरोपी सुशील कुमार को नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। यह गिरफ्तारी उच्च-प्रोफाइल आवासीय इलाकों में भीतरी सूत्रों के जरिए होने वाली डकैतियों की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर भी ध्यान दिलाती है, जो दिल्ली पुलिस के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।